पूर्वी घाट से पश्चिमी घाट की ओर लाखों तितलियों का मौसमी प्रवास

पूर्वी घाट से पश्चिमी घाट की ओर लाखों तितलियों का मौसमी प्रवास

दक्षिण-पश्चिमी भारत में मानसून के साथ तितलियों का मौसमी आवागमन शुरू हो गया है। अक्टूबर 2026 में ब्लू टाइगर, डार्क ब्लू टाइगर और क्रो तितलियों सहित लाखों तितलियां पूर्वी घाट से तमिलनाडु के मैदानी इलाकों को पार करके पश्चिमी घाट की ओर बढ़ रही हैं। इस प्रवास का संबंध उत्तर-पूर्वी मानसून की बारिश और पश्चिमी घाट के जंगलों में उपलब्ध मेजबान पौधों से है।

मानसून के साथ बदलती प्रवास की दिशा

तितलियों का वर्तमान झुंड तमिलनाडु के मैदानी क्षेत्रों से पश्चिम की ओर जाते हुए पश्चिमी घाट तक पहुंच रहा है। चेन्नई और आसपास के जिलों में उत्तर-पूर्वी मानसून की भारी बारिश के दौरान यह गतिविधि देखी गई है। रास्ते में तितलियां वन क्षेत्रों और अन्य उपयुक्त स्थानों पर कुछ समय रुक सकती हैं।

पश्चिमी घाट के जंगलों में पहुंचने के बाद वयस्क तितलियां भोजन करती हैं, प्रजनन करती हैं और मेजबान पौधों पर अंडे देती हैं। इन पौधों की पत्तियां उनके कैटरपिलर यानी लार्वा के लिए भोजन उपलब्ध कराती हैं। अंडे देने के बाद वयस्क तितलियां मर जाती हैं और अगली पीढ़ी का जीवन-चक्र आगे बढ़ता है। अप्रैल या मई में, दक्षिण-पश्चिमी मानसून से पहले, नई पीढ़ी का झुंड आम तौर पर पूर्वी घाट और मैदानी इलाकों की ओर लौटता है। इस वापसी का समय मानसून-पूर्व बारिश से जुड़ा होता है।

प्रवास में शामिल प्रमुख तितलियां

इस मौसमी आवागमन में टाइगर और क्रो समूह की कई प्रजातियां शामिल हैं। इनमें ब्लू टाइगर (Tirumala limniace), डार्क ब्लू टाइगर (Tirumala septentrionis), कॉमन क्रो (Euploea core) और डबल-ब्रांडेड क्रो (Euploea sylvester) प्रमुख हैं। इन तितलियों का जीवन-चक्र और प्रवास वर्षा के मौसमी बदलावों तथा उपयुक्त पौधों की उपलब्धता से जुड़ा है।

पूर्वी और पश्चिमी घाटों के बीच का यह मार्ग दक्षिण भारत में तितलियों के नियमित मौसमी आवागमन को समझने का अवसर देता है। दोनों पर्वत शृंखलाओं के बीच तमिलनाडु के मैदानी क्षेत्र पड़ते हैं, जिन्हें पार करके तितलियां पश्चिमी घाट के वन क्षेत्रों तक पहुंचती हैं।

निगरानी और सड़क दुर्घटनाओं की चुनौती

17 और 18 अक्टूबर 2026 को पश्चिमी तमिलनाडु के सलेम, नमक्कल, इरोड, तिरुप्पुर और कोयंबटूर जिलों में तितलियों की सक्रिय आवाजाही दर्ज की गई। कोयंबटूर जिले के अलग-अलग स्थानों पर प्रति मिनट 5 से 135 तितलियां गिनी गईं। 18 अक्टूबर को कलपट्टी मेन रोड पर पर्यवेक्षकों ने प्रति मिनट 120 तितलियां दर्ज कीं।

नेचर एंड बटरफ्लाई सोसाइटी 2013 से इस क्षेत्र में प्रवास के पैटर्न पर नजर रख रही है। स्वयंसेवक बटरफ्लाई माइग्रेशन इंडिया व्हाट्सऐप समूह के जरिए अपने अवलोकन और गणना साझा करते हैं। इस बार कई तितलियां जमीन के करीब उड़ती दिखीं और तमिलनाडु की सड़कों पर वाहनों से टकराकर सैकड़ों तितलियों की मौत हुई। यह प्रवास मार्गों के आसपास सड़क यातायात से जुड़ा जोखिम भी सामने लाता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • ब्लू टाइगर तितली का वैज्ञानिक नाम Tirumala limniace है।
  • डार्क ब्लू टाइगर का वैज्ञानिक नाम Tirumala septentrionis है।
  • पूर्वी घाट और पश्चिमी घाट के बीच तमिलनाडु के मैदानी क्षेत्र स्थित हैं।
  • इस प्रवास में पश्चिम की ओर आवाजाही उत्तर-पूर्वी मानसून के दौरान होती है, जबकि वापसी सामान्यतः दक्षिण-पश्चिमी मानसून से पहले होती है।

यह मौसमी प्रवास वर्षा, वनस्पति और तितलियों के जीवन-चक्र के आपसी संबंध को रेखांकित करता है। निगरानी से इसके मार्ग और समय के बारे में जानकारी मिलती है, जबकि सड़क दुर्घटनाएं इनकी यात्रा के दौरान एक गंभीर चुनौती बनी हुई हैं।

Originally written on October 22, 2026 and last modified on October 22, 2026.

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