ग्रेटर नोएडा में रोबोटिक्स और एआई पार्क से रोजगार व निवेश को बढ़ावा

ग्रेटर नोएडा में रोबोटिक्स और एआई पार्क से रोजगार व निवेश को बढ़ावा

उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल ने 27 अक्टूबर 2026 को ग्रेटर नोएडा में 69.52 एकड़ में रोबोटिक्स और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पार्क स्थापित करने की मंजूरी दी। ‘प्रगति’ नाम की इस परियोजना से पूर्ण क्षमता पर सालाना लगभग 2,000 करोड़ रुपये का सकल मूल्यवर्धन (जीवीए) और एक लाख से अधिक प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है। ये आंकड़े परियोजना के पूरी तरह विकसित होने के बाद के अनुमान हैं।

दो विकास क्षेत्रों में बनेगा प्रगति पार्क

प्लेटफॉर्म फॉर रोबोटिक्स एंड एआई ग्रोथ थ्रू टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन यानी प्रगति पार्क को दो हिस्सों में विकसित किया जाएगा। आठ एकड़ का क्षेत्र सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत बनेगा, जबकि शेष 61.52 एकड़ में निजी निवेश से औद्योगिक इकाइयां और उनसे जुड़ी गतिविधियां विकसित होंगी। दूसरे क्षेत्र में राज्य सरकार की कोई पूंजीगत देनदारी नहीं होगी।

पीपीपी क्षेत्र के विकास और संचालन के लिए एक विशेष प्रयोजन कंपनी (एसपीवी) बनाई जाएगी। इसमें ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 26 प्रतिशत और चुने गए औद्योगिक साझेदार की 74 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। साझेदार का चयन गुणवत्ता-आधारित प्रक्रिया से किया जाएगा।

वित्तीय सहायता और संचालन की समयसीमा

आठ एकड़ वाले पीपीपी क्षेत्र के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण 21.1 करोड़ रुपये की इक्विटी देगा। राज्य सरकार 126.2 करोड़ रुपये का ब्याज-मुक्त ऋण 30 वर्ष के लिए उपलब्ध कराएगी। इस तरह दोनों स्रोतों से कुल सहायता 147.3 करोड़ रुपये होगी। तय व्यवस्था के तहत राज्य का आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग भूखंड के लीज प्रीमियम की राशि प्राधिकरण को लौटाएगा।

निजी निवेश वाले क्षेत्र में भूखंड आवंटन पर विकास शुल्क से प्राप्त राजस्व का 5 प्रतिशत एसपीवी को सेवा शुल्क के रूप में मिलेगा; इस पर लागू वस्तु एवं सेवा कर अलग से देय होगा। एसपीवी के पंजीकरण के 36 महीने के भीतर पहले क्षेत्र में व्यावसायिक संचालन शुरू करने का लक्ष्य है। जरूरत पड़ने पर यह अवधि बढ़ाकर 48 महीने की जा सकती है।

साझा तकनीकी सुविधाएं और संभावित लाभ

पार्क में रोबोटिक्स परीक्षण एवं प्रमाणन केंद्र, त्वरित नमूना निर्माण सुविधाएं, एआई कंप्यूटिंग ढांचा, गति-अभिलेखन प्रणाली और डेटा प्रयोगशालाएं प्रस्तावित हैं। स्टार्ट-अप और उद्यमियों को ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (जीपीयू) आधारित कंप्यूटिंग सुविधा तक पहुंच मिल सकती है। इससे उत्पादों के परीक्षण और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रमाणन में मदद मिलने की उम्मीद है। स्रोत में सीई और यूएल प्रमाणन को ऐसे मानकों के उदाहरण के रूप में शामिल किया गया है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • प्रगति पार्क का कुल प्रस्तावित क्षेत्रफल 69.52 एकड़ है।
  • एसपीवी में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 26% और औद्योगिक साझेदार की 74% हिस्सेदारी होगी।
  • पीपीपी क्षेत्र के लिए राज्य सरकार का 126.2 करोड़ रुपये का ऋण ब्याज-मुक्त और 30 वर्ष की अवधि का है।
  • जीवीए का अर्थ उत्पादन के कुल मूल्य में से उत्पादन के दौरान इस्तेमाल हुए मध्यवर्ती इनपुट का मूल्य घटाने के बाद बचा मूल्य है।

प्रगति पार्क का मॉडल सार्वजनिक सहायता और निजी निवेश को अलग-अलग विकास क्षेत्रों में जोड़ता है। इसके रोजगार और जीवीए संबंधी लक्ष्य अनुमानित हैं; वास्तविक परिणाम परियोजना के विकास और संचालन पर निर्भर करेंगे।

Originally written on October 28, 2026 and last modified on October 28, 2026.

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