तिब्बत के गूलिया पठार में मिला 1.28 लाख वर्ष पुराना हिम अभिलेख

तिब्बत के गूलिया पठार में मिला 1.28 लाख वर्ष पुराना हिम अभिलेख

तिब्बत के गूलिया पठार से लिए गए हिम-कोर में 1,28,000 वर्ष से भी पुराना जलवायु अभिलेख सुरक्षित होने के संकेत मिले हैं। यह खोज क्षेत्र के हिमनद इतिहास की ज्ञात अवधि को एक लाख वर्ष से अधिक पीछे ले जाती है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह ध्रुवीय क्षेत्रों के बाहर किसी पर्वतीय क्षेत्र में मिला अब तक का सबसे पुराना हिम अभिलेख हो सकता है।

दो हिम-कोर से मिली समान जलवायु तस्वीर

ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी के बर्ड ध्रुवीय अनुसंधान केंद्र के लोनी थॉम्पसन के नेतृत्व में वैज्ञानिकों ने 1992 और 2015 में जुटाए गए हिम-कोर की तुलना की। दोनों नमूनों में ऑक्सीजन समस्थानिकों के पैटर्न समान पाए गए। इन पैटर्न का अध्ययन करके वैज्ञानिक अतीत के तापमान और पर्यावरणीय परिस्थितियों का अनुमान लगाते हैं।

पहले के शोध में गूलिया का हिम अभिलेख केवल होलोसीन युग के मध्य तक पीछे जाता माना गया था। नए विश्लेषण से संकेत मिलता है कि पठार की कुछ बर्फ इससे बहुत पुरानी है। हालांकि, निष्कर्ष यह बताता है कि पुराना हिम मौजूद है; इससे पूरे हिम-कोर की हर परत की आयु समान रूप से 1,28,000 वर्ष से अधिक सिद्ध नहीं होती।

समय-निर्धारण के लिए चुंबकीय घटना का सहारा

आयु के अनुमान को मजबूत करने के लिए टीम ने बेरिलियम और क्लोरीन के रेडियोधर्मी समस्थानिकों का भी अध्ययन किया। इनसे 41,000 वर्ष से अधिक पुरानी लशांप चुंबकीय घटना के प्रमाण तलाशे गए। इस अवधि में पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र की दिशा में थोड़े समय के लिए उलटफेर हुआ था। आसपास की तिब्बती गुफाओं में जमा पदार्थों के ऑक्सीजन-समस्थानिक अभिलेखों से तुलना ने प्रस्तावित समय-रेखा को अतिरिक्त समर्थन दिया।

अध्ययन के अनुसार, पेरू के हुआस्कारान पर्वत से मिले हिम अभिलेख लगभग 30,000 वर्ष पुराने हैं। इस तुलना में गूलिया का संभावित अभिलेख पर्वतीय हिम में जलवायु इतिहास की कहीं अधिक लंबी अवधि को सामने लाता है। शोध साइंस एडवांसेज़ पत्रिका में सितंबर के अंत या अक्टूबर 2026 की शुरुआत में प्रकाशित हुआ।

जलवायु इतिहास समझने में महत्व

हिम-कोर बर्फ की परतों में समय के साथ जमा हुए पर्यावरणीय संकेतों को सुरक्षित रखते हैं। इनके विश्लेषण से वैज्ञानिक लंबे समय के जलवायु बदलावों का अध्ययन कर सकते हैं। गूलिया की बर्फ का अधिक पुराना होना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे ध्रुवीय क्षेत्रों से बाहर के जलवायु अभिलेखों की समय-सीमा बढ़ सकती है। साथ ही, नमूनों की आयु तय करने में अलग-अलग संकेतों की तुलना की उपयोगिता भी सामने आती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • हिम-कोर में बर्फ की आयु और उसमें फँसी गैसों की आयु के लिए अलग-अलग समय-रेखाएँ बनाई जाती हैं।
  • लशांप घटना पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के थोड़े समय के उलटफेर से जुड़ी थी; इसकी अवधि लगभग 42,200 से 41,500 वर्ष पूर्व मानी जाती है।
  • रेडियोधर्मी समस्थानिक प्राकृतिक रूप से मिल सकते हैं या परमाणु परीक्षणों से उत्पन्न हो सकते हैं; उनका उपयोग आयु-निर्धारण में किया जाता है।
  • पेरू के हुआस्कारान पर्वत के हिम अभिलेख लगभग 30,000 वर्ष पुराने बताए गए हैं।

गूलिया पठार की खोज पर्वतीय हिम को पृथ्वी के प्राचीन जलवायु इतिहास का महत्वपूर्ण अभिलेख मानने के आधार को मजबूत करती है। आगे के अध्ययन इस बर्फ की आयु और उससे मिलने वाले पर्यावरणीय संकेतों को अधिक स्पष्ट कर सकते हैं।

Originally written on October 31, 2026 and last modified on October 31, 2026.

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