कर्नाटक में 12वीं शताब्दी का वीरगल्लु मिला
कर्नाटक के मंड्या जिले के नागमंगला तालुक के मणियूर गांव में 21 मई 2026 को 12वीं शताब्दी का एक वीरगल्लु खोजा गया है। यह स्मारक पत्थर होयसला शासक विष्णुवर्धन के शासनकाल से जुड़ा माना जा रहा है। वीरगल्लु दक्षिण भारत में पाए जाने वाले ऐसे स्मारक पत्थर हैं, जिन्हें युद्ध, पशु रक्षा या वीरता के अन्य कार्यों में जान गंवाने वाले लोगों की स्मृति में स्थापित किया जाता था। यह खोज मध्यकालीन दक्षिण भारतीय इतिहास और कन्नड़ अभिलेखों के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
वीरगल्लु की परंपरा और महत्व
वीरगल्लु कन्नड़ भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ वीर स्मारक पत्थर होता है। इन्हें उन योद्धाओं की याद में स्थापित किया जाता था जिन्होंने युद्ध, सीमा संघर्ष, पशुधन रक्षा या सामाजिक सुरक्षा के दौरान बलिदान दिया हो। ऐसे स्मारक कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कई हिस्सों में पाए जाते हैं। इनमें से अधिकांश वीरगल्लु होयसला, यादव और विजयनगर काल से संबंधित हैं। इन पत्थरों पर बनी आकृतियां और अभिलेख उस समय के युद्ध, प्रशासन, कर व्यवस्था और सामाजिक परंपराओं की जानकारी देते हैं।
होयसला साम्राज्य और विष्णुवर्धन
होयसला साम्राज्य ने 10वीं से 14वीं शताब्दी के बीच वर्तमान कर्नाटक के बड़े हिस्से पर शासन किया। विष्णुवर्धन 12वीं शताब्दी के प्रसिद्ध होयसला शासक थे। उनके शासनकाल में कला, स्थापत्य और साहित्य का व्यापक विकास हुआ। इस काल के अभिलेख प्रायः मध्यकालीन कन्नड़ लिपि और भाषा में लिखे गए मिलते हैं। बेलूर और हालेबीडु जैसे स्थल होयसला स्थापत्य कला के प्रमुख केंद्र माने जाते हैं।
हाल के वर्षों में हुई अन्य खोजें
कर्नाटक में हाल के वर्षों में कई महत्वपूर्ण वीरगल्लु खोजे गए हैं। अप्रैल 2026 में हासन जिले के बेलूर के पास 12वीं शताब्दी का एक दुर्लभ वीरगल्लु मिला था। उसमें मध्यकालीन कन्नड़ अभिलेख था, जिसमें होयसला और देवगिरि के सेउना यादवों के बीच सीमा संघर्ष का उल्लेख किया गया था। नवंबर 2024 में दावणगेरे जिले में यादव काल का एक वीरगल्लु मिला था, जिसमें महा सती दृश्य दर्शाया गया था। इसमें एक वीरनारी अपने शहीद पति के साथ चिता पर बैठी दिखाई गई थी। इसी प्रकार जनवरी 2023 में मंड्या जिले के चाकाशेट्टीहल्ली में 13वीं शताब्दी का होयसला वीरगल्लु मिला था। एक अन्य वीरगल्लु में पति-पत्नी द्वारा साथ आत्मबलिदान करने का चित्रण भी पाया गया था।
पुरातात्विक और ऐतिहासिक महत्व
कर्नाटक के वीरगल्लु मध्यकालीन दक्षिण भारत के सामाजिक और राजनीतिक इतिहास को समझने में महत्वपूर्ण स्रोत माने जाते हैं। इनसे युद्ध, पशुधन संघर्ष, स्थानीय प्रशासन और स्मृति परंपराओं की जानकारी मिलती है। हम्पी कन्नड़ विश्वविद्यालय और क्लासिकल कन्नड़ अध्ययन केंद्र जैसी संस्थाएं इन अभिलेखों और स्मारकों के अध्ययन से जुड़ी हुई हैं। ऐसे खोजे गए पत्थर इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के लिए मूल्यवान दस्तावेज का कार्य करते हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
” वीरगल्लु कन्नड़ भाषा का शब्द है, जिसका उपयोग वीर स्मारक पत्थरों के लिए किया जाता है। ” बेलूर कर्नाटक के हासन जिले में स्थित प्रमुख होयसला विरासत स्थल है। ” देवगिरि सेउना या यादव वंश की राजधानी के रूप में प्रसिद्ध था। ” मध्यकालीन कन्नड़ अभिलेख राजनीतिक, सामाजिक और भूमि इतिहास के महत्वपूर्ण स्रोत माने जाते हैं। मणियूर गांव में मिला यह वीरगल्लु केवल एक पुरातात्विक खोज नहीं, बल्कि दक्षिण भारत की मध्यकालीन वीरता, संस्कृति और सामाजिक परंपराओं का जीवंत प्रमाण है। ऐसी खोजें भारतीय इतिहास की गहराई को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।