मलयालम सिनेमा की जानी-मानी अभिनेत्री सवित्री श्रीधरन का निधन
मलयालम रंगमंच और सिनेमा की वरिष्ठ अभिनेत्री सवित्री श्रीधरन का 23 सितंबर 2026 को केरल के कोझिकोड स्थित मन्कावु में उनके आवास पर निधन हो गया। वे अपने लंबे थिएटर करियर, सशक्त चरित्र भूमिकाओं और फिल्म सुदानी फ्रॉम नाइजीरिया में यादगार अभिनय के लिए जानी जाती थीं।
रंगमंच से शुरू हुआ लंबा सफर
सवित्री श्रीधरन का थिएटर से जुड़ाव चार दशक से भी अधिक समय तक रहा। वे कोझिकोड की कई चर्चित थिएटर संस्थाओं से जुड़ी रहीं, जिनमें कलिमगा, संगमम, स्टेज इंडिया और चिरंतना थिएटर्स शामिल हैं। मलयालम रंगमंच में उनकी पहचान एक ऐसी कलाकार के रूप में बनी, जिन्होंने मंच पर सहजता और गहराई के साथ किरदारों को जीवंत किया।
फिल्मों में भी छोड़ी मजबूत छाप
सिनेमा में सवित्री श्रीधरन ने कदवु (1991), वलियंगडी (2010), वायरस, पाड़ा, इट्टीमानी फ्रॉम चाइना, पाप्पन और क्रिस्टी जैसी फिल्मों में काम किया। हालांकि उन्हें व्यापक पहचान 2018 की फिल्म सुदानी फ्रॉम नाइजीरिया से मिली, जिसमें उन्होंने जमीला, यानी मां की भूमिका निभाई। यह फिल्म सामाजिक संवेदनशीलता और मानवीय रिश्तों के चित्रण के लिए काफी सराही गई थी।
सम्मान, पुरस्कार और सार्वजनिक भूमिका
सवित्री श्रीधरन को उनके योगदान के लिए कई सम्मान मिले। उन्हें सुदानी फ्रॉम नाइजीरिया के लिए 66वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में विशेष उल्लेख मिला। इसके अलावा उन्हें केरल राज्य फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ चरित्र अभिनेत्री का सम्मान, 1977 और 1993 में केरल सरकार का सर्वश्रेष्ठ थिएटर कलाकार पुरस्कार, तथा 2009 में केरल संगीत नाटक अकादमी का नाटक पुरस्कार भी प्राप्त हुआ।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भारत के सर्वोच्च फिल्म सम्मानों में गिने जाते हैं और इनका आयोजन फिल्म समारोह निदेशालय करता है।
- केरल राज्य फिल्म पुरस्कार मलयालम सिनेमा में उत्कृष्टता को मान्यता देते हैं और इन्हें केरल सरकार प्रदान करती है।
- सुदानी फ्रॉम नाइजीरिया 2018 की मलयालम फिल्म है, जिसमें सवित्री श्रीधरन ने जमीला की भूमिका निभाई थी।
- एम.टी. वासुदेवन नायर ने कदवु का लेखन, निर्देशन और निर्माण किया था।
2019 में उन्होंने सुदानी फ्रॉम नाइजीरिया टीम के साथ राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह के बहिष्कार में भी हिस्सा लिया था, जो नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध से जुड़ा था। सवित्री श्रीधरन का निधन मलयालम रंगमंच और सिनेमा के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है।