गुवाहाटी हवाई अड्डे से आसान होगा असम के अगरवुड का निर्यात

गुवाहाटी हवाई अड्डे से आसान होगा असम के अगरवुड का निर्यात

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने 30 अक्टूबर 2026 को गुवाहाटी के लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को अगरवुड तेल, चिप्स और संबंधित उत्पादों के निर्यात केंद्र के रूप में मंजूरी दी। इससे असम और पूर्वोत्तर के उत्पादकों को सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।

निर्यात प्रक्रिया और नियम

इस मंजूरी के लिए निर्यात नीति, 2022 की अनुसूची-द्वितीय के अध्याय 12 में संशोधन किया गया है। अब निर्धारित शर्तों के अधीन अगरवुड उत्पादों की खेप गुवाहाटी से सीधे विदेश भेजी जा सकेगी। हालांकि, मंजूरी का अर्थ सभी उत्पादों के लिए नियमों से छूट नहीं है। संरक्षित प्रजातियों से जुड़े व्यापार पर वन्य जीवों और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधी अभिसमय (सीआईटीईएस) के नियम लागू होंगे। जहां आवश्यक हो, सीआईटीईएस परमिट और डीजीएफटी द्वारा जारी प्रतिबंधित निर्यात लाइसेंस लेना होगा। निर्यातकों को सामान्यतः आयातक-निर्यातक कूट भी प्राप्त करना होता है।

असम के अगरवुड क्षेत्र के लिए महत्व

भारत के अगरवुड उत्पादन में असम की हिस्सेदारी लगभग 81 प्रतिशत बताई जाती है और राज्य में इसके करीब 12 करोड़ पौधे हैं। खेती, प्रसंस्करण और कारोबार से 50 हजार से अधिक किसान तथा श्रमिक जुड़े हैं। गोलाघाट जिले के अगरवुड उत्पादों को ‘एक जिला, एक उत्पाद’ पहल में शामिल किया गया है। उद्योग से जुड़े लोगों का अनुमान है कि खेती और निर्यात का विस्तार होने पर यह क्षेत्र 50 हजार करोड़ रुपये तक के बाजार अवसर हासिल कर सकता है।

नए निर्यात केंद्र से परिवहन और खेप भेजने की व्यवस्था अधिक सुविधाजनक होने की उम्मीद है। इससे उत्पादकों को दूसरे राज्यों के हवाई अड्डों पर निर्भरता कम करने और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, यह मंजूरी असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के अनुरोध के बाद दी गई।

पहले निर्यात और अगरवुड की विशेषता

मई 2026 में असम से अगरवुड चिप्स की 2.35 करोड़ रुपये मूल्य की पहली कानूनी रूप से स्वीकृत खेप सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात भेजी गई थी। अक्टूबर में 123 किलोग्राम प्रीमियम चिप्स की खेप गुवाहाटी से दुबई रवाना की गई। इन उदाहरणों के बाद नए निर्यात केंद्र की मंजूरी राज्य के निर्यात ढांचे को और मजबूत कर सकती है।

अगरवुड एक्विलारिया वृक्ष की लकड़ी में संक्रमण के बाद बनने वाली सुगंधित राल से तैयार होता है। संक्रमण होने पर वृक्ष राल स्रावित करता है, जिससे लकड़ी गहरी और अधिक घनी बनती है। प्राकृतिक वनों में एक ही प्रजाति के लगभग सौ वृक्षों में से करीब सात में ही यह प्रक्रिया होती है, इसलिए उच्च गुणवत्ता वाले अगरवुड का उत्पादन सीमित रहता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • डीजीएफटी भारत में आयातक-निर्यातक कूट जारी करने वाला प्राधिकरण है।
  • सीआईटीईएस का उद्देश्य संकटग्रस्त वन्य जीवों और वनस्पतियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित करना है।
  • सीआईटीईएस की सूची में खुदरा बिक्री के लिए पैक किए गए कुछ तैयार अगरवुड उत्पादों को छूट है; माला के मनके, प्रार्थना-माला और नक्काशीदार वस्तुएं इस छूट में शामिल नहीं हैं।
  • अगरवुड एक्विलारिया वृक्ष में संक्रमण के प्रति प्रतिक्रिया स्वरूप बनने वाली सुगंधित राल के कारण मूल्यवान होता है।

गुवाहाटी को निर्यात केंद्र बनाने से असम के अगरवुड कारोबार को बेहतर बाजार संपर्क मिल सकता है। इस अवसर का लाभ नियमों के पालन और टिकाऊ उत्पादन के साथ ही व्यापक रूप से उठाया जा सकेगा।

Originally written on October 31, 2026 and last modified on October 31, 2026.

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