भूटान के 108 स्तूपों ने बनाया गिनीज रिकॉर्ड

भूटान के 108 स्तूपों ने बनाया गिनीज रिकॉर्ड

भूटान ने एक दिन में सबसे अधिक बौद्ध स्तूपों के अभिषेक का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। 1 नवंबर 2026 को गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी में 108 स्तूपों का निर्माण और अभिषेक महज नौ घंटे में पूरा किया गया। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने 3 नवंबर को इस उपलब्धि को मान्यता दी। यह आयोजन धार्मिक परंपरा के साथ-साथ बड़े पैमाने पर सामुदायिक भागीदारी का उदाहरण भी बना।

नौ घंटे में पूरी हुई सामूहिक परियोजना

निर्माण कार्य 1 नवंबर को सुबह तीन बजे शुरू हुआ और दोपहर तक पूरा कर लिया गया। माउ छू नदी के किनारे 12 किलोमीटर के हिस्से में स्तूप बनाए गए। इस काम में लगभग 40,000 प्रशिक्षित स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया। उन्हें 20 से 23 सदस्यों वाली टीमों में बांटकर निर्धारित स्थलों पर काम सौंपा गया था।

हर स्तूप की ऊंचाई करीब 15 मीटर थी और एक स्तूप से दूसरे स्तूप की दूरी 108 मीटर रखी गई। संरचनाओं के निर्माण में इस्पात सहित उपलब्ध अन्य सामग्रियों का उपयोग किया गया। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने एक ही दिन में सबसे अधिक स्तूपों के अभिषेक की श्रेणी में इस उपलब्धि को दर्ज किया। गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी के गवर्नर डॉ. लोटे शेरिंग ने भूटान प्रसारण सेवा के सीधे प्रसारण में रिकॉर्ड की घोषणा की। इसके बाद 3 नवंबर को गेलेफू में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के प्रतिनिधि ने उन्हें प्रमाणपत्र सौंपा।

राजकीय अवसर और भारत से जुड़ा संदर्भ

इस आयोजन का समय भूटान के लिए विशेष महत्व रखता था। 1 नवंबर को राजा जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक के राज्याभिषेक की 18वीं वर्षगांठ थी। इसी दिन राजा ने 76वें स्तूप को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समर्पित किया। यह कदम गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी परियोजना के लिए भारत के समर्थन के प्रति आभार के रूप में बताया गया।

भूटान में 1 नवंबर को बुद्ध के त्रायस्त्रिंश स्वर्ग से अवतरण दिवस और मातृ दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। इस प्रकार रिकॉर्ड बनाने वाला निर्माण धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण दिन पर हुआ। गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी भूटान की एक प्रमुख पहल है; स्तूपों की यह शृंखला उसी क्षेत्र में बनी और इसने परियोजना को अंतरराष्ट्रीय समाचारों में स्थान दिलाया।

स्तूप और चोर्टेन की बौद्ध परंपरा

बौद्ध स्थापत्य में स्तूप केवल स्मारक नहीं, बल्कि पूजा और स्मरण से जुड़े धार्मिक स्थल भी हैं। इनमें अवशेष, पूजनीय वस्तुएं या किसी घटना की स्मृति सुरक्षित हो सकती है। तिब्बती बौद्ध परंपरा में स्तूप के रूप को ‘चोर्टेन’ कहा जाता है; भूटान में बने इन स्मारकों के लिए ‘जांगचुब चोर्टेन’ नाम का भी प्रयोग किया गया। स्तूप के चारों ओर दक्षिणावर्त चलने की धार्मिक परिक्रमा को प्रदक्षिणा कहते हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • बौद्ध स्तूपों को उनके उद्देश्य के आधार पर अवशेष, वस्तु, स्मारक, प्रतीकात्मक और मन्नत संबंधी श्रेणियों में रखा जाता है।
  • स्तूप की दक्षिणावर्त परिक्रमा को प्रदक्षिणा कहा जाता है।
  • तिब्बती बौद्ध धर्म में स्तूप के लिए ‘चोर्टेन’ शब्द प्रचलित है।
  • दक्षिण एशिया के पारंपरिक स्तूप में सामान्यतः चौकोर आधार के ऊपर ठोस गुंबद होता है और उसके भीतरी भाग में प्रवेश का रास्ता नहीं होता।

भूटान का यह रिकॉर्ड धार्मिक विरासत, स्वयंसेवी सहयोग और भारत-भूटान संबंधों को एक साथ रेखांकित करता है। 108 स्तूपों का निर्माण देश की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर सामने लाने वाला आयोजन बना।

Originally written on November 4, 2026 and last modified on November 4, 2026.

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