बैंक ऑफ इंडिया की प्रोग्रामेबल डिजिटल रुपया सुविधा से भुगतान में नई सुविधा

बैंक ऑफ इंडिया की प्रोग्रामेबल डिजिटल रुपया सुविधा से भुगतान में नई सुविधा

बैंक ऑफ इंडिया ने 29 सितंबर 2026 को अपनी सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी प्लेटफॉर्म पर यूजर-लेवल प्रोग्रामेबल डिजिटल रुपया सुविधा शुरू की। इस नई व्यवस्था के तहत खाताधारक तय राशि और तय अंतराल पर डिजिटल रुपये यानी e₹ को किसी लाभार्थी के CBDC वॉलेट में स्वतः भेज सकते हैं।

क्या है प्रोग्रामेबल डिजिटल रुपया

प्रोग्रामेबल सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी ऐसी डिजिटल मुद्रा होती है, जिसमें ट्रांसफर, उपयोग या रिडेम्प्शन के लिए पहले से नियम जोड़े जा सकते हैं। भारत में डिजिटल रुपया भारतीय रिजर्व बैंक जारी करता है और इसे e₹ के रूप में जाना जाता है। बैंक ऑफ इंडिया की यह सुविधा इसी अवधारणा को आम उपयोगकर्ताओं तक ले जाती है, जिससे भुगतान अधिक नियंत्रित और उद्देश्य-आधारित हो सकता है।

कैसे काम करेगी नई सुविधा

इस फीचर की मदद से बार-बार होने वाले भुगतान मैन्युअल रूप से करने की जरूरत कम होगी। उपयोगकर्ता मासिक या अन्य तय आवृत्ति पर ऑटो-ट्रांसफर सेट कर सकेगा। इसके साथ ही भेजने वाला यह भी तय कर सकता है कि प्राप्तकर्ता उस राशि को किस उद्देश्य के लिए खर्च करेगा। यानी धनराशि पर उपयोग-आधारित नियंत्रण लगाया जा सकता है।

यह व्यवस्था विशेष रूप से भत्ते, शिक्षा खर्च, नियमित पारिवारिक सहायता और अन्य निश्चित भुगतानों के लिए उपयोगी मानी जा रही है। प्राप्तकर्ता के CBDC वॉलेट में राशि तो पहुंचेगी, लेकिन खर्च की शर्तें भेजने वाले द्वारा तय की जा सकेंगी।

डिजिटल भुगतान ढांचे में इसका महत्व

बैंक ऑफ इंडिया ने यह भी कहा है कि यह सुविधा भारतीय रिजर्व बैंक और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के दिशानिर्देशों के अनुरूप है। इस प्लेटफॉर्म का विकास मोनट्रान इंडिया ने किया है। प्रोग्रामेबल डिजिटल रुपया भविष्य में सरकारी लाभ वितरण, उद्देश्य-आधारित ट्रांसफर और नियमित भुगतान प्रणालियों को अधिक प्रभावी बना सकता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • CBDC का पूरा नाम Central Bank Digital Currency है।
  • भारत में डिजिटल रुपया भारतीय रिजर्व बैंक जारी करता है।
  • भारतीय डिजिटल रुपया e₹ प्रतीक से जाना जाता है।
  • NPCI भारत में UPI और RuPay जैसे प्रमुख भुगतान तंत्रों से जुड़ी संस्था है।

इस कदम से डिजिटल भुगतान को केवल तेज़ ही नहीं, बल्कि अधिक नियंत्रित और उद्देश्य-आधारित बनाने की दिशा में भी एक अहम प्रयोग जुड़ गया है।

Originally written on September 30, 2026 and last modified on September 30, 2026.

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