गूगल का अंतरिक्ष एआई परीक्षण: कक्षा से मिला पहला पूरा जवाब
गूगल के प्रोजेक्ट सनकैचर के प्रोटोटाइप उपग्रह ने अंतरिक्ष की कक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) मॉडल चलाकर उसका पूरा जवाब पृथ्वी पर भेजा है। 31 अक्टूबर 2026 को घोषित इस उपलब्धि को कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुंदर पिचाई ने एआई के लिए अंतरिक्ष में मिला “हैलो वर्ल्ड” क्षण बताया। यह परीक्षण अंतरिक्ष में मशीन लर्निंग की गणना करने की संभावनाओं को परखने की दिशा में एक शुरुआती कदम है।
उपग्रह पर चला एआई मॉडल
गूगल ने यह प्रोटोटाइप उपग्रह प्लैनेट के साथ विकसित किया था। इसे 1 अक्टूबर को स्पेसएक्स के ट्रांसपोर्टर-18 साझा प्रक्षेपण अभियान के जरिए कक्षा में भेजा गया। परीक्षण के दौरान, जब उपग्रह का संपर्क भू-स्टेशन से हुआ, तब उस पर मौजूद टेन्सर प्रोसेसिंग यूनिट (टीपीयू) में चल रहे खुले एआई मॉडल जेम्मा 4 को निर्देश भेजा गया।
मॉडल से अंतरिक्ष पर एक हाइकु लिखने को कहा गया। उपग्रह ने पृथ्वी को नीले गोले के रूप में देखने, अंतरिक्ष में डेटा के प्रवाह और तारों की ऊर्जा से अपने तंत्र के चलने का भाव व्यक्त करता जवाब लौटाया। यह संदेश नॉर्वे के स्वालबार्ड क्षेत्र के ऊपर से गुजरते समय प्राप्त हुआ। टीम ने अंतरिक्ष-विषयक लिमरिक और उपग्रह की तकनीकी स्थिति से जुड़े निर्देशों का परीक्षण भी किया।
अंतरिक्ष में एआई कंप्यूटिंग की संभावनाएं
प्रोजेक्ट सनकैचर की घोषणा 4 नवंबर 2025 को हुई थी। इसका उद्देश्य यह जांचना है कि क्या बड़े स्तर की मशीन लर्निंग गणना के लिए अंतरिक्ष में ढांचा विकसित किया जा सकता है। पृथ्वी की निचली कक्षा में उपग्रहों को सूर्य का प्रकाश लंबे समय तक मिल सकता है, जिससे सौर ऊर्जा का उपयोग संभव है। गूगल का अनुमान है कि ऐसे उपग्रह पृथ्वी पर मौजूद प्रणालियों की तुलना में आठ गुना तक अधिक सौर ऊर्जा पैदा कर सकते हैं। यह कंपनी का अनुमान है, स्थापित परिचालन परिणाम नहीं।
हालांकि, अंतरिक्ष में कंप्यूटिंग के लिए केवल सौर ऊर्जा पर्याप्त नहीं होगी। प्रक्षेपण के दौरान और कक्षा में रात वाले हिस्से से गुजरते समय सूर्य का प्रकाश उपलब्ध नहीं होता, इसलिए ऊर्जा जमा करने के लिए बैटरियों की जरूरत पड़ती है। इसके अलावा उपकरणों को कक्षा के तापमान में बदलाव और विकिरण के असर के बीच काम करना होगा। अगला चरण टीपीयू पर इन परिस्थितियों के प्रभाव की जांच करेगा।
आगे की योजना और तकनीकी चुनौतियां
गूगल की योजना 2027 में दो परस्पर जुड़े उपग्रह भेजने की है। इनके बीच प्रकाशीय संपर्क का परीक्षण किया जाएगा, ताकि उपग्रह एक-दूसरे को लेज़र के जरिए डेटा भेज सकें। इस तरह का संपर्क अंतरिक्ष में एक जाल-जैसा नेटवर्क बनाने और बड़े एआई कार्यभार को संभालने में मदद कर सकता है। अभी की सफलता एक प्रोटोटाइप परीक्षण है; इससे अंतरिक्ष में बड़े पैमाने पर एआई सेवा शुरू होने की पुष्टि नहीं होती।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- टीपीयू गूगल द्वारा विकसित एक विशेषीकृत चिप है, जिसे मुख्य रूप से तंत्रिका-जाल आधारित मशीन लर्निंग के लिए बनाया गया है।
- टीपीयू कम-परिशुद्धता वाली गणनाओं की बड़ी मात्रा को ऊर्जा-कुशल ढंग से करने के लिए तैयार किए जाते हैं।
- सौर ऊर्जा से चलने वाले उपग्रहों को सूर्य का प्रकाश न मिलने की अवधि के लिए बैटरियों में ऊर्जा जमा करनी पड़ती है।
- उपग्रहों के बीच लेज़र संपर्क से प्रकाशीय नेटवर्क बनाया जा सकता है, जिसमें अंतरिक्ष यान सीधे डेटा का आदान-प्रदान करते हैं।
यह परीक्षण अंतरिक्ष में एआई गणना के तकनीकी रास्ते की शुरुआती पड़ताल है। इसकी व्यावहारिक उपयोगिता आगे के ऊर्जा, संचार और विकिरण-संबंधी परीक्षणों के नतीजों पर निर्भर करेगी।