भारत में बायो-आधारित प्लास्टिक के व्यावसायिक उपयोग की नई शुरुआत

भारत में बायो-आधारित प्लास्टिक के व्यावसायिक उपयोग की नई शुरुआत

भारत में 24 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में पॉलीलैक्टिक एसिड (PLA) आधारित बायो-आधारित, जैव-अपघट्य प्लास्टिक के व्यावसायिक उपयोग की शुरुआत की गई। यह पहल बायोE3 ढांचे के तहत बालरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड द्वारा लागू की जा रही है। इसका उद्देश्य पारंपरिक प्लास्टिक के विकल्प के रूप में ऐसे पदार्थों को बढ़ावा देना है, जो जैविक प्रक्रियाओं के जरिए निर्धारित परिस्थितियों में टूट सकते हैं।

PLA क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है

पॉलीलैक्टिक एसिड एक बायो-आधारित पॉलिमर है, जिसे नवीकरणीय कच्चे माल से तैयार किया जाता है। इसका उपयोग पैकेजिंग, उपभोक्ता उत्पादों और कई औद्योगिक अनुप्रयोगों में किया जा सकता है। विज्ञान और उद्योग में इसे सामान्यतः PLA कहा जाता है। जैव-अपघट्य प्लास्टिक की श्रेणी में PLA सबसे चर्चित और व्यावसायिक रूप से उपयोगी पदार्थों में गिना जाता है।

इस पहल का महत्व इसलिए भी है क्योंकि भारत में प्लास्टिक कचरे और टिकाऊ सामग्री की मांग दोनों तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में बायो-आधारित विकल्प उद्योग को पर्यावरण-अनुकूल दिशा देने के साथ-साथ घरेलू विनिर्माण को भी मजबूत कर सकते हैं।

बायोE3 ढांचे की भूमिका

बायोE3 का पूरा नाम Biotechnology for Economy, Environment and Employment है। इस नीति ढांचे को 24 अगस्त 2024 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी थी। इसका लक्ष्य उच्च-प्रदर्शन बायोमैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहन देना और भारत में उन्नत बायो-आधारित सामग्रियों के व्यावसायिक विकास को गति देना है।

यह ढांचा केवल शोध तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रयोगशाला से उद्योग तक तकनीक पहुंचाने पर भी जोर देता है। इसी कारण PLA जैसे उत्पादों को बड़े पैमाने पर उत्पादन योग्य बनाने की दिशा में यह नीति महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

कुंभी में पायलट सुविधा और औद्योगिक महत्व

बालरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड के एकीकृत विनिर्माण परिसर, कुंभी (उत्तर प्रदेश) में 100 टन प्रति वर्ष क्षमता वाली पायलट-स्तरीय अनुसंधान एवं विकास सुविधा स्थापित की जाएगी। यहां PLA ग्रेड और PLA सह-बहुलक विकसित किए जाएंगे, जिनका उपयोग उच्च-मूल्य वाले अनुप्रयोगों में किया जा सकेगा।

यह सुविधा स्केल-अप के लिए जरूरी तकनीकी और आर्थिक आंकड़े भी उपलब्ध कराएगी। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि प्रयोगशाला स्तर की तकनीक को औद्योगिक उत्पादन में किस तरह प्रभावी ढंग से बदला जा सकता है। परियोजना को जैव-निर्माण और उन्नत बायो-आधारित सामग्रियों के व्यावसायिक उत्पादन से जोड़ा गया है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • PLA का पूरा नाम पॉलीलैक्टिक एसिड है और यह एक बायो-आधारित पॉलिमर है।
  • बायोE3 का अर्थ है Biotechnology for Economy, Environment and Employment।
  • बायोE3 नीति को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 24 अगस्त 2024 को मंजूरी दी थी।
  • कुंभी, उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित पायलट सुविधा की क्षमता 100 टन प्रति वर्ष होगी।
  • Biotechnology Industry Research Assistance Council, Department of Biotechnology के तहत कार्य करता है।

₹75 करोड़ के अनुदान से समर्थित यह परियोजना भारत की बायोइकोनॉमी और स्वदेशी बायोमैन्युफैक्चरिंग को नई दिशा देने वाली पहल के रूप में देखी जा रही है।

Originally written on September 25, 2026 and last modified on September 25, 2026.

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