रूस के कामचटका क्षेत्र में बेज़ीमियानी ज्वालामुखी का पुनर्निर्माण: विनाश के बाद पुनर्जीवन की जीवित प्रयोगशाला

रूस के कामचटका क्षेत्र में बेज़ीमियानी ज्वालामुखी का पुनर्निर्माण: विनाश के बाद पुनर्जीवन की जीवित प्रयोगशाला

रूस के कामचटका प्रायद्वीप में स्थित बेज़ीमियानी (Bezymianny) ज्वालामुखी, जो 1956 की सोवियत युग की विनाशकारी विस्फोट के बाद लगभग ध्वस्त हो गया था, अब अपनी मूल ऊँचाई के करीब पहुंच चुका है। यह घटना वैज्ञानिकों को एक दुर्लभ अवसर प्रदान कर रही है कि वे किसी स्ट्रैटोवोल्केनो (Stratovolcano) के दीर्घकालिक पुनर्निर्माण को सजीव रूप में देख और समझ सकें।

1956 का विस्फोट और ज्वालामुखी संरचना का पतन

30 मार्च 1956 को बेज़ीमियानी में हुआ विस्फोट 20वीं सदी के सबसे शक्तिशाली विस्फोटों में से एक माना जाता है। इस दौरान एक लेटरल ब्लास्ट (पार्श्व विस्फोट) ने ज्वालामुखी की पूर्वी ढलान को नष्ट कर दिया, जिससे एक 1.3 किमी चौड़ा कटोरे के आकार का गड्ढा बन गया और लगभग 0.7 घन किलोमीटर सामग्री विस्फारित हुई।

इस घटना की तुलना 1980 में हुए माउंट सेंट हेलेंस के विस्फोट से की जाती है। विस्फोट के बाद ज्वालामुखी का शिखर पूरी तरह नष्ट हो गया था।

दशकों से चल रहा पुनर्निर्माण

विस्फोट के कुछ महीनों के भीतर ही बेज़ीमियानी ने लावा डोम के रूप में खुद का पुनर्निर्माण शुरू कर दिया। इसके बाद लगातार छोटे से मध्यम स्तर के विस्फोट, बहने वाला लावा, और पायरोक्लास्टिक जमाव होते रहे।

Communications Earth & Environment’ नामक शोध पत्रिका में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, 1956 से 2017 के बीच बेज़ीमियानी में औसतन 26,400 घन मीटर प्रति दिन ज्वालामुखीय सामग्री का संचय हुआ, जिससे इसकी ऊँचाई और पारंपरिक स्ट्रैटोवोल्केनो आकार धीरे-धीरे बहाल हो रहा है।

हालिया गतिविधियाँ और निगरानी प्रणाली

2025 के अंत में, बेज़ीमियानी में फिर से सक्रियता देखी गई, जिसमें 10 से 11 किलोमीटर ऊंचे राख के गुबार, और दक्षिण-पूर्वी ढलान पर पायरोक्लास्टिक बहाव देखे गए।

इन गतिविधियों की निगरानी:

  • Global Volcanism Program
  • Kamchatka Volcanic Eruption Response Team (KVERT)
  • उपग्रह चित्रण, थर्मल एनॉमली डिटेक्शन और स्थलीय उपकरणों के माध्यम से की जा रही है।

ये तकनीकें ज्वालामुखी की गर्मी और लावा निष्कासन को निरंतर रिकॉर्ड कर रही हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

बेज़ीमियानी रूस के कामचटका प्रायद्वीप में स्थित एक सक्रिय स्ट्रैटोवोल्केनो है।

• 1956 के विस्फोट में लेटरल ब्लास्ट और ढलान पतन (sector collapse) शामिल था।

• ज्वालामुखी के पुनर्निर्माण में लावा डोम और बहती लावा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

Aviation Colour Codes (जैसे Red, Orange) का उपयोग ज्वालामुखीय राख के खतरों को संकेतित करने हेतु किया जाता है।

वैज्ञानिक महत्त्व और जोखिम

2017 तक, बेज़ीमियानी की ऊँचाई 3,020 मीटर तक पहुंच चुकी थी, जो कि विस्फोट से पहले की 3,113 मीटर ऊँचाई से केवल 90 मीटर कम थी। अगर यही दर बनी रही, तो अनुमान है कि यह ज्वालामुखी 2030 के दशक की शुरुआत तक अपनी पूर्ण ऊंचाई प्राप्त कर सकता है।

हालाँकि, कमजोर हो चुकी संरचना के भीतर तेजी से होता पुनर्निर्माण भविष्य में फिर से पतन का खतरा भी बढ़ाता है। इसलिए इस ज्वालामुखी की लगातार निगरानी से वैज्ञानिकों को ज्वालामुखीय खतरे के आकलन और स्ट्रैटोवोल्केनो के चक्रीय व्यवहार को बेहतर समझने में सहायता मिल रही है।

बेज़ीमियानी एक जीवंत प्रयोगशाला बन चुका है, जो हमें यह दिखाता है कि प्रकृति कैसे विनाश के बाद भी अपने स्वरूप को पुनः रचती है।

Originally written on December 27, 2025 and last modified on December 27, 2025.

1 Comment

  1. Vinay Mishra

    December 29, 2025 at 7:09 pm

    भूगर्भीय जल के तापमान पर भी कुछ असर हुआ होगा, शायद कोई सतह ठंडी हो रही हो

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