महाराष्ट्र का ‘मिशन मुरघास’ सूखे में पशुओं के चारे का सहारा
महाराष्ट्र ने सूखे के बीच पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से 24 अक्टूबर 2026 को ‘मिशन मुरघास’ शुरू किया। राज्य में 14 अक्टूबर तक 305 तालुकों में सूखा घोषित किया जा चुका था और 2026 के खरीफ मौसम में 265 तालुके ‘ट्रिगर-1’ स्तर पर पहुंच गए थे।
सूखे के बीच चारे की उपलब्धता बढ़ाने की पहल
सूखे में पानी और चारे की कमी पशुपालकों के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। चारा वह वनस्पति सामग्री है जिसे पशुओं को खिलाया जाता है। इसमें घास, चारा फसलें और फसल कटाई के बाद बचा अवशेष शामिल होते हैं। चारे की कमी का असर दुग्ध उत्पादन और पशुधन के रखरखाव पर भी पड़ सकता है। इस चुनौती से निपटने के लिए महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने 29 सितंबर 2026 को चारा विकास नीति की घोषणा की थी। नीति के तहत जिलावार योजनाएं बनाकर घास, चारा देने वाले पेड़ों और उन्नत चारा फसलों की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। अगले पांच वर्षों में चारा खेती का क्षेत्र 331.42 हजार हेक्टेयर बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
भूमि, बीज और खरीद के लिए नीति
नीति में वन और राजस्व विभागों के प्रबंधन वाली भूमि पर चारा उगाने का प्रावधान है। कुछ भूमि महिला स्वयं सहायता समूहों को पट्टे पर दी जाएगी। सरकार 62 करोड़ रुपये के कोष से चारा बीज वितरित करने, भरोसेमंद जलस्रोत वाले किसानों को खेती के लिए प्रोत्साहित करने और चारे की सुनिश्चित मूल्य पर खरीद करने की भी योजना बना रही है। 14 अक्टूबर को राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने अधिकारियों को चारा बैंक स्थापित करने और चारा प्रबंधन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करने के निर्देश दिए। जंगल की जमीन और बांधों के जलाशय क्षेत्रों में तुरंत चारा उगाने के निर्देश भी दिए गए। चारा बैंक में चारा जमा किया जाता है और जरूरत पड़ने पर पशुपालकों तक पहुंचाया जाता है।
जिलों में अलग-अलग कदम
नांदेड़ ने 16 अक्टूबर को स्थानीय स्तर पर चारे की उपलब्धता मजबूत करने के लिए ‘फॉडर फ्रेंड्स’ पहल शुरू की। लातूर के सभी 10 तालुके सूखे से प्रभावित थे। जिले ने फसल अवशेष को औद्योगिक ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने पर रोक लगाई और चारे की जिले से बाहर बिक्री तथा ढुलाई सीमित की। यहां 5,000 हेक्टेयर में चारा उगाने की योजना बनाई गई। पुणे प्रशासन ने 22 अक्टूबर तक 22,000 से 25,000 एकड़ में चारा खेती की योजना तैयार की थी। इससे 5.5 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया और अतिरिक्त चारा सूखा प्रभावित जिलों को देने की योजना है। मार्च 2026 में शुरू मुख्यमंत्री ग्रामीण पशुधन उद्यमिता योजना भी डेयरी, बकरी-भेड़ पालन, मुर्गीपालन और चारा विकास को सहयोग देती है। पात्र ऋण पर इसमें 4 प्रतिशत ब्याज रियायत का प्रावधान है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- महाराष्ट्र में प्रशासनिक इकाइयों में जिले, तालुके और गांव शामिल हैं।
- चारा विकास नीति में घास, चारा वृक्ष और उन्नत चारा फसलें शामिल हैं।
- चारा बीज वितरण के लिए घोषित कोष 62 करोड़ रुपये का है।
- पांच वर्ष में चारा खेती का क्षेत्र 331.42 हजार हेक्टेयर बढ़ाने का लक्ष्य है।
चारा बैंक, खेती का विस्तार और जिलावार आपूर्ति योजनाएं सूखे के दौरान पशुधन की जरूरतों को पूरा करने के लिए राज्य की संयुक्त रणनीति का हिस्सा हैं।