दरभंगा तारामंडल में बनेगी इसरो अंतरिक्ष दीर्घा और नवाचार केंद्र

दरभंगा तारामंडल में बनेगी इसरो अंतरिक्ष दीर्घा और नवाचार केंद्र

बिहार के मिथिला क्षेत्र में विज्ञान शिक्षा को व्यावहारिक आधार देने के लिए दरभंगा तारामंडल में अंतरिक्ष दीर्घा और अंतरिक्ष नवाचार केंद्र विकसित करने की योजना है। 31 अक्टूबर 2026 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वरिष्ठ वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की टीम ने प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण किया। परियोजना का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारत के अंतरिक्ष अभियानों से परिचित कराने के साथ तकनीकी गतिविधियों में भागीदारी का अवसर देना है।

दो एकड़ में बनेगी अंतरिक्ष से जुड़ी सीखने की जगह

प्रस्तावित परिसर लगभग दो एकड़ में विकसित किया जाएगा। इसमें प्रदर्शनी क्षेत्र, नवाचार प्रयोगशालाएं और तकनीक आधारित शिक्षण सुविधाएं शामिल होंगी। परियोजना की अनुमानित लागत 61 करोड़ रुपये है, जिसमें से 31 अक्टूबर 2026 तक 36 करोड़ रुपये की मंजूरी मिल चुकी थी।

अंतरिक्ष दीर्घा में चंद्रयान, मंगलयान, आदित्य-एल1 और गगनयान जैसे भारतीय अभियानों को त्रि-आयामी प्रतिकृतियों, आभासी वास्तविकता और अंतरिक्ष में चलने के अनुकरण के जरिए दिखाने की योजना है। इससे विद्यार्थी अभियानों और उनसे जुड़ी तकनीक को केवल पुस्तकीय जानकारी के बजाय दृश्य और अनुभवात्मक माध्यमों से समझ सकेंगे।

इसरो का तकनीकी सहयोग और परियोजना की समीक्षा

इसरो ने पहले ही परियोजना को तकनीकी सहायता देने के लिए सैद्धांतिक सहमति दी थी। अंतरिक्ष आयोग के अध्यक्ष वी. नारायणन ने 11 अगस्त 2026 को दरभंगा के सांसद गोपाल जी ठाकुर को लिखे पत्र में यह आश्वासन दिया था। ठाकुर की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में परियोजना के तकनीकी ढांचे और आधारभूत सुविधाओं पर विचार किया गया।

इसरो की भागीदारी से प्रस्तावित केंद्र की शैक्षणिक और तकनीकी रूपरेखा को विशेषज्ञ मार्गदर्शन मिलने की संभावना है। हालांकि, स्थल निरीक्षण और सैद्धांतिक सहमति परियोजना के प्रस्तावित चरणों का हिस्सा हैं; इन्हें केंद्र के निर्माण या संचालन की पूर्णता नहीं माना जाना चाहिए।

विद्यार्थियों के लिए प्रयोग और कौशल विकास

नवाचार केंद्र में रॉकेट निर्माण की बुनियादी समझ, रोबोटिक्स, छोटे उपग्रहों और कोडिंग से जुड़ा व्यावहारिक प्रशिक्षण देने की योजना है। विद्यार्थियों के लिए कार्यशालाएं और अन्य शैक्षणिक गतिविधियां भी प्रस्तावित हैं। इस तरह केंद्र विज्ञान के सिद्धांतों को प्रयोगों और परियोजना-आधारित सीखने से जोड़ सकता है।

मिथिला क्षेत्र में ऐसी सुविधा बनने से स्थानीय विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीकी विषयों से जुड़ने के लिए एक नया मंच मिल सकता है। इसकी वास्तविक उपयोगिता सुविधाओं के विकास, नियमित गतिविधियों और विद्यार्थियों तक उनकी पहुंच पर निर्भर करेगी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • इसरो, अंतरिक्ष विभाग की प्रमुख अनुसंधान एवं विकास संस्था है। इसरो अध्यक्ष विभाग के मुख्य कार्यकारी की भूमिका भी निभाते हैं।
  • चंद्रयान-3 के प्रज्ञान रोवर ने चंद्रमा की मिट्टी में तत्वों की पहचान के लिए एलआईबीएस और एपीएक्सएस उपकरणों का उपयोग किया था।
  • मंगलयान का मेन्का उपकरण मंगल के ऊपरी वायुमंडल में उदासीन कणों की संरचना मापने वाला द्रव्यमान स्पेक्ट्रोमीटर था।
  • आदित्य-एल1 का वीईएलसी कोरोनाग्राफ सूर्य के प्रकाशमंडल की चमक घटाकर उसके निकटवर्ती कोरोना का चित्रण करने के लिए बनाया गया है।

दरभंगा की यह प्रस्तावित पहल अंतरिक्ष अभियानों की जानकारी को स्थानीय विज्ञान शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण से जोड़ने का अवसर दे सकती है।

Originally written on October 31, 2026 and last modified on October 31, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *