मिशन कर्मयोगी में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर

मिशन कर्मयोगी में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर

सरकारी अधिकारियों और विभागों की क्षमता-विकास पहल मिशन कर्मयोगी के क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान हासिल किया है। 23 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में आयोजित उत्तरी क्षेत्रीय कार्यशाला में इस आकलन के परिणाम सामने रखे गए। राजस्थान दूसरे और जम्मू-कश्मीर तीसरे स्थान पर रहे।

प्रशासनिक क्षमता बढ़ाने की पहल

मिशन कर्मयोगी का औपचारिक नाम सिविल सेवा क्षमता-विकास का राष्ट्रीय कार्यक्रम (एनपीसीएससीबी) है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सितंबर 2020 में इसे मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य सरकारी अधिकारियों को लगातार सीखने और प्रशिक्षण के अवसर देकर उनकी कार्यक्षमता को मजबूत करना है। कार्यक्रम में पद और भूमिका के अनुरूप प्रशिक्षण के साथ-साथ अधिकारियों की दक्षताओं के विकास पर जोर दिया गया है।

इस पहल का प्रमुख डिजिटल माध्यम आईगॉट कर्मयोगी मंच है, जहां सरकारी कर्मियों के लिए ऑनलाइन सीखने और प्रशिक्षण की व्यवस्था है। इसका मकसद प्रशिक्षण को नियमित और सुगम बनाना तथा अलग-अलग भूमिकाओं के लिए जरूरी कौशल विकसित करना है।

उत्तर प्रदेश में प्रशिक्षण की व्यापक भागीदारी

23 अक्टूबर 2026 तक उत्तर प्रदेश के लगभग 19.23 लाख उपयोगकर्ता आईगॉट कर्मयोगी मंच पर पंजीकृत थे। राज्य में सक्रिय भागीदारी 99 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई। इसके अलावा, उन्नति पहल के तहत राज्य के 350 से अधिक प्रशिक्षण संस्थानों ने पंजीकरण कराया है। जनवरी 2026 में उत्तर प्रदेश ने अपने अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सात दिवसीय क्षमता-विकास कार्यक्रम भी आयोजित किया था।

लखनऊ की क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी और केंद्र सरकार के क्षमता-विकास आयोग ने संयुक्त रूप से किया। कार्यशाला में राज्यों के प्रयासों का आकलन किया गया, जिसमें उत्तर प्रदेश की प्रशिक्षण व्यवस्था और भागीदारी प्रमुख रही।

विभागों के प्रदर्शन में भी राज्य आगे

विभागीय आकलन में उत्तर प्रदेश के गृह विभाग ने श्रेणी ए में पहला स्थान पाया। विभाग ने एक करोड़ से अधिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे किए। इसी श्रेणी में बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग दूसरे स्थान पर रहा; उसने भी एक करोड़ से अधिक पाठ्यक्रम पूरे किए।

श्रेणी बी में उच्च शिक्षा विभाग पहले और अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग दूसरे स्थान पर रहा। श्रेणी सी में हथकरघा एवं वस्त्र विभाग ने शीर्ष स्थान हासिल किया, जबकि प्रशासनिक सुधार विभाग दूसरे स्थान पर रहा। ये परिणाम बताते हैं कि प्रशिक्षण गतिविधियों में भागीदारी राज्य के कई विभागों तक फैली हुई है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • मिशन कर्मयोगी सिविल सेवा क्षमता-विकास का राष्ट्रीय कार्यक्रम है।
  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मिशन कर्मयोगी को सितंबर 2020 में मंजूरी दी थी।
  • आईगॉट कर्मयोगी सरकारी अधिकारियों के ऑनलाइन प्रशिक्षण और सीखने का मंच है।
  • 23 अक्टूबर 2026 के क्षेत्रीय आकलन में उत्तर प्रदेश पहले, राजस्थान दूसरे और जम्मू-कश्मीर तीसरे स्थान पर रहे।

उत्तर प्रदेश की उपलब्धि में बड़ी संख्या में पंजीकृत कर्मियों, सक्रिय भागीदारी और विभागों के प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों का योगदान रहा। मिशन कर्मयोगी के तहत निरंतर सीखने की व्यवस्था को प्रशासनिक क्षमता बढ़ाने का अहम माध्यम माना गया है।

Originally written on October 24, 2026 and last modified on October 24, 2026.

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