कुमकुम मोहोद ने रचा इतिहास, भारत को मिला पहला महिला रिकर्व व्यक्तिगत स्वर्ण
17 वर्षीय भारतीय तीरंदाज कुमकुम मोहोद ने एशियाई खेलों में महिलाओं की व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा में भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाकर इतिहास रच दिया। 3 अक्टूबर 2026 को हुए फाइनल में उन्होंने दक्षिण कोरिया की ओ येजिन को शूट-ऑफ में हराया। निर्धारित मुकाबला 5-5 से बराबरी पर समाप्त हुआ, जिसके बाद निर्णायक तीर में कुमकुम ने 10 का परफेक्ट स्कोर किया, जबकि ओ येजिन 8 ही बना सकीं।
कठिन मुकाबलों के बाद आया निर्णायक पल
कुमकुम का यह स्वर्ण सिर्फ एक पदक नहीं, बल्कि भारतीय रिकर्व तीरंदाजी के लिए बड़ा संकेत भी है। फाइनल तक पहुंचने का उनका सफर भी बेहद प्रभावशाली रहा। क्वार्टरफाइनल में उन्होंने मौजूदा विश्व चैंपियन कांग चेयॉन्ग को 6-4 से हराया, जबकि सेमीफाइनल में चीन की जिंगयी झू को 6-2 से मात दी। लगातार मजबूत प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ जीत ने उनके आत्मविश्वास और तकनीकी स्थिरता को उजागर किया।
रिकर्व तीरंदाजी और स्कोरिंग कैसे होती है
रिकर्व तीरंदाजी ओलंपिक कार्यक्रम की प्रमुख स्पर्धा है, जिसे वर्ल्ड आर्चरी फेडरेशन नियंत्रित करता है। इसमें धनुष की भुजाएं बिना खिंचे अवस्था में तीरंदाज से दूर मुड़ी होती हैं। व्यक्तिगत मुकाबलों में खिलाड़ी सेट प्रणाली के तहत खेलते हैं और आम तौर पर जो तीरंदाज पहले 6 सेट अंक हासिल कर लेता है, वह विजेता बनता है। यदि स्कोर बराबर रहे, तो शूट-ऑफ होता है, जिसमें एक-एक तीर से परिणाम तय किया जाता है।
भारत के लिए पदक और ओलंपिक कोटा दोनों
कुमकुम ने इसी प्रतियोगिता में महिलाओं की टीम रिकर्व स्पर्धा में अंकिता भकत और कीर्ति शर्मा के साथ स्वर्ण भी जीता। इसके अलावा उन्होंने धीरज बोम्मादेवरा के साथ मिश्रित टीम में रजत पदक हासिल किया। सेमीफाइनल तक पहुंचकर उन्होंने भारत के लिए 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक का कोटा स्थान भी सुनिश्चित किया। यह कोटा किसी व्यक्तिगत पदक के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय ओलंपिक समिति के लिए प्रवेश अधिकार होता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- एशियाई खेल एशिया के देशों का बहु-खेल आयोजन है, जिसका संचालन ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया करती है।
- रिकर्व तीरंदाजी ओलंपिक कार्यक्रम की दो प्रमुख तीरंदाजी शैलियों में से एक है।
- शूट-ऑफ में बराबरी होने पर लक्ष्य के केंद्र के सबसे करीब तीर को भी निर्णायक माना जा सकता है।
- दक्षिण कोरिया अंतरराष्ट्रीय रिकर्व तीरंदाजी में लंबे समय से मजबूत देश माना जाता है।
कुमकुम मोहोद की यह उपलब्धि भारतीय तीरंदाजी में नई पीढ़ी के उभार को दिखाती है। कम उम्र में बड़े मंच पर मिला यह स्वर्ण भारत के लिए आत्मविश्वास बढ़ाने वाली और भविष्य की संभावनाओं को मजबूत करने वाली जीत है।