यासुओ फुकुदा का निधन, जापान-चीन संबंधों में छोड़ी अहम छाप
जापान के पूर्व प्रधानमंत्री यासुओ फुकुदा का 22 अक्टूबर 2026 को 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनकी मृत्यु का कारण हृदय विफलता बताया गया। फुकुदा ने सितंबर 2007 से सितंबर 2008 तक जापान की सरकार का नेतृत्व किया और एशियाई पड़ोसियों के साथ संबंध बेहतर करने पर जोर दिया।
राजनीति में परिवार की विरासत और फुकुदा का सफर
16 जुलाई 1936 को गुन्मा प्रान्त के ताकासाकी शहर में जन्मे फुकुदा ने वासेदा विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की। वे जापान के पूर्व प्रधानमंत्री ताकेओ फुकुदा के सबसे बड़े पुत्र थे। पिता और पुत्र—दोनों का जापान का प्रधानमंत्री बनना देश की राजनीति में एक उल्लेखनीय पारिवारिक निरंतरता रही। यासुओ फुकुदा ऐसे पहले व्यक्ति थे जिनके पिता जापान के पूर्व प्रधानमंत्री रह चुके थे और जिन्होंने स्वयं भी यह पद संभाला।
प्रधानमंत्री बनने से पहले फुकुदा ने 2000 से 2004 तक मुख्य कैबिनेट सचिव के रूप में काम किया। यह पद मंत्रिमंडलों के बीच समन्वय और सरकार की ओर से प्रमुख वक्तव्य देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सितंबर 2007 में उन्होंने शिन्जो आबे के बाद प्रधानमंत्री का पद संभाला और सितंबर 2008 में पद छोड़ दिया। उनके पिता ताकेओ फुकुदा 1976 से 1978 तक जापान के प्रधानमंत्री रहे थे।
जापान में प्रधानमंत्री और संसद की भूमिका
जापान की राष्ट्रीय विधायिका को डाइट कहा जाता है। इसमें प्रतिनिधि सभा और पार्षद सभा शामिल हैं। प्रधानमंत्री का चयन डाइट करती है और सम्राट उन्हें औपचारिक रूप से नियुक्त करते हैं। यदि दोनों सदन अलग-अलग उम्मीदवार चुनें और संवैधानिक प्रक्रिया से सहमति न बन पाए, तो प्रतिनिधि सभा का निर्णय प्रभावी होता है।
प्रधानमंत्री मंत्रिमंडल का नेतृत्व करते हैं और मंत्रियों की नियुक्ति करते हैं। मंत्रियों में से बहुमत का डाइट का सदस्य होना आवश्यक है। जापान की संसदीय व्यवस्था में मंत्रिमंडल सामूहिक रूप से डाइट के प्रति जवाबदेह होता है। देश का संविधान 1946 में घोषित हुआ और 1947 में प्रभावी हुआ; इसमें सम्राट को राज्य और जनता की एकता का प्रतीक बताया गया है।
चीन के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने की पहल
फुकुदा सरकार ने चीन समेत एशियाई देशों के साथ निकट संबंध बनाने की कोशिश की। मई 2008 में उन्होंने चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओ की जापान यात्रा की मेजबानी की। एक दशक में किसी चीनी राष्ट्राध्यक्ष की यह पहली जापान यात्रा थी। दोनों नेताओं ने साझा रणनीतिक हितों के आधार पर पारस्परिक लाभ वाले संबंध विकसित करने का लक्ष्य व्यक्त किया। यह पहल ऐसे समय में हुई जब क्षेत्रीय सहयोग और द्विपक्षीय संवाद एशिया की कूटनीति के अहम विषय थे।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- जापान की राष्ट्रीय विधायिका का नाम डाइट है, जिसमें प्रतिनिधि सभा और पार्षद सभा शामिल हैं।
- वासेदा विश्वविद्यालय टोक्यो स्थित एक निजी विश्वविद्यालय है।
- ताकेओ फुकुदा ने 1976 से 1978 तक जापान के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया।
- यासुओ फुकुदा का प्रधानमंत्री कार्यकाल सितंबर 2007 से सितंबर 2008 तक रहा।
फुकुदा का राजनीतिक जीवन जापान की संसदीय व्यवस्था और एशियाई कूटनीति, विशेषकर चीन के साथ संवाद, से जुड़ा रहा।