नई भूमि युद्ध नीति से भविष्य की सैन्य तैयारी को दिशा
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 22 अक्टूबर 2026 को भारतीय सेना की नई भूमि युद्ध नीति जारी करने वाले हैं। वर्ष 2018 के बाद सेना की यह पहली भूमि युद्ध नीति है। इसका उद्देश्य भविष्य के संघर्षों के लिए सेना की तैयारी को रणनीतिक और संचालन संबंधी दिशा देना है।
बदलते युद्ध के लिए नया ढाँचा
सैन्य नीति उन सिद्धांतों और दिशानिर्देशों को तय करती है जिनके आधार पर सैन्य अभियानों की योजना बनाई जाती है और उन्हें संचालित किया जाता है। नई नीति आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इसमें सेना की युद्ध-तत्परता को मजबूत करने और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप संचालन की दिशा तय करने पर जोर है।
इसके निर्माण में मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर, रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्षों से मिले अनुभवों को ध्यान में रखा गया है। इन घटनाओं ने दिखाया है कि युद्ध में तकनीक, सूचना और अलग-अलग सैन्य क्षमताओं के बीच समन्वय का महत्व बढ़ रहा है।
ड्रोन और नेटवर्क आधारित अभियानों की अहमियत
नई नीति में ड्रोन, सटीक प्रहार और नेटवर्क आधारित अभियानों से बने नए युद्ध-परिवेश को जगह दी गई है। ड्रोन का उपयोग निगरानी के साथ-साथ हमलों में भी बढ़ा है। सटीक प्रहार वाली प्रणालियाँ दूर से विशिष्ट लक्ष्य पर निशाना साध सकती हैं। नेटवर्क आधारित अभियानों में सेंसर, कमान व्यवस्था और विभिन्न सैन्य इकाइयाँ आपस में सूचना साझा कर समन्वित कार्रवाई करती हैं।
इन बदलावों के बीच सेना के लिए केवल हथियारों का आधुनिकीकरण ही नहीं, बल्कि सूचना का तेज आदान-प्रदान और इकाइयों के बीच तालमेल भी महत्वपूर्ण है। भूमि युद्ध नीति इसी व्यापक संचालन ढाँचे को दिशा देने का प्रयास है।
सेना कमांडरों के सम्मेलन में तैयारी और आधुनिकीकरण पर चर्चा
नई दिल्ली में 21 से 23 अक्टूबर तक होने वाला सेना कमांडरों का सम्मेलन वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व की छह-माही बैठक है। इसकी अध्यक्षता थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ कर रहे हैं। सम्मेलन के एजेंडे में बहु-क्षेत्रीय सुरक्षा, तीनों सेनाओं के बीच तालमेल, रक्षा अवसंरचना का डिजिटल रूपांतरण, संचालन संबंधी तैयारी, सैन्य आधुनिकीकरण और दीर्घकालीन बदलाव शामिल हैं।
सितंबर 2026 में जनरल सेठ ने सेना की भविष्य की तैयारी के लिए सात-बिंदु वाला ‘समर्थ’ ढाँचा भी प्रस्तुत किया था। इसका लक्ष्य तकनीक-सक्षम, अनुकूलनशील और मजबूत सेना तैयार करना है। सम्मेलन में प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि, नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन और इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव के संबोधन भी निर्धारित हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारतीय सेना की पिछली भूमि युद्ध नीति वर्ष 2018 में जारी हुई थी।
- ऑपरेशन सिंदूर मई 2025 में संचालित किया गया था।
- सेना कमांडरों का सम्मेलन वर्ष में दो बार आयोजित होता है।
- भारत संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में सैन्य कर्मियों का योगदान देता है।
राजनाथ सिंह संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में सेवा देने वाले भारतीय सेना के कर्मियों को सम्मानित करने और संयुक्त राष्ट्र की वार्षिक पत्रिका जारी करने वाले हैं। नई नीति और सम्मेलन के विमर्श से सेना की भावी संचालन-तैयारी को एक साझा दिशा मिलने की अपेक्षा है।