पूर्वी कमान को 45 लॉजिस्टिक्स ड्रोन, पहाड़ी मोर्चों की सप्लाई क्षमता होगी मजबूत

पूर्वी कमान को 45 लॉजिस्टिक्स ड्रोन, पहाड़ी मोर्चों की सप्लाई क्षमता होगी मजबूत

ओडिशा की कंपनी BonV Aero ने 28 सितंबर 2026 को भारतीय सेना की पूर्वी कमान को 45 भारी-भरकम लॉजिस्टिक्स UAVs उपलब्ध कराए। ये ड्रोन खास तौर पर उत्तर-पूर्व भारत में तैनात सैन्य इकाइयों की जरूरतों को ध्यान में रखकर दिए गए हैं, जहां दुर्गम भूभाग, मौसम की चुनौती और सीमित सड़क संपर्क अक्सर जमीनी आपूर्ति को प्रभावित करते हैं।

दुर्गम इलाकों में तेज और सुरक्षित आपूर्ति

लॉजिस्टिक्स UAVs का उपयोग सैन्य सप्लाई चेन में उन स्थानों तक सामान पहुंचाने के लिए किया जाता है, जहां वाहन या पैदल पहुंचना कठिन होता है। ऐसे ड्रोन राशन, गोला-बारूद, चिकित्सा सामग्री और स्पेयर पार्ट्स जैसी जरूरी चीजें ले जा सकते हैं। भारी-भरकम पेलोड वाले UAVs सामान्य निगरानी ड्रोन की तुलना में अधिक वजन उठाने में सक्षम होते हैं, इसलिए इन्हें आपूर्ति मिशनों के लिए अधिक उपयोगी माना जाता है।

उत्तर-पूर्व भारत में घने जंगल, नदी-आधारित क्षेत्र, पहाड़ी रास्ते, भूस्खलन और मानसूनी बाढ़ जैसी स्थितियां जमीनी आवाजाही को बाधित कर सकती हैं। ऐसे में हवाई लॉजिस्टिक्स समय-संवेदनशील सैन्य जरूरतों को पूरा करने का एक प्रभावी विकल्प बनते हैं।

पूर्वी कमान के लिए रणनीतिक महत्व

भारतीय सेना की पूर्वी कमान पूर्वी भारत और हिमालयी सीमा के कुछ हिस्सों में संचालन की जिम्मेदारी संभालती है। इस क्षेत्र में ऊंचाई, कम तापमान, पतली हवा और खराब मौसम जैसी चुनौतियां अक्सर सैन्य तैनाती को प्रभावित करती हैं। उच्च-ऊंचाई वाले चौकियों तक नियमित आपूर्ति बनाए रखना हमेशा एक बड़ी चुनौती रही है, इसलिए ऐसे UAVs सैन्य तैयारियों को मजबूत करने में मदद कर सकते हैं।

BonV Aero ने इससे पहले सेना के लिए तवांग, सिलीगुड़ी, दीमापुर, कारगिल, द्रास, न्योमा, बारामूला और कुपवाड़ा जैसे स्थानों पर ड्रोन संचालन और परीक्षण किए हैं। कंपनी ने उत्तरी कमान के तहत 150 से अधिक सेना कर्मियों को अपने सिस्टम का प्रशिक्षण भी दिया है।

भारतीय रक्षा ड्रोन इकोसिस्टम में बढ़ती भूमिका

कंपनी एक ऐसे अल्ट्रा-हैवी पेलोड ड्रोन पर भी काम कर रही है, जो 100 किलोग्राम से अधिक भार को 10,000 फीट से ऊंचाई पर और 100 किलोमीटर से अधिक दूरी तक ले जा सके। यह क्षमता इसे सैन्य लॉजिस्टिक्स ड्रोन श्रेणी में एक महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म बनाती है।

इसी बीच, रक्षा मंत्रालय ने 2,715 लॉजिस्टिक्स ड्रोन के लिए टेंडर भी जारी किया है, जो सैन्य आधुनिकीकरण और हवाई आपूर्ति प्रणालियों के विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। पहाड़ी और सीमावर्ती क्षेत्रों में ऐसे ड्रोन भविष्य में सेना की त्वरित आपूर्ति व्यवस्था का अहम हिस्सा बन सकते हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • UAV का पूरा नाम Unmanned Aerial Vehicle है, जिसे सामान्य भाषा में ड्रोन कहा जाता है।
  • भारतीय सेना की पूर्वी कमान पूर्वी भारत और हिमालयी सीमा के कुछ हिस्सों में संचालन से जुड़ी है।
  • तवांग, कारगिल, द्रास, न्योमा, बारामूला और कुपवाड़ा जैसे स्थान उच्च-ऊंचाई और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं।
  • लॉजिस्टिक्स ड्रोन का उपयोग राशन, दवाइयों, गोला-बारूद और अन्य जरूरी सैन्य सामग्री की ढुलाई में किया जाता है।

उत्तर-पूर्व और हिमालयी क्षेत्रों की चुनौतियों को देखते हुए ऐसे भारी-भरकम UAVs सेना की आपूर्ति क्षमता को अधिक लचीला और तेज बना सकते हैं। यह कदम सैन्य लॉजिस्टिक्स में ड्रोन तकनीक की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाता है।

Originally written on September 29, 2026 and last modified on September 29, 2026.

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