रोगुन बांध: दुनिया के सबसे ऊंचे डैम की ओर ताजिकिस्तान की बड़ी परियोजना
ताजिकिस्तान में वख्श नदी पर बन रहा रोगुन जलविद्युत परियोजना का बांध अब दुनिया के सबसे ऊंचे बांध बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसकी डिजाइन ऊंचाई 335 मीटर रखी गई है, और पूरा होने पर यह वैश्विक स्तर पर एक नई इंजीनियरिंग पहचान दर्ज कर सकता है। यह परियोजना केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि मध्य एशिया की ऊर्जा जरूरतों, जल प्रबंधन और क्षेत्रीय आपूर्ति से भी जुड़ी हुई है।
रोगुन परियोजना की तकनीकी खासियतें
रोगुन बांध एक रॉकफिल डैम है, जिसके भीतर क्ले कोर बनाया जा रहा है ताकि पानी का रिसाव कम हो सके। अगस्त 2026 तक इसकी ऊंचाई लगभग 190 मीटर तक पहुंच चुकी थी और यह समुद्र तल से 1,155 मीटर की ऊंचाई तक निर्मित हो चुका था। नवीनतम चरण के बाद जलाशय का जलस्तर 1,140 मीटर तक पहुंचाने की योजना है।
परियोजना में छह उत्पादन इकाइयों की योजना है, जिनमें प्रत्येक की क्षमता 600 मेगावाट होगी। इनमें से दो इकाइयां पहले ही चालू हो चुकी हैं। पूरी परियोजना के बाद स्थापित क्षमता 3,600 मेगावाट तक पहुंचने की उम्मीद है, जबकि कुछ दस्तावेजों में इसकी डिजाइन उत्पादन क्षमता 3,780 मेगावाट भी बताई गई है।
वख्श नदी और क्षेत्रीय महत्व
यह परियोजना नुरेक जलविद्युत संयंत्र के ऊपर की ओर स्थित है और राजधानी दुशांबे से लगभग 110 किलोमीटर दूर है। वख्श नदी, अमू दरिया नदी तंत्र की एक प्रमुख सहायक नदी है, इसलिए रोगुन परियोजना का महत्व केवल ताजिकिस्तान तक सीमित नहीं रहता। यह मध्य एशिया में जल संसाधनों और ऊर्जा संतुलन से जुड़ी व्यापक तस्वीर का हिस्सा है।
निर्माण कार्य में भूमिगत डायवर्जन टनल, नींव को मजबूत करने वाले कार्य और ग्राउट कर्टेन जैसी तकनीकों का उपयोग किया गया है। अगस्त 2026 तक लगभग 4.9 करोड़ घन मीटर सामग्री डाली जा चुकी थी और नींव तथा ग्राउट कर्टेन के लिए 5 लाख से अधिक रैखिक मीटर ड्रिलिंग पूरी की जा चुकी थी।
बिजली उत्पादन, वित्तपोषण और भविष्य की योजना
पूरा होने पर यह संयंत्र हर साल लगभग 14,400 गीगावाट-घंटे नवीकरणीय बिजली पैदा कर सकता है। ताजिकिस्तान के लिए यह उत्पादन खास तौर पर सर्दियों में होने वाली बिजली कमी को कम करने में मददगार माना जा रहा है। इसके साथ ही कजाखस्तान और उज्बेकिस्तान को बिजली निर्यात की योजना भी जुड़ी हुई है।
जून 2026 में विश्व बैंक ने परियोजना के दूसरे चरण के लिए 300 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त अनुदान मंजूर किया, जिससे कुल नियोजित वित्तपोषण 650 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया। ताजिकिस्तान ने 2026 में रोगुन के लिए कम से कम 10 अरब सोमोनी का प्रावधान भी किया है। परियोजना की कुल अनुमानित लागत 2035 तक लगभग 5.8 अरब डॉलर बताई गई है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- जलविद्युत में बहते या गिरते पानी की ऊर्जा का उपयोग करके बिजली बनाई जाती है।
- रॉकफिल डैम में संकुचित पत्थरों का उपयोग होता है, जबकि क्ले कोर रिसाव रोकने में मदद करता है।
- वख्श नदी अमू दरिया बेसिन का हिस्सा है, जो मध्य एशिया के जल बंटवारे के लिए महत्वपूर्ण है।
- रोगुन परियोजना में छह टर्बाइन प्रस्तावित हैं, जिनमें प्रत्येक की क्षमता 600 मेगावाट है।
रोगुन बांध की प्रगति यह दिखाती है कि बड़े जलविद्युत प्रोजेक्ट आज भी ऊर्जा सुरक्षा, क्षेत्रीय सहयोग और इंजीनियरिंग क्षमता के अहम प्रतीक बने हुए हैं।