रोशिबिना देवी ने लगातार तीसरे एशियाई खेल में भारत का परचम लहराया
भारतीय वुशु खिलाड़ी रोशिबिना देवी ने जापान के आइची-नागोया में 24 सितंबर 2026 को महिलाओं की 60 किग्रा सांडा स्पर्धा में रजत पदक जीतकर एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज की। इस पदक के साथ वह लगातार तीन एशियाई खेलों में पदक जीतने वाली पहली भारतीय बनीं।
फाइनल तक का सफर और निर्णायक मुकाबला
रोशिबिना ने फाइनल में जगह बनाने से पहले शानदार प्रदर्शन किया। सेमीफाइनल में उन्होंने इंडोनेशिया की थानिया कुसुमानिंगत्यास को 2-0 से हराया और खिताबी मुकाबले में प्रवेश किया। हालांकि, फाइनल में आइची प्रीफेक्चरल मार्शल आर्ट्स हॉल में उन्हें चीन की झांग शियाओयू के खिलाफ 2-0 से हार का सामना करना पड़ा।
यह रजत पदक उनके लिए इसलिए भी खास है क्योंकि इससे एशियाई खेलों में उनकी पदक-यात्रा 2018, 2023 और 2026 तक लगातार बनी रही। इससे पहले उन्होंने जकार्ता 2018 में कांस्य और हांगझोउ 2023 में रजत पदक जीता था।
वुशु और सांडा क्या है
वुशु चीन की पारंपरिक मार्शल आर्ट है, जिसमें मुख्य रूप से दो विधाएं होती हैं—ताओलू और सांडा। ताओलू में तकनीकी प्रदर्शन और रूप-रेखा पर जोर होता है, जबकि सांडा मुकाबले या स्पैरिंग की विधा है। इसमें मुक्के, लात, फेंक और टेकडाउन जैसे दांव नियत नियमों के तहत लगाए जाते हैं।
सांडा को कई बार चीनी बॉक्सिंग या सानशो के नाम से भी जाना जाता है। एशियाई खेलों में वुशु का शामिल होना इस खेल की महाद्वीपीय लोकप्रियता को दर्शाता है, और भारत के लिए इसमें पदक जीतना तकनीकी दक्षता और मुकाबला कौशल दोनों का संकेत माना जाता है।
भारत के लिए यह उपलब्धि क्यों अहम है
रोशिबिना देवी का यह प्रदर्शन भारतीय मार्शल आर्ट्स के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। लगातार तीन एशियाई खेलों में पदक जीतना किसी भी खिलाड़ी के लिए निरंतरता, मानसिक मजबूती और उच्च स्तर की तैयारी का प्रमाण होता है।
24 सितंबर 2026 तक एशियाई खेलों में भारत का पदक-आंकड़ा 14 तक पहुंच गया था, जिसमें एक स्वर्ण, छह रजत और सात कांस्य शामिल थे। रोशिबिना का रजत इस कुल में एक और महत्वपूर्ण योगदान रहा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- एशियाई खेलों का आयोजन ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया करती है।
- वुशु में मुख्य रूप से दो विधाएं होती हैं: ताओलू और सांडा।
- सांडा को कुछ संदर्भों में चीनी बॉक्सिंग या सानशो भी कहा जाता है।
- रोशिबिना देवी ने 2018, 2023 और 2026 के एशियाई खेलों में पदक जीते हैं।
रोशिबिना देवी की यह उपलब्धि भारतीय वुशु के बढ़ते स्तर को दिखाती है और यह भी बताती है कि भारत अब मार्शल आर्ट्स की प्रतिस्पर्धी दुनिया में लगातार अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है।