भारत की नई आतंक-रोधी रणनीति: PRAHAAR से सुरक्षा ढांचे को मिली दिशा

भारत की नई आतंक-रोधी रणनीति: PRAHAAR से सुरक्षा ढांचे को मिली दिशा

केंद्र सरकार ने आतंकवाद और कट्टरपंथ से निपटने के लिए देश की पहली राष्ट्रीय आतंक-रोधी नीति और रणनीति PRAHAAR पेश की है। इसका पूरा नाम Policy for Response Against Hostile Activities and Radicalism है। इस पहल को एक दीर्घकालिक संस्थागत ढांचे के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य सुरक्षा तंत्र को अधिक समन्वित, तेज और जमीनी स्तर तक प्रभावी बनाना है।

PRAHAAR का ढांचा और उद्देश्य

PRAHAAR को बहु-आयामी रणनीति के रूप में तैयार किया गया है, जिसमें आतंकवाद की रोकथाम, त्वरित प्रतिक्रिया और पुनर्वास जैसे पहलू शामिल हैं। यह ढांचा सात स्तंभों पर आधारित है—Prevention, Response, Aggregating Internal Capacities, Human Rights, Attenuating Conditions for Terrorism, Aligning International Efforts और Recovery and Resilience।

इस रणनीति की खास बात यह है कि इसमें केवल सुरक्षा कार्रवाई पर नहीं, बल्कि समाज, मनोविज्ञान और समुदाय-आधारित उपायों के जरिए कट्टरपंथ को रोकने पर भी जोर दिया गया है। साथ ही, आतंक के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति और पुलिस स्टेशन स्तर तक इसके क्रियान्वयन की बात भी इसमें शामिल है।

जमीनी स्तर पर समन्वय पर जोर

दिल्ली में 28 सितंबर 2026 को आयोजित “PRAHAAR – CT Policy and Strategy” सम्मेलन में हर स्तर पर स्वचालित और त्वरित आतंक-रोधी प्रतिक्रिया की जरूरत पर चर्चा हुई। इस बैठक में गृह सचिव, विदेश सचिव, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और केंद्रीय पुलिस संगठनों के प्रमुख, 15 राज्यों के पुलिस महानिदेशक तथा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड प्रमुख शामिल हुए।

यह व्यापक भागीदारी बताती है कि सरकार आतंकवाद-रोधी तंत्र को केवल केंद्रीय एजेंसियों तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि राज्यों, स्थानीय पुलिस और विभिन्न सुरक्षा इकाइयों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना चाहती है।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग और प्रत्यर्पण पर फोकस

सम्मेलन के दौरान Extradition Portal भी लॉन्च किया गया, जिसका उद्देश्य फरार अपराधियों को भारत लाने की प्रक्रिया को तेज और समन्वित बनाना है। प्रत्यर्पण वह कानूनी प्रक्रिया है, जिसके तहत एक देश किसी फरार व्यक्ति को दूसरे देश को मुकदमे या सजा के लिए सौंपता है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2019 से 2026 के बीच 36 देशों से 288 फरार अपराधियों को भारत वापस लाया गया। यह संकेत देता है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग आतंकवाद और संगठित अपराध के खिलाफ भारत की रणनीति का अहम हिस्सा बनता जा रहा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • PRAHAAR का पूरा नाम Policy for Response Against Hostile Activities and Radicalism है।
  • यह भारत की पहली राष्ट्रीय आतंक-रोधी नीति और रणनीति मानी जा रही है।
  • इसका ढांचा सात स्तंभों पर आधारित है, जिनमें Prevention, Response और Recovery and Resilience शामिल हैं।
  • Unlawful Activities (Prevention) Act, 1967 भारत का प्रमुख आतंक-रोधी कानून है।

कुल मिलाकर PRAHAAR भारत की सुरक्षा नीति में एक समग्र बदलाव का संकेत देती है, जिसमें रोकथाम, कार्रवाई, मानवाधिकार, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और पुनर्वास—सभी को एक ही ढांचे में जोड़ा गया है।

Originally written on September 29, 2026 and last modified on September 29, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *