बृहस्पति के चुंबकीय वातावरण में जटिल तरंगों का खुलासा

बृहस्पति के चुंबकीय वातावरण में जटिल तरंगों का खुलासा

नासा के जूनो अंतरिक्ष यान ने दिसंबर 2024 में बृहस्पति के चुंबकीय वातावरण के बाहरी क्षेत्र में जटिल प्लाज़्मा तरंगों और कई आघात क्षेत्रों का पता लगाया। आयोवा विश्वविद्यालय के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन के निष्कर्ष 31 जुलाई 2026 को ‘नेचर कम्युनिकेशंस’ में ऑनलाइन प्रकाशित हुए।

सौर पवन और बृहस्पति की सीमा

बृहस्पति के चारों ओर मौजूद चुंबकीय क्षेत्र सौर पवन से आने वाले आवेशित कणों के प्रवाह को प्रभावित करता है। सौर पवन और ग्रह के चुंबकीय वातावरण के मिलने वाले क्षेत्र में बो शॉक बनता है। इस सीमा पर सौर पवन की गति अचानक घटती है और उसके कण गर्म होते हैं।

जूनो के माप से पता चला कि बृहस्पति का बो शॉक अलग-अलग आवृत्तियों वाली प्लाज़्मा तरंगों का उपयोग करके आने वाले सौर कणों को धीमा और गर्म करता है। पृथ्वी के बो शॉक में आम तौर पर तरंगें मुख्यतः एक आवृत्ति के आसपास केंद्रित होती हैं।

मुख्य आघात से पहले भी कणों की गति धीमी

शोधकर्ताओं ने ‘शॉकलेट्स’ नाम की छोटी संरचनाओं की भी पहचान की। ये छोटे आघात क्षेत्र सौर पवन के कणों को बृहस्पति के मुख्य बो शॉक तक पहुँचने से पहले ही धीमा कर सकते हैं। इससे ग्रह के चुंबकीय वातावरण में सौर पवन की प्रतिक्रिया की परतदार प्रकृति सामने आती है।

इस अध्ययन में जूनो के वेव्स उपकरण से विद्युत और चुंबकीय तरंग गतिविधि मापी गई। इस उपकरण को आयोवा विश्वविद्यालय के भौतिकविदों ने तैयार और निर्मित किया था। अध्ययन की प्रमुख लेखिका जयश्री जोसेफ विश्वविद्यालय के भौतिकी एवं खगोल विज्ञान विभाग में पोस्टडॉक्टोरल शोधकर्ता हैं। सह-लेखक बिल कुर्थ 2011 में जूनो के प्रक्षेपण के बाद से इस मिशन से जुड़े हैं।

अंतरिक्ष में ऊर्जा के प्रवाह को समझने में मदद

बृहस्पति के बो शॉक का अध्ययन वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद कर सकता है कि आघात क्षेत्रों में ऊर्जा कैसे स्थानांतरित होती है। यह जानकारी सुपरनोवा के अवशेषों जैसे अधिक शक्तिशाली खगोलीय वातावरण में होने वाली प्रक्रियाओं के अध्ययन के लिए भी उपयोगी हो सकती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • बो शॉक वह सीमा है जहाँ किसी ग्रह के पास पहुँचते समय तारकीय पवन की गति अचानक कम हो जाती है।
  • चुंबकीय ग्रहों में बो शॉक, चुंबकीय क्षेत्र की सीमा यानी मैग्नेटोपॉज़ से बाहर बनता है।
  • सौर पवन प्लाज़्मा में मुख्यतः इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और अल्फा कण होते हैं।
  • जूनो अंतरिक्ष यान 2011 में प्रक्षेपित किया गया था और यह बृहस्पति का अध्ययन करता है।

जूनो के अवलोकन बृहस्पति के चुंबकीय वातावरण में कणों और तरंगों की परस्पर क्रिया का अधिक विस्तृत चित्र देते हैं।

Originally written on October 30, 2026 and last modified on October 30, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *