कूनो में चीता परिवार का विस्तार, भारत में संख्या 60 पहुंची
मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में 5 अक्टूबर 2026 को एक भारत-जन्मी मादा चीता KJP21 से पांच शावकों का जन्म हुआ। इस नई उपलब्धि के साथ भारत में चीतों की कुल संख्या 60 हो गई है, जिनमें 41 चीते भारतीय धरती पर जन्मे हैं। यह प्रोजेक्ट चीता के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है, क्योंकि इससे देश में चीता पुनर्वास और प्रजनन की सफलता का संकेत मिलता है।
कूनो में बढ़ती चीता आबादी
कूनो राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित है और भारत में चीता पुनर्स्थापन का मुख्य केंद्र बना हुआ है। वर्तमान में देश के 60 चीतों में से 53 कूनो में हैं, जबकि तीन चीते गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में रखे गए हैं। कूनो में इस वर्ष पहले भी जन्म दर्ज किए गए थे, जिनमें मार्च 2026 में नामीबियाई मादा चीता ज्वाला से पांच शावकों का जन्म शामिल है।
प्रोजेक्ट चीता की यात्रा
भारत में प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को हुई थी, जब नामीबिया से आठ चीते लाए गए थे। इसके बाद फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते और फरवरी 2026 में बोत्सवाना से नौ चीते भारत पहुंचे। यह परियोजना भारत में किसी बड़े मांसाहारी वन्यजीव के पहले अंतरमहाद्वीपीय स्थानांतरण के रूप में दर्ज है। इसका उद्देश्य केवल चीतों को लाना नहीं, बल्कि उनके लिए उपयुक्त आवास, प्रबंधन और प्रजनन की स्थायी व्यवस्था बनाना भी है।
वंशानुगत विविधता और संरक्षण का महत्व
ताजा जन्मों की खास बात यह है कि इससे भारत में बोत्सवाना वंश-रेखा भी जुड़ गई है, क्योंकि शावकों का पिता बोत्सवाना मूल का नर चीता है। इससे प्रजनन आधार मजबूत होने और आनुवंशिक विविधता बढ़ने की संभावना बनती है। इससे पहले सितंबर 2026 में भारत-जन्मी मादा चीता KGP12 ने चार शावकों को जन्म दिया था, जिससे संख्या 56 तक पहुंची थी। हालांकि अप्रैल 2026 में KGP12 के चार शावक तेंदुए के हमले में जीवित नहीं रह पाए थे, जो वन्यजीव संरक्षण में जोखिमों की याद दिलाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- चीता दुनिया का सबसे तेज़ स्थलीय जीव माना जाता है और इसका वैज्ञानिक वंश Acinonyx है।
- एशियाई चीता, अफ्रीकी चीते से अलग उप-प्रजाति है।
- कूनो राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित है।
- प्रोजेक्ट चीता में चीतों का स्थानांतरण, प्रजनन और आवास प्रबंधन शामिल है।
कूनो में लगातार हो रही बढ़ोतरी बताती है कि भारत में चीता पुनर्वास कार्यक्रम धीरे-धीरे स्थिरता की ओर बढ़ रहा है। यह उपलब्धि वन्यजीव संरक्षण, प्रजनन प्रबंधन और आवास पुनर्स्थापन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।