कूनो में नामीबियाई चीते गौरव की मौत, पुनर्वास परियोजना पर फिर ध्यान

कूनो में नामीबियाई चीते गौरव की मौत, पुनर्वास परियोजना पर फिर ध्यान

मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में नामीबियाई नर चीते गौरव की 21 सितंबर 2026 को करीब 4 बजे मौत हो गई। 10 वर्षीय यह चीता पिछले लगभग 10 दिनों से पालपुर स्थित क्वारंटीन बोमा में इलाज के तहत रखा गया था, क्योंकि 12 सितंबर को वन अधिकारियों ने उसे कमजोर और सुस्त पाया था।

कूनो में चीते की सेहत बिगड़ने के बाद इलाज जारी था

अधिकारियों के अनुसार गौरव बेहद कमजोर हालत में मिला था। उसके शरीर में मांसपेशियों की कमी, गंभीर निर्जलीकरण और शारीरिक दुर्बलता के संकेत दिखे थे। प्रारंभिक तौर पर किसी पुरानी बीमारी की आशंका जताई गई, लेकिन मौत का वास्तविक कारण पोस्ट-मॉर्टम और नमूनों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

कूनो में चीता परियोजना के तहत वन्यजीव विशेषज्ञ लगातार इन जानवरों की निगरानी करते हैं, क्योंकि नए वातावरण में उनका स्वास्थ्य, भोजन, संक्रमण और अनुकूलन कई तरह की चुनौतियों से जुड़ा रहता है।

भारत में चीता पुनर्वास परियोजना की पृष्ठभूमि

भारत ने 2022 में नामीबिया से आठ चीतों को लाकर चीता पुनर्वास परियोजना की शुरुआत की थी। यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण मानी गई क्योंकि देश में चीता 1952 में विलुप्त हो गया था। इस परियोजना का उद्देश्य अफ्रीकी चीतों को भारत के संरक्षित आवासों में फिर से स्थापित करना है।

नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीतों के जरिए भारत में इस प्रजाति की वापसी कराई जा रही है। यह दुनिया की उन दुर्लभ संरक्षण पहलों में से एक है, जिसमें किसी बड़े शिकारी जीव को उसके पुराने भौगोलिक क्षेत्र में फिर से बसाने की कोशिश की जा रही है।

कूनो में मौजूदा चीता संख्या और संरक्षण की चुनौती

गौरव की मौत के बाद कूनो राष्ट्रीय उद्यान में 51 चीते रह गए हैं, जिनमें 36 भारत में जन्मे चीते शामिल हैं। देश में कुल चीता संख्या 55 बताई गई है। कूनो इस पूरे कार्यक्रम का मुख्य केंद्र है और श्योपुर जिले में स्थित यह पार्क चीता पुनर्वास के लिए सबसे अहम स्थल बन चुका है।

कूनो को 2018 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया था। यहां चीतों के लिए उपयुक्त आवास, निगरानी व्यवस्था और स्वास्थ्य प्रबंधन बनाए रखना परियोजना की सफलता के लिए जरूरी है। ऐसे में किसी भी चीते की मौत न केवल जैव विविधता संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण होती है, बल्कि परियोजना की प्रगति और चुनौतियों को भी सामने लाती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • चीता दुनिया का सबसे तेज़ स्थलीय जीव माना जाता है और छोटी दूरी में लगभग 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुंच सकता है।
  • चीते का वैज्ञानिक नाम Acinonyx jubatus है।
  • कूनो राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित है और इसे 2018 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया था।
  • भारत में चीता पुनर्वास परियोजना में नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए अफ्रीकी चीते शामिल हैं।

गौरव की मौत ने एक बार फिर यह दिखाया है कि वन्यजीव पुनर्वास केवल स्थानांतरण की प्रक्रिया नहीं, बल्कि लंबे समय तक चलने वाली स्वास्थ्य, आवास और निगरानी आधारित जिम्मेदारी भी है।

Originally written on September 22, 2026 and last modified on September 22, 2026.

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