कोयंबटूर में पेरियार अरिवुलगम: शिक्षा और विज्ञान का नया केंद्र
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 16 अक्टूबर 2026 को कोयंबटूर के गांधिपुरम में पेरियार अरिवुलगम का उद्घाटन किया। पुस्तकालय और विज्ञान केंद्र के रूप में विकसित यह आठ मंजिला परिसर शिक्षा, विज्ञान और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़ी सुविधाओं को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराएगा।
करीब 300 करोड़ रुपये की परियोजना
पेरियार अरिवुलगम नंजप्पा रोड पर गांधिपुरम केंद्रीय बस अड्डे के सामने स्थित है। इसका निर्माण कारागार विभाग की लगभग सात एकड़ भूमि पर किया गया है। परिसर का निर्मित क्षेत्र करीब 1.98 लाख वर्ग फुट है और परियोजना पर लगभग 300 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।
निर्माण कार्य 2024 में शुरू हुआ था। तत्कालीन मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने 6 नवंबर 2024 को इसकी आधारशिला रखी थी। उद्घाटन के दौरान मुख्यमंत्री विजय ने समाज सुधारक पेरियार की प्रतिमा और स्मारक पट्टिका का अनावरण भी किया।
पुस्तकालय से तारामंडल तक कई सुविधाएं
परिसर में पुस्तकालय, विज्ञान केंद्र, तारामंडल, 350 सीटों वाला सभागार और अंतरिक्ष लिफ्ट से जुड़ी सुविधा शामिल है। यहां बच्चों के लिए अलग पुस्तकालय, वाचन क्षेत्र और डिजिटल पुस्तकालय भी बनाए गए हैं। पुस्तक संग्रह की संख्या अलग-अलग विवरणों में 80 हजार से 1.25 लाख के बीच बताई गई है।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग केंद्र और दिव्यांगजनों के लिए विशेष पुस्तकालय भी इस परिसर का हिस्सा हैं। इस तरह यह केंद्र केवल किताबों तक पहुंच नहीं देता, बल्कि विज्ञान संबंधी सीखने और परीक्षा-तैयारी के लिए भी सुविधाएं उपलब्ध कराता है।
पेरियार की विरासत और कोयंबटूर दौरे की अन्य घोषणाएं
पेरियार का मूल नाम ईरोड वेंकट रामासामी था। उनका जन्म 1879 में ईरोड में हुआ था। उन्होंने 1925 में आत्मसम्मान आंदोलन शुरू किया, जिसका उद्देश्य जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानताओं का विरोध करना था। उनके नाम पर बना यह परिसर सामाजिक सुधार की विरासत को शिक्षा और सार्वजनिक सेवाओं से जोड़ता है।
कोयंबटूर दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने 408.25 करोड़ रुपये की लागत वाली 89 पूरी हो चुकी परियोजनाओं का उद्घाटन किया और 144 परियोजनाओं की आधारशिला रखी। साथ ही 9,343 लाभार्थियों को कल्याणकारी सहायता वितरित की गई।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- पेरियार का जन्मनाम ईरोड वेंकट रामासामी था और उनका जन्म 1879 में हुआ था।
- आत्मसम्मान आंदोलन की शुरुआत पेरियार ने 1925 में की थी।
- तारामंडल में खगोलीय पिंडों और अंतरिक्ष से जुड़ी जानकारी प्रदर्शित की जाती है।
- डिजिटल पुस्तकालय में पुस्तकें और अन्य सामग्री इलेक्ट्रॉनिक स्वरूप में उपलब्ध होती हैं।
पेरियार अरिवुलगम कोयंबटूर में पुस्तकालय, विज्ञान शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षा मार्गदर्शन को एक साझा सार्वजनिक परिसर में लाने वाली महत्वपूर्ण पहल है।