मिशन सुदर्शन चक्र के तहत भारत ने बहु-स्तरीय मिसाइल रक्षा प्रणाली को दी नई गति

मिशन सुदर्शन चक्र के तहत भारत ने बहु-स्तरीय मिसाइल रक्षा प्रणाली को दी नई गति

भारत ने वर्ष 2026 में स्वदेशी बहु-स्तरीय मिसाइल रक्षा कार्यक्रम ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। मिसाइल परीक्षणों और नई रक्षा अवसंरचना के विकास के माध्यम से देश अपनी रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह कार्यक्रम बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा, वायु रक्षा और एंटी-शिप युद्ध प्रणालियों को एकीकृत करते हुए सैन्य प्रतिष्ठानों, महत्वपूर्ण अवसंरचना और रणनीतिक परिसंपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है।

क्या है बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली?

बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा (Ballistic Missile Defence – BMD) एक ऐसी प्रणाली है, जिसका उद्देश्य दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों का पता लगाना, उनका पीछा करना और लक्ष्य तक पहुंचने से पहले उन्हें नष्ट करना होता है। भारत की विकसित हो रही मिसाइल रक्षा संरचना विशेष रूप से इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलों (IRBM) जैसे खतरों का सामना करने के लिए तैयार की जा रही है। इस श्रेणी की मिसाइलों की मारक क्षमता 2,000 किलोमीटर से 5,000 किलोमीटर के बीच होती है।

डीआरडीओ के सफल मिसाइल परीक्षण

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 10 और 11 जून 2026 को लगातार तीन सफल मिसाइल उड़ान परीक्षण किए। इन परीक्षणों ने भारत की बहु-स्तरीय बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली और एंटी-शिप युद्ध क्षमता से जुड़ी महत्वपूर्ण तकनीकों को प्रमाणित किया। इन परीक्षणों के माध्यम से विभिन्न इंटरसेप्टर प्रणालियों, लक्ष्य पहचान तकनीकों और रक्षा क्षमताओं का मूल्यांकन किया गया, जो भविष्य की रक्षा संरचना का आधार बनेंगी।

प्रमुख प्रणालियों का परीक्षण

ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (Integrated Test Range) से दो उन्नत इंटरसेप्टर मिसाइलों का सफल परीक्षण किया गया। इन मिसाइलों का उद्देश्य आने वाले हवाई खतरों को विभिन्न स्तरों पर रोकना है। इसके अलावा नौसेना के लिए विकसित नेवल एंटी-शिप मिसाइल–मीडियम रेंज (NASM-MR) ने भी अपना पहला सफल उड़ान परीक्षण पूरा किया। इस परीक्षण में मिसाइल की नेविगेशन प्रणाली और अंतिम चरण की सटीकता का मूल्यांकन किया गया, जो किसी भी मिसाइल के प्रदर्शन के महत्वपूर्ण मानदंड माने जाते हैं।

मिशन सुदर्शन चक्र का उद्देश्य

मिशन सुदर्शन चक्र की घोषणा 15 अगस्त 2025 को की गई थी। इसका लक्ष्य वर्ष 2035 तक भारत के लिए एक समग्र और बहु-स्तरीय मिसाइल रक्षा तंत्र विकसित करना है। इस मिशन में वायु रक्षा, बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा और आक्रामक हवाई क्षमताओं को एकीकृत किया जा रहा है। यह प्रणाली सैन्य अड्डों, महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अवसंरचना और नागरिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायक होगी।

प्रोजेक्ट कुशा की भूमिका

मिशन सुदर्शन चक्र का एक प्रमुख हिस्सा प्रोजेक्ट कुशा है, जो भारत की स्वदेशी लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है। इस परियोजना के अंतर्गत 150 किलोमीटर, 250 किलोमीटर तथा 350 से 400 किलोमीटर तक की दूरी वाले तीन इंटरसेप्टर संस्करण विकसित किए जा रहे हैं। इसकी तुलना रूस की प्रसिद्ध एस-400 ट्रायम्फ वायु रक्षा प्रणाली से की जाती है। प्रोजेक्ट कुशा भारत की दीर्घकालिक वायु रक्षा रणनीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ माना जा रहा है।

नई रक्षा अवसंरचना को बढ़ावा

12 जून 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हैदराबाद स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम मिसाइल कॉम्प्लेक्स में एडवांस्ड वेपन सिस्टम कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन किया। यह सुविधा स्वदेशी मिसाइल और वायु रक्षा प्रणालियों के अनुसंधान, विकास और उत्पादन को गति देने के लिए विकसित की गई है। इसे भारत के रक्षा नवाचार और आत्मनिर्भरता अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

रणनीतिक महत्व

भारत की रक्षा नीति वर्तमान में आत्मनिर्भरता, त्वरित उत्पादन क्षमता और स्वदेशी तकनीकी विकास पर केंद्रित है। मिशन सुदर्शन चक्र के माध्यम से सरकार सैन्य, अनुसंधान संस्थानों और निजी उद्योगों के बीच समन्वय स्थापित कर एक मजबूत रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना चाहती है। इससे देश की प्रतिरोधक क्षमता, रणनीतिक स्वायत्तता और राष्ट्रीय सुरक्षा को दीर्घकालिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • डीआरडीओ भारत की प्रमुख रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्था है।
  • चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज ओडिशा का प्रमुख मिसाइल परीक्षण केंद्र है।
  • इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलों की मारक क्षमता 2,000 से 5,000 किलोमीटर तक होती है।
  • एनएएसएम-एमआर (NASM-MR) एक मध्यम दूरी की नौसैनिक एंटी-शिप मिसाइल है।
  • प्रोजेक्ट कुशा भारत की स्वदेशी लंबी दूरी की वायु रक्षा परियोजना है।
  • एस-400 ट्रायम्फ रूस की लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है।
  • आयरन डोम इज़राइल की अल्प दूरी की वायु रक्षा प्रणाली है।

मिशन सुदर्शन चक्र के तहत हो रहे विकास भारत की रक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों, उन्नत वायु रक्षा नेटवर्क और आधुनिक अनुसंधान अवसंरचना के माध्यम से भारत वर्ष 2035 तक एक मजबूत और बहु-स्तरीय रक्षा ढांचा स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

Originally written on June 13, 2026 and last modified on June 13, 2026.

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