ग्रामीण रोजगार योजना में शिकायतों के निपटारे की समयसीमा तय
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 2 नवंबर 2026 को विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण), यानी VB–G RAM G, के तहत शिकायत निवारण नियम, 2026 अधिसूचित किए। ये नियम योजना के क्रियान्वयन से जुड़ी शिकायतों को दर्ज करने, उनकी जांच करने और तय समय में समाधान देने की बहुस्तरीय व्यवस्था बनाते हैं।
ग्राम पंचायत से जिला स्तर तक व्यवस्था
राज्य सरकारों को ग्राम पंचायत, प्रखंड और जिला स्तर पर शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करना होगा। हर स्तर पर नामित शिकायत निवारण अधिकारी शिकायतें प्राप्त करेंगे, उन्हें पंजीकृत करेंगे, जांच करेंगे और उनका निपटारा करेंगे। जिला स्तर पर जिला कार्यक्रम समन्वयक इस प्रक्रिया की निगरानी करेगा। इस ढांचे का उद्देश्य शिकायतों को स्थानीय स्तर से उठाने और जरूरत पड़ने पर उच्च स्तर तक पहुंचाने की व्यवस्था करना है।
शिकायत दर्ज करने के माध्यम और समयसीमा
लाभार्थी या अन्य शिकायतकर्ता व्यक्तिगत रूप से, स्पीड पोस्ट से, निर्धारित डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के माध्यम से, फोन पर या हेल्पलाइन के जरिए शिकायत दे सकेंगे। शिकायत मिलने के बाद उसकी जांच सात कार्यदिवस के भीतर पूरी करनी होगी और 15 दिनों के भीतर समाधान करना होगा। शिकायतकर्ता को पंजीकरण संख्या और प्राप्ति की तारीख सहित पावती दी जाएगी।
निर्धारित डिजिटल व्यवस्था शिकायत का अनिवार्य पंजीकरण, उसकी स्थिति पर नजर रखने और लंबित मामलों को आगे बढ़ाने में मदद करेगी। इससे शिकायत के दर्ज होने से लेकर समाधान तक की प्रक्रिया का पता लगाया जा सकेगा। तय समय में निपटारा न होने पर मामला आगे बढ़ाने का प्रावधान जवाबदेही को मजबूत करता है।
निगरानी और स्थानीय भागीदारी का महत्व
बहुस्तरीय व्यवस्था में ग्राम पंचायत और प्रखंड शिकायतों के नजदीकी स्तर हैं, जबकि जिला स्तर पर समन्वय और निगरानी की जिम्मेदारी होगी। इससे योजना के क्रियान्वयन से जुड़े मुद्दों को संबंधित प्रशासनिक स्तर तक पहुंचाने का रास्ता मिलता है। शिकायतों का समयबद्ध समाधान रोजगार और आजीविका कार्यक्रमों के लाभार्थियों के लिए सेवा-प्रदान की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने में सहायक हो सकता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना ऐसी साझा डिजिटल परत हो सकती है, जिस पर विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्रों के लिए अनुप्रयोग विकसित किए जा सकें।
- मनरेगा की धारा 17 के तहत ग्राम सभा को कार्यों की निगरानी और ग्राम पंचायत क्षेत्र में नियमित सामाजिक अंकेक्षण की भूमिका दी गई है। सामाजिक अंकेक्षण सामुदायिक निगरानी है, जबकि व्यक्तिगत शिकायत का निपटारा अलग प्रक्रिया है।
- मनरेगा में जिला कार्यक्रम समन्वयक की नियुक्ति राज्य सरकार करती है। यह पद कानून के तहत अपने-आप जिला कलेक्टर के पद के समान नहीं माना गया है।
- मनरेगा में ग्राम पंचायत, ग्राम सभा की सिफारिशों के आधार पर कार्यों की पहचान करती है और वार्षिक योजना तैयार करती है।
नए नियम शिकायतों के पंजीकरण, निगरानी और निपटारे के लिए स्पष्ट जिम्मेदारियां तथा समयसीमा तय करते हैं। इनके प्रभावी क्रियान्वयन में राज्यों और स्थानीय प्रशासन की भूमिका अहम होगी।