आईएसएस पर अनिल मेनन की चौथी स्पेसवॉक, सौर ऊर्जा क्षमता को मजबूती
नासा के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन ने 29 अक्टूबर 2026 को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) के बाहर अपनी चौथी स्पेसवॉक पूरी की। कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के अंतरिक्ष यात्री जोशुआ कुट्रिक उनके साथ थे। सात घंटे 11 मिनट चली इस गतिविधि में दोनों ने स्टेशन की बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नए सौर पैनल लगाए।
आईएसएस की ऊर्जा व्यवस्था में नया पैनल
मेनन और कुट्रिक ने आठ नई रोल-आउट सौर सरणियों में से सातवीं स्थापित की। इन सरणियों को आईरोसा कहा जाता है। यह आईएसएस की विद्युत आपूर्ति प्रणाली के उन्नयन का हिस्सा है। अंतरिक्ष स्टेशन पर बिजली वैज्ञानिक प्रयोगों, संचार और रहने योग्य प्रणालियों के संचालन के लिए जरूरी है। आठवीं और अंतिम सौर सरणी लगाने के लिए 5 नवंबर 2026 को एक और स्पेसवॉक निर्धारित है।
इस अभियान का एक संस्थागत महत्व भी रहा। यह अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों की वह 100वीं स्पेसवॉक थी, जो स्टेशन के क्वेस्ट एयरलॉक से उस समय की गई जब कोई अंतरिक्ष शटल उससे जुड़ा नहीं था। क्वेस्ट एयरलॉक आईएसएस से बाहर निकलकर अंतरिक्ष में काम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
मेनन और कुट्रिक के लिए खास उपलब्धि
इस स्पेसवॉक के बाद मेनन का अंतरिक्ष में बाहर काम करने का कुल समय 26 घंटे 31 मिनट हो गया। भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्रियों में स्पेसवॉक की संख्या के लिहाज से वह सुनीता विलियम्स के बाद दूसरे स्थान पर हैं। मेनन का जन्म और पालन-पोषण मिनियापोलिस, मिनेसोटा में हुआ। उनके माता-पिता यूक्रेन और भारत से आए प्रवासी थे। वह जुलाई 2026 में आठ महीने के मिशन के लिए आईएसएस पहुंचे थे।
कुट्रिक के लिए यह पहली स्पेसवॉक थी। इसके साथ वह अंतरिक्ष में बाहर निकलकर कार्य करने वाले पांचवें कनाडाई अंतरिक्ष यात्री बने। ऐसी गतिविधियों में अंतरिक्ष यात्री स्टेशन के बाहरी हिस्से पर उपकरण लगाने, मरम्मत करने या उसकी प्रणालियों को बेहतर बनाने का काम करते हैं। इनके लिए विशेष अंतरिक्ष सूट और सुरक्षा प्रक्रियाओं की जरूरत होती है।
आईएसएस का अंतरराष्ट्रीय सहयोग
आईएसएस कई देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों की साझेदारी से संचालित होता है। यह सहयोग वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ-साथ स्टेशन के रखरखाव और तकनीकी उन्नयन में भी दिखाई देता है। अलग-अलग देशों के अंतरिक्ष यात्रियों का एक ही अभियान में हिस्सा लेना इस साझेदारी का व्यावहारिक उदाहरण है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
-
आईएसएस का पहला मॉड्यूल ‘जार्या’ 20 नवंबर 1998 को प्रक्षेपित किया गया था।
-
नवंबर 2000 से आईएसएस पर मनुष्यों की निरंतर उपस्थिति बनी हुई है।
-
आईएसएस की साझेदारी में नासा, रोस्कोस्मोस, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी, जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी शामिल हैं।
-
मेनन की चौथी स्पेसवॉक 7 घंटे 11 मिनट चली और उनके कुल स्पेसवॉक समय को 26 घंटे 31 मिनट तक ले गई।
मेनन और कुट्रिक की अगली नियोजित स्पेसवॉक में आठवीं सौर सरणी लगाई जानी है। इससे आईएसएस की बिजली व्यवस्था के उन्नयन का यह चरण पूरा होगा।