जनजातीय गौरव पखवाड़ा: योजनाओं और अधिकारों पर रहेगा जोर
जनजातीय कार्य मंत्रालय 1 से 15 नवंबर 2026 तक देशभर में जनजातीय गौरव पखवाड़ा मनाएगा। इसका समापन 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर होगा। यह दिन जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की जयंती है। केंद्र सरकार ने 2021 में 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में घोषित किया था।
पखवाड़े में योजनाओं और विकास कार्यों पर जोर
पखवाड़े का उद्देश्य जनजातीय समुदायों के बीच सरकारी योजनाओं और उनके तहत मिलने वाले अधिकारों की जानकारी बढ़ाना तथा पात्र परिवारों तक लाभ पहुंचाने में सहायता करना है। इस दौरान जनजातीय समुदायों के लिए 300 से अधिक परियोजनाओं की योजना है। इनमें 228 परियोजनाओं का उद्घाटन और 74 की आधारशिला रखे जाने का कार्यक्रम शामिल है। इसके अलावा राज्यों में 160 से अधिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
12 नवंबर को एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों के करीब 200 विद्यार्थियों की राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति से मुलाकात प्रस्तावित है। नई दिल्ली में 12 और 13 नवंबर को राष्ट्रीय जनजातीय साहित्य महोत्सव होगा, जिसमें देश के अलग-अलग हिस्सों के जनजातीय लेखक हिस्सा लेंगे। 14 नवंबर को रानी दुर्गावती आदिवासी महिला सम्मेलन में 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की 500 जनजातीय महिला उद्यमियों के जुटने की योजना है। सम्मेलन का उद्देश्य उनके उत्पादों के लिए बाजार संपर्क विकसित करना है।
बिरसा मुंडा और जनजातीय संघर्ष की विरासत
बिरसा मुंडा मुंडा समुदाय से जुड़े स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम वर्षों में ब्रिटिश शासन और जनजातीय समुदायों के शोषण के खिलाफ ‘उलगुलान’ यानी ‘महान हलचल’ का नेतृत्व किया। उनके संघर्ष की स्मृति में मनाया जाने वाला यह दिवस जनजातीय नायकों के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देने का अवसर है।
पखवाड़े के कार्यक्रमों में जनजातीय समाज से जुड़े अधिकारों और सार्वजनिक सेवाओं पर भी ध्यान रहेगा। अनुसूचित जनजातियों के लिए संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत राष्ट्रपति के आदेश से राज्य या केंद्रशासित प्रदेश के अनुसार समुदायों को निर्दिष्ट किया जाता है। पांचवीं अनुसूची निर्दिष्ट राज्यों में अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन तथा नियंत्रण से संबंधित है।
डिजिटल मंचों से स्वास्थ्य और वन अधिकारों को मदद
आयोजन के दौरान दो राष्ट्रीय डिजिटल मंच शुरू किए जाने प्रस्तावित हैं। जन-हित पोर्टल जनजातीय स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़ों के लिए मंच उपलब्ध कराएगा, जबकि राष्ट्रीय वन अधिकार डिजिटल मंच वन अधिकारों के दावों को समर्थन देगा। वन अधिकार अधिनियम, 2006 का औपचारिक नाम अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 है। यह पात्र अनुसूचित जनजातियों और अन्य परंपरागत वन निवासियों के व्यक्तिगत तथा सामुदायिक वन अधिकारों को मान्यता देता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- जनजातीय गौरव दिवस हर वर्ष 15 नवंबर को बिरसा मुंडा की जयंती पर मनाया जाता है।
- केंद्र सरकार ने 2021 में 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस घोषित किया था।
- वन अधिकार अधिनियम 2006 में बनाया गया था और यह व्यक्तिगत तथा सामुदायिक वन अधिकारों को मान्यता देता है।
- संविधान का अनुच्छेद 342 अनुसूचित जनजातियों के विनिर्देशन से संबंधित है।
2026 का पखवाड़ा जनजातीय नायकों की विरासत को याद करने के साथ-साथ योजनाओं, अधिकारों और आजीविका के अवसरों को समुदायों तक पहुंचाने पर केंद्रित रहेगा।