यूनेस्को की अस्थायी सूची में भारत के तीन नए धरोहर स्थल
भारत के तीन स्थलों को 20 अक्टूबर 2026 को यूनेस्को की विश्व धरोहर अस्थायी सूची में शामिल किया गया। इनमें अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के दो विशिष्ट भूवैज्ञानिक क्षेत्र और छत्तीसगढ़ का सिरपुर सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक परिदृश्य शामिल हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने इन स्थलों से जुड़ा विरासत अनुसंधान और दस्तावेजीकरण तैयार किया है। यह कदम इनके वैश्विक महत्व को रेखांकित करता है, लेकिन इससे ये स्थल अभी विश्व धरोहर सूची में शामिल नहीं हुए हैं।
अस्थायी सूची का महत्व
यूनेस्को का विश्व धरोहर अभिसमय वर्ष 1972 में अपनाया गया था। इसका उद्देश्य ऐसे सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत स्थलों की रक्षा करना है, जिनका महत्व पूरी मानवता के लिए असाधारण हो। अस्थायी सूची उन संपत्तियों की सूची है जिन्हें संबंधित देश भविष्य में विश्व धरोहर सूची में नामांकन के योग्य मानता है। किसी स्थल को औपचारिक नामांकन के लिए पहले अपने देश की अस्थायी सूची में शामिल होना आवश्यक है।
अस्थायी सूची में जगह मिलना अंतिम दर्जा नहीं है। नामांकन पर निर्णय विश्व धरोहर समिति करती है, जिसमें निर्वाचित सदस्य देशों के 21 प्रतिनिधि होते हैं। इसलिए नए भारतीय स्थलों का शामिल होना संरक्षण और संभावित नामांकन की दिशा में एक शुरुआती कदम है।
अंडमान के भूवैज्ञानिक स्थल
बाराटांग का कार्स्ट-मड-वोल्केनो परिसर चूना-पत्थर की गुफाओं और सक्रिय कीचड़ ज्वालामुखियों के लिए जाना जाता है। कार्स्ट भू-दृश्य तब बनते हैं जब चूना-पत्थर जैसी घुलनशील चट्टानें पानी के संपर्क में धीरे-धीरे घुलती हैं। कीचड़ ज्वालामुखियों के मुखों से कीचड़, गैसें और द्रव बाहर निकलते हैं। ये स्थल द्वीपसमूह की विशिष्ट भू-प्राकृतिक प्रक्रियाओं को समझने में मदद करते हैं।
अंडमान सबडक्शन ज्वालामुखी क्षेत्र में बैरन द्वीप और नारकोंडम द्वीप के ज्वालामुखीय भू-आकार शामिल हैं। बैरन द्वीप भारत का एकमात्र पुष्ट सक्रिय ज्वालामुखी वाला क्षेत्र है। इन ज्वालामुखीय विशेषताओं का संबंध अंडमान द्वीप चाप के साथ चलने वाली विवर्तनिक प्रक्रियाओं से है।
सिरपुर का सांस्कृतिक और पुरातात्विक महत्व
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में महानदी के किनारे स्थित सिरपुर, प्राचीन दक्षिण कोसल राज्य से जुड़ा पुरातात्विक स्थल है। यहां हिंदू और बौद्ध धार्मिक स्थापत्य के अवशेष मिलते हैं। सिरपुर का सातवीं शताब्दी का लक्ष्मण मंदिर ईंटों से निर्मित है और भगवान विष्णु को समर्पित है। एक ही क्षेत्र में मौजूद ये अवशेष यहां के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थापत्य की विविधता को दर्शाते हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- विश्व धरोहर अभिसमय वर्ष 1972 में अपनाया गया था।
- बैरन द्वीप भारत का एकमात्र पुष्ट सक्रिय ज्वालामुखी वाला क्षेत्र है।
- सिरपुर का लक्ष्मण मंदिर सातवीं शताब्दी का ईंटों से बना विष्णु मंदिर है।
- जुलाई 2026 में सारनाथ का प्राचीन बौद्ध स्थल विश्व धरोहर सूची में शामिल हुआ; अस्थायी सूची में शामिल नए स्थल इससे अलग हैं।
इन तीन स्थलों की अस्थायी सूची में प्रविष्टि भारत की भूवैज्ञानिक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण है। अब इनके संरक्षण और संभावित नामांकन पर आगे की तैयारी अहम होगी।