मुथुस्वामी दीक्षितर की 250वीं जयंती पर जारी हुआ विशेष सिक्का
कर्नाटक संगीत के महान रचनाकार मुथुस्वामी दीक्षितर की 250वीं जयंती के अवसर पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 3 नवंबर 2026 को 250 रुपये का स्मारक सिक्का जारी किया। वाराणसी स्थित आईआईटी-बीएचयू के स्वतंत्रता भवन में आयोजित कार्यक्रम में दीक्षितर के जीवन और संगीत योगदान पर आधारित पुस्तक का भी लोकार्पण हुआ।
संग्रहकर्ताओं के लिए विशेष सिक्का
यह सीमित संस्करण का सिक्का सामान्य बाजार में रोजमर्रा के लेन-देन के लिए जारी नहीं किया गया है। इसका वजन 35 ग्राम है और इसमें 50 प्रतिशत चांदी, 40 प्रतिशत तांबा, 5 प्रतिशत निकल तथा 5 प्रतिशत जस्ता शामिल हैं। सिक्के का निर्माण मुंबई स्थित भारत सरकार टकसाल ने किया है। इसे टकसाल की वेबसाइट पर 6,985 रुपये में खरीदने के लिए उपलब्ध कराया गया।
स्मारक सिक्के किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति, घटना या अवसर की याद में जारी किए जाते हैं। कुछ स्मारक सिक्के सीमित अवधि के लिए प्रचलन में आ सकते हैं, जबकि कुछ मुख्य रूप से संग्रहण के उद्देश्य से बनाए जाते हैं। दीक्षितर की जयंती पर जारी सिक्का दूसरी श्रेणी का है और इसे सामान्य मुद्रा की तरह इस्तेमाल करने के लिए नहीं बनाया गया है।
दीक्षितर के संगीत और रचनाओं की विशेषता
मुथुस्वामी दीक्षितर कर्नाटक संगीत की त्रिमूर्ति के एक प्रमुख सदस्य थे। इस परंपरा के अन्य दो महान रचनाकार त्यागराज और श्यामा शास्त्री हैं। दीक्षितर की अधिकांश रचनाएं संस्कृत में हैं। उनमें भक्ति, भारतीय दर्शन और शास्त्रीय संगीत की परंपराओं का मेल दिखाई देता है।
दीक्षितर ने असम्पूर्ण मेल पद्धति के अंतर्गत 72 मेलकर्ता रागों में कृतियों की रचना की। इस पद्धति ने कई दुर्लभ और लगभग भुलाए जा चुके रागों को संरक्षित करने में योगदान दिया। उनकी रचनाएं कर्नाटक संगीत के सभी सात मूल तालों में मिलती हैं। रागों के स्वरूप को वीणा जैसी शैली में उभारने और गमकों के प्रयोग के लिए भी उनका संगीत जाना जाता है।
पुस्तक में जीवन और संगीत-दर्शन पर प्रकाश
कार्यक्रम में ‘अमर गुरुगुहं पोत्रुवम’ नामक पुस्तक का विमोचन किया गया। इसमें दीक्षितर के जीवन, दर्शन और संगीत संबंधी योगदान को प्रस्तुत किया गया है। उनका संगीत आज भी कर्नाटक संगीत की प्रस्तुति और अध्ययन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- कर्नाटक संगीत की त्रिमूर्ति में मुथुस्वामी दीक्षितर, त्यागराज और श्यामा शास्त्री शामिल हैं।
- दीक्षितर की अधिकांश रचनाएं संस्कृत भाषा में हैं।
- मेलकर्ता पद्धति में 72 मूल राग माने जाते हैं; दीक्षितर ने इन सभी में कृतियां रचीं।
- कर्नाटक संगीत में सात मूल ताल होते हैं और दीक्षितर की रचनाएं इन सभी तालों में मिलती हैं।
स्मारक सिक्का और नई पुस्तक, दोनों के माध्यम से दीक्षितर की संगीत-विरासत को सामने लाने का प्रयास किया गया है। उनकी रचनाएं भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई हैं।