विधिक मापविज्ञान की वैश्विक बैठक की मेजबानी करेगा भारत

विधिक मापविज्ञान की वैश्विक बैठक की मेजबानी करेगा भारत

भारत 26 से 28 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय विधिक मापविज्ञान समिति (सीआईएमएल) की 61वीं बैठक की मेजबानी करेगा। उपभोक्ता मामले विभाग, अंतरराष्ट्रीय विधिक मापविज्ञान संगठन (ओआईएमएल) के साथ मिलकर इसका आयोजन करेगा। इसमें ओआईएमएल के सदस्य देशों, संबद्ध सदस्य देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के 100 से अधिक प्रतिनिधियों तथा विशेषज्ञों के शामिल होने की उम्मीद है। भारत पहली बार इस बैठक का मेजबान बनेगा।

ओआईएमएल और सीआईएमएल की भूमिका

ओआईएमएल की स्थापना 1955 में एक अंतर-सरकारी संगठन के रूप में हुई थी। इसका उद्देश्य अलग-अलग देशों में विधिक मापविज्ञान से जुड़ी प्रक्रियाओं में सामंजस्य बढ़ाना है। संगठन माप-यंत्रों और मापन प्रक्रियाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय सिफारिशें तथा आदर्श आवश्यकताएं विकसित करता है। इससे देशों के बीच माप संबंधी नियमों और तकनीकी मानकों को बेहतर ढंग से जोड़ने में मदद मिलती है।

सीआईएमएल में ओआईएमएल सदस्य देशों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। यह समिति संगठन के तकनीकी कार्यों और प्राथमिकताओं पर विचार करती है। नई दिल्ली की बैठक में अंतरराष्ट्रीय सिफारिशों के विकास और संशोधन, ओआईएमएल की तकनीकी गतिविधियों तथा ओआईएमएल प्रमाणन प्रणाली पर चर्चा होगी। यह प्रणाली भाग लेने वाली अर्थव्यवस्थाओं में माप-यंत्रों से जुड़े परीक्षण परिणामों और प्रमाणपत्रों के उपयोग को सुगम बनाती है।

व्यापार और उपभोक्ता संरक्षण में सटीक माप

विधिक मापविज्ञान में माप और माप-यंत्रों पर लागू कानूनी आवश्यकताएं शामिल होती हैं। इसका संबंध व्यापार, उपभोक्ता लेन-देन, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों से है। वजन, माप या संख्या के आधार पर बिकने वाली वस्तुओं के लेन-देन में सही माप जरूरी है। इससे खरीदार और विक्रेता के बीच मात्रा को लेकर स्पष्टता रहती है और माप-यंत्रों के लिए तय मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सकता है।

बैठक के साथ 26 अक्टूबर को “विधिक मापविज्ञान में बदलाव” विषय पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी होगी। इसमें इस क्षेत्र के डिजिटलीकरण और विभिन्न देशों की प्रणालियों में सामंजस्य जैसे विषय शामिल हैं। 27 अक्टूबर को प्रस्तावित ओआईएमएल रणनीति कार्यशाला में संगठन की भावी दिशा, प्राथमिकताओं और उभरती चुनौतियों पर विचार किया जाएगा।

भारत का कानूनी ढांचा और बैठक का महत्व

भारत में बाट और माप के मानकों तथा व्यापार-वाणिज्य में उनके उपयोग के लिए विधिक मापविज्ञान अधिनियम, 2009 कानूनी आधार प्रदान करता है। इस अधिनियम का प्रशासन उपभोक्ता मामले विभाग करता है। नई दिल्ली में होने वाली बैठक से भारत को मापन मानकों पर अंतरराष्ट्रीय विचार-विमर्श में भागीदारी का अवसर मिलेगा। साथ ही, यह व्यापार और उपभोक्ता संरक्षण से जुड़े नियमों के महत्व को वैश्विक मंच पर रेखांकित करेगी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • अंतरराष्ट्रीय विधिक मापविज्ञान संगठन की स्थापना 1955 में हुई थी।
  • सीआईएमएल की 60वीं बैठक 13 से 15 अक्टूबर 2025 तक पेरिस में आयोजित हुई थी।
  • सीआईएमएल की 61वीं बैठक 26 से 28 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली में होगी; भारत इसकी पहली बार मेजबानी करेगा।
  • भारत में बाट और माप के मानकों का कानूनी ढांचा विधिक मापविज्ञान अधिनियम, 2009 से निर्धारित होता है।

नई दिल्ली की बैठक में तकनीकी मानकों, प्रमाणन और मापन प्रणालियों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर चर्चा होगी। ये विषय वैश्विक व्यापार में भरोसेमंद माप और उपभोक्ता हितों के लिए अहम हैं।

Originally written on October 19, 2026 and last modified on October 19, 2026.

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