भारत-सऊदी बिजली संपर्क से ऊर्जा सहयोग को नई दिशा

भारत-सऊदी बिजली संपर्क से ऊर्जा सहयोग को नई दिशा

भारत और सऊदी अरब ने प्रस्तावित बिजली पारेषण संपर्क तथा ऊर्जा क्षेत्र में व्यापक सहयोग पर 19 और 20 अक्टूबर 2026 को चर्चा की। भारत के विद्युत मंत्रालय के सचिव पंकज अग्रवाल और सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्रालय में बिजली मामलों के सहायक मंत्री नासिर अल-कहतानी ने वीडियो बैठक में भाग लिया। बातचीत में परियोजना की प्रगति के साथ तकनीकी सहयोग और बिजली ग्रिड के संचालन से जुड़े अनुभव साझा करने पर भी विचार हुआ।

प्रस्तावित समुद्री बिजली संपर्क की रूपरेखा

दोनों देशों के बीच प्रस्तावित समुद्र के नीचे बिछाई जाने वाली बिजली लाइन की लंबाई लगभग 2,100 किलोमीटर और क्षमता 3 गीगावाट होने की उम्मीद है। इसकी अनुमानित लागत करीब 9 अरब अमेरिकी डॉलर बताई गई है। परियोजना में उच्च वोल्टेज दिष्ट धारा यानी एचवीडीसी तकनीक के इस्तेमाल की योजना है। यह तकनीक लंबी दूरी तक बिजली पहुंचाने और समुद्री केबलों के जरिए पारेषण के लिए उपयोगी होती है।

यह संपर्क अभी प्रस्तावित परियोजना है। इसके आर्थिक औचित्य और लागत घटाने के उपायों की जांच जरूरी है। भारत ने परियोजना की विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार की है। इसे ऊर्जा पर संयुक्त कार्य समूह के समक्ष विचार के लिए रखने की योजना थी। बातचीत में इस अध्ययन और आगे की प्रक्रिया पर चर्चा हुई।

तकनीकी सहयोग और ग्रिड प्रबंधन

सऊदी अरब ने भारत के अति उच्च वोल्टेज पारेषण ढांचे के अनुभव में रुचि दिखाई। इसमें नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ने के दौरान ग्रिड का संतुलन बनाए रखना और डेटा केंद्रों की बढ़ती बिजली जरूरतों को पूरा करना शामिल है। दोनों पक्षों ने तकनीकी जानकारी साझा करने और बिजली क्षेत्र की बेहतर कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान पर भी बात की।

चर्चा का एक अहम विषय ग्रिड कोड का अद्यतन करना था। ग्रिड कोड वे तकनीकी नियम हैं जो बिजली उत्पादकों, नेटवर्क संचालकों और बिजली व्यवस्था से जुड़े अन्य पक्षों के लिए लागू होते हैं। इनके जरिए बिजली नेटवर्क से जुड़ने और उसके संचालन के मानक तय किए जाते हैं। बदलती ऊर्जा जरूरतों के बीच इन नियमों का समयानुकूल रहना ग्रिड की विश्वसनीयता के लिए महत्वपूर्ण है।

द्विपक्षीय ऊर्जा ढांचे का विस्तार

अक्टूबर 2023 में भारत और सऊदी अरब के बीच हुए समझौता ज्ञापन ने ऊर्जा सहयोग के लिए व्यापक आधार तैयार किया था। इसमें बिजली संपर्क, हरित और स्वच्छ हाइड्रोजन तथा आपूर्ति शृंखलाओं में सहयोग शामिल है। मौजूदा बातचीत इसी ढांचे के तहत बिजली पारेषण, तकनीकी ज्ञान और ग्रिड प्रबंधन पर सहयोग को आगे बढ़ाती है। हालांकि, प्रस्तावित संपर्क की आर्थिक व्यवहार्यता और लागत पर विचार के बाद ही इसके अगले कदम स्पष्ट होंगे।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • प्रस्तावित भारत-सऊदी समुद्री बिजली संपर्क की अनुमानित क्षमता 3 गीगावाट है।
  • परियोजना की प्रस्तावित लंबाई लगभग 2,100 किलोमीटर है।
  • अक्टूबर 2023 का समझौता ज्ञापन बिजली संपर्क, हरित एवं स्वच्छ हाइड्रोजन और आपूर्ति शृंखलाओं से संबंधित है।
  • एचवीडीसी तकनीक दिष्ट धारा का उपयोग करती है और लंबी दूरी के पारेषण तथा समुद्री बिजली केबलों में काम आती है।

यह पहल भारत और सऊदी अरब के ऊर्जा संबंधों को बिजली नेटवर्क तथा तकनीकी सहयोग तक विस्तृत कर सकती है। परियोजना की व्यवहार्यता, लागत और ग्रिड संबंधी पहलुओं पर आगे का आकलन इसके भविष्य की दिशा तय करेगा।

Originally written on October 20, 2026 and last modified on October 20, 2026.

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