नशा मुक्त भारत अभियान की पहुंच 35 करोड़ के पार
नशा मुक्त भारत अभियान के तहत 22 अक्टूबर 2026 तक देशभर में 35 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंच बनाई गई। इनमें 13.94 करोड़ से ज्यादा युवा और 10.86 करोड़ महिलाएं शामिल हैं। नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए 32 लाख से अधिक शैक्षणिक संस्थानों को भी अभियान से जोड़ा गया है।
272 जिलों से देशव्यापी अभियान तक
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने 15 अगस्त 2020 को नशा मुक्त भारत अभियान शुरू किया था। शुरुआती चरण में इसे नशीले पदार्थों के दुरुपयोग की आशंका वाले 272 जिलों में चलाया गया। अगस्त 2023 से अभियान का विस्तार पूरे देश में कर दिया गया। इसका मुख्य उद्देश्य नशीले पदार्थों के सेवन की रोकथाम और इस विषय पर समुदायों को जागरूक करना है।
अभियान में युवाओं, महिलाओं, शैक्षणिक संस्थानों और स्थानीय समुदायों को शामिल किया जाता है। सार्वजनिक संदेशों और सामुदायिक स्तर की गतिविधियों के माध्यम से नशे से बचाव की जानकारी साझा की जाती है। जारी आंकड़े अभियान के तहत संपर्क किए गए लोगों और गतिविधियों से जोड़े गए संस्थानों की पहुंच बताते हैं। इन्हें उपचार या नशे से मुक्त हुए लोगों की संख्या नहीं माना जाना चाहिए।
मांग में कमी के लिए व्यापक ढांचा
नशा मुक्त भारत अभियान, राष्ट्रीय नशीली दवा मांग में कमी कार्ययोजना के अंतर्गत संचालित है। यह केंद्र सरकार का ऐसा ढांचा है जिसमें नशीले पदार्थों की मांग घटाने के लिए रोकथाम, जागरूकता और क्षमता निर्माण के साथ उपचार तथा पुनर्वास से जुड़ी गतिविधियां शामिल हैं। प्रभावित लोगों के सामाजिक पुनःएकीकरण और इस क्षेत्र में काम करने वाले संस्थानों एवं संगठनों को सहायता देना भी इसके दायरे में आता है।
इस व्यवस्था में रोकथाम और उपचार को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ देखा गया है। जागरूकता का उद्देश्य नशे के जोखिम के बारे में जानकारी देना है, जबकि उपचार, पुनर्वास और सामाजिक पुनःएकीकरण उन लोगों के लिए सहायता के रास्ते हैं जो नशीले पदार्थों के सेवन से प्रभावित हैं।
2029 का लक्ष्य और अभियान की भूमिका
22 अक्टूबर 2026 को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस लक्ष्य का उल्लेख किया, जिसके अनुसार 31 दिसंबर 2029 तक भारत से नशीले पदार्थों के व्यापार को समाप्त करना है। यह लक्ष्य नशीले पदार्थों के व्यापार से जुड़ा है। इसके विपरीत, नशा मुक्त भारत अभियान और राष्ट्रीय कार्ययोजना का मुख्य जोर नशे की मांग घटाने, रोकथाम तथा प्रभावित लोगों को सहायता देने पर है। दोनों प्रयास व्यापक चुनौती के अलग-अलग पहलुओं को संबोधित करते हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- नशा मुक्त भारत अभियान की शुरुआत 15 अगस्त 2020 को हुई थी।
- अभियान की शुरुआती पहुंच नशे के जोखिम वाले 272 जिलों तक थी; अगस्त 2023 से इसका विस्तार देशभर में हुआ।
- इस अभियान का संचालन सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय करता है।
- राष्ट्रीय नशीली दवा मांग में कमी कार्ययोजना में रोकथाम, उपचार, पुनर्वास और सामाजिक पुनःएकीकरण शामिल हैं।
35 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंच और लाखों शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी अभियान के व्यापक जन-जागरूकता प्रयास को दर्शाती है। नशे की रोकथाम के साथ उपचार और पुनर्वास की व्यवस्था को मजबूत करना भी इस चुनौती से निपटने के लिए अहम है।