ग्रीनलैंड पर नया रक्षा समझौता: आर्कटिक में अमेरिका की पकड़ और मजबूत
संयुक्त राज्य अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के मौके पर एक नया सुरक्षा समझौता किया है। यह समझौता आर्कटिक क्षेत्र में सैन्य पहुंच, रक्षा ढांचे और रणनीतिक सहयोग को नए सिरे से परिभाषित करता है। इसके जरिए 1951 के पुराने अमेरिकी-डेनिश रक्षा समझौते को अपडेट किया गया है, जो पिछले 75 वर्षों से ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति का आधार रहा है।
आर्कटिक में ग्रीनलैंड क्यों अहम है
ग्रीनलैंड डेनमार्क के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र है और उत्तर अटलांटिक तथा आर्कटिक दोनों क्षेत्रों में स्थित है। इसकी भौगोलिक स्थिति इसे अमेरिका और यूरोप के बीच एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बिंदु बनाती है। यही कारण है कि यहां मिसाइल चेतावनी प्रणाली, सैन्य रसद और आर्कटिक रक्षा से जुड़ी गतिविधियों का विशेष महत्व है।
नया समझौता इस हकीकत को स्वीकार करता है कि आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा संतुलन लगातार बदल रहा है। बर्फ पिघलने, समुद्री मार्गों के खुलने और बड़ी शक्तियों की बढ़ती रुचि के कारण ग्रीनलैंड का सामरिक महत्व पहले से अधिक हो गया है।
समझौते में क्या-क्या प्रावधान हैं
इस रक्षा समझौते के तहत अमेरिका को पिटुफिक स्पेस बेस पर अपनी गतिविधियों को आधुनिक बनाने और विस्तार करने की अनुमति दी गई है। इसके अलावा नारसारसुआक और मेस्टरस्विग में अतिरिक्त रक्षा क्षेत्रों की स्थापना का रास्ता भी खोला गया है।
समझौते में अमेरिकी पक्ष को ग्रीनलैंड के हवाई क्षेत्र और भूभाग तक व्यापक पहुंच दी गई है। इसमें समुद्र के नीचे से जुड़े पहुंच प्रावधान भी शामिल हैं, जो सैन्य और लॉजिस्टिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
संप्रभुता, निवेश और कानूनी स्थिति
समझौते में डेनमार्क के राज्य और ग्रीनलैंड के क्षेत्रीय अधिकारों की पुष्टि की गई है। साथ ही ग्रीनलैंड के आत्मनिर्णय के अधिकार को भी दोहराया गया है। यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आर्कटिक में बाहरी प्रभाव और रणनीतिक निवेश को लेकर चिंता बनी रहती है।
समझौते के अनुसार, गैर-नाटो और गैर-ईयू देशों को ग्रीनलैंड में सैन्य ठिकाने स्थापित करने या संवेदनशील निवेश करने के लिए सभी पक्षों की स्पष्ट मंजूरी लेनी होगी। यह प्रावधान आर्कटिक क्षेत्र में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा को नियंत्रित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- 1951 का अमेरिकी-डेनिश रक्षा समझौता ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य पहुंच का मुख्य कानूनी आधार रहा है।
- पिटुफिक स्पेस बेस उत्तर-पश्चिमी ग्रीनलैंड में स्थित है और रक्षा तथा अंतरिक्ष से जुड़ी गतिविधियों में उपयोग होता है।
- ग्रीनलैंड डेनमार्क के राज्य का हिस्सा है, लेकिन उसके पास अपनी सरकार और आत्मनिर्णय का अधिकार है।
- नया समझौता बिना समाप्ति तिथि के है और ग्रीनलैंड के स्वतंत्र होने की स्थिति में भी प्रभावी रह सकता है।
यह समझौता तभी लागू होगा जब डेनमार्क और ग्रीनलैंड की संसदें इसे मंजूरी देंगी। आर्कटिक में नाटो प्रतिबद्धताओं के अनुरूप इसे तैयार किया गया है, इसलिए इसका असर क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण पर लंबे समय तक दिख सकता है।