भारत का विज्ञान-तकनीक स्कोरबोर्ड राज्यों की शोध क्षमता को देगा नई दिशा
नीति आयोग ने 3 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में भारत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी स्कोरबोर्ड का शुभारंभ किया। आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने इस संवादात्मक मंच की शुरुआत की। इसमें देश के सभी 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में अनुसंधान एवं नवाचार से जुड़ी जानकारी एक जगह उपलब्ध कराई गई है।
शोध और नवाचार के आंकड़ों का साझा मंच
स्कोरबोर्ड में उच्च शिक्षा संस्थानों, अनुसंधान एवं विकास संस्थानों, गहन-तकनीक स्टार्टअप, नवाचार केंद्रों, शोध-पत्रों और पेटेंट से संबंधित आंकड़े शामिल हैं। यह अकादमिक संस्थानों, सरकारी शोध प्रयोगशालाओं और उद्योगों में अनुसंधान की गुणवत्ता, प्रभाव, सहयोग तथा मुक्त उपलब्धता जैसे संकेतकों को भी समेटता है। इससे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र की गतिविधियों को अलग-अलग स्रोतों के बजाय एक साझा ढांचे में समझने में मदद मिलेगी।
राज्यों के प्रदर्शन की शुरुआती तस्वीर
वर्ष 2024–25 के आंकड़ों में तमिलनाडु शोध-पत्रों और पेटेंट आवेदन, दोनों मामलों में पहले स्थान पर रहा। राज्य में 44,611 शोध-पत्र प्रकाशित हुए और 16,048 पेटेंट आवेदन दर्ज किए गए। शोध-पत्रों के मामले में उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र इसके बाद रहे, जबकि पेटेंट आवेदनों में महाराष्ट्र और कर्नाटक अगले स्थानों पर थे। ये आंकड़े राज्यवार शोध गतिविधि का तुलनात्मक संकेत देते हैं; अलग-अलग संकेतकों में प्रदर्शन का क्रम अलग हो सकता है।
नीति निर्माण और सहयोग में संभावित भूमिका
नीति आयोग के अनुसार, इस मंच से राज्य अपनी अनुसंधान क्षमता का आकलन कर सकेंगे, कमियों की पहचान कर पाएंगे और जरूरत के अनुरूप नीतियां तथा कार्यक्रम तैयार कर सकेंगे। राज्यों के बीच विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में सहयोग के साथ स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना भी इसका उद्देश्य है। विश्वसनीय और तुलनीय आंकड़ों के आधार पर योजनाएं बनाने से शोध संसाधनों के उपयोग तथा नवाचार को प्रोत्साहन देने में सहायता मिल सकती है। यह पहल साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और विकसित भारत 2047 की परिकल्पना से जुड़ी है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- नीति आयोग की स्थापना 2015 में केंद्रीय मंत्रिमंडल के प्रस्ताव से हुई थी। यह संवैधानिक या वैधानिक निकाय नहीं है और इसने योजना आयोग का स्थान लिया।
- अनुसंधान राष्ट्रीय शोध प्रतिष्ठान अधिनियम, 2023 ने अनुसंधान एवं नवाचार को दिशा देने और देश में शोध संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए एक वैधानिक प्रतिष्ठान की व्यवस्था की।
- भारतीय पेटेंट अधिनियम, 1970 के तहत पेटेंट दिए जाने से पहले और पेटेंट मिलने के बाद—दोनों चरणों में विरोध दर्ज कराया जा सकता है।
- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रबंधन सूचना प्रणाली सर्वेक्षणों के माध्यम से अनुसंधान एवं विकास व्यय और कार्मिकों के राष्ट्रीय आंकड़े संकलित करती है।
राज्यों की शोध क्षमता को एक साझा मंच पर दर्ज करना विज्ञान नीति को अधिक लक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसकी उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि आंकड़ों का नियमित अद्यतन हो और राज्य उन्हें अपनी योजनाओं में प्रभावी ढंग से शामिल करें।