परीक्षा सुधारों पर नाइलकणि समिति को जनवरी 2027 तक समय

परीक्षा सुधारों पर नाइलकणि समिति को जनवरी 2027 तक समय

केंद्र सरकार ने नंदन नाइलकणि की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय परीक्षा सुधार कार्यबल का कार्यकाल जनवरी 2027 तक बढ़ा दिया है। समिति को पहले अक्टूबर 2026 तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी थी। इसका गठन जुलाई 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था।

परीक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करने की जिम्मेदारी

कार्यबल का मुख्य उद्देश्य परीक्षा प्रश्नपत्रों के लीक होने की घटनाओं को रोकने के उपाय सुझाना और परीक्षा प्रणाली में विद्यार्थियों तथा आम जनता का विश्वास मजबूत करना है। राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (नीट) से जुड़े विवादों के बाद परीक्षा सुरक्षा और निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं। इसी पृष्ठभूमि में दिल्ली के जंतर-मंतर सहित कई स्थानों पर 25 जुलाई को विद्यार्थियों ने प्रदर्शन किया था। ये प्रदर्शन तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से पहले हुए थे।

समिति में नाइलकणि के अलावा इसरो के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ, खुफिया ब्यूरो के पूर्व निदेशक तपन डेका, आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल और रसद विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा शामिल हैं। विविध क्षेत्रों के इन सदस्यों से परीक्षा संचालन, सुरक्षा और प्रशासन से जुड़े पहलुओं पर सुझाव मिलने की अपेक्षा है।

विद्यार्थियों और विशेषज्ञों से सुझाव

कार्यबल को विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों से 50,000 से अधिक सुझाव मिले हैं। इसने जून 2024 में नीट प्रश्नपत्र लीक के बाद गठित के. राधाकृष्णन समिति से भी विचार-विमर्श किया। उस समिति ने अक्टूबर 2024 में परीक्षा सुधारों पर 101 सिफारिशें सौंपी थीं। नाइलकणि कार्यबल का विस्तारित कार्यकाल इन सुझावों और सिफारिशों पर विचार कर रिपोर्ट तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय देगा।

नीट परीक्षा में प्रस्तावित बदलाव

केंद्र ने घोषणा की है कि 2027 से नीट कंप्यूटर आधारित परीक्षा के रूप में आयोजित की जाएगी। यह बदलाव राधाकृष्णन समिति की सिफारिश के अनुरूप है। कंप्यूटर आधारित आयोजन परीक्षा संचालन के स्वरूप में बड़ा परिवर्तन होगा; हालांकि परीक्षा की विषय-वस्तु और संचालन की जिम्मेदारियां अलग-अलग संस्थाओं के पास हैं। नीट-यूजी का पाठ्यक्रम राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के स्नातक चिकित्सा शिक्षा बोर्ड द्वारा अधिसूचित किया जाता है, जबकि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी परीक्षा आयोजित करती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

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  • नीट-यूजी का आयोजन 2019 से राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी कर रही है। इससे पहले 2013 से 2018 तक यह जिम्मेदारी केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के पास थी।
  • राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2019 के बाद नीट-यूजी भारत के चिकित्सा महाविद्यालयों में प्रवेश की एकमात्र परीक्षा बना। इसमें एम्स और जिपमर जैसे संस्थान भी शामिल हैं, जो पहले अलग प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करते थे।
  • सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी, संघ लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन आयोग, रेलवे भर्ती बोर्ड और बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान की परीक्षाओं पर लागू होता है।
  • नीट-यूजी के पाठ्यक्रम की अधिसूचना राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग का स्नातक चिकित्सा शिक्षा बोर्ड जारी करता है; राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी परीक्षा आयोजित करती है।

कार्यकाल विस्तार और व्यापक परामर्श का उद्देश्य परीक्षा सुधारों के लिए ठोस सुझाव तैयार करना है। इन सिफारिशों का असर परीक्षा सुरक्षा और प्रवेश प्रक्रिया पर विद्यार्थियों के भरोसे के लिए महत्वपूर्ण होगा।

Originally written on November 2, 2026 and last modified on November 2, 2026.

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