कंटेनर निर्माण में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगी ₹10,000 करोड़ की योजना

कंटेनर निर्माण में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगी ₹10,000 करोड़ की योजना

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 28 अक्टूबर 2026 को कंटेनर निर्माण प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी। ₹10,000 करोड़ के कुल परिव्यय वाली यह योजना वित्त वर्ष 2039–40 तक जारी रहेगी। इसका उद्देश्य भारत में शिपिंग कंटेनर बनाने की क्षमता बढ़ाना, आयात पर निर्भरता घटाना और आपूर्ति शृंखलाओं को अधिक मजबूत बनाना है। इस योजना की घोषणा केंद्रीय बजट 2026–27 में की गई थी।

घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर जोर

शिपिंग कंटेनर ऐसा पुनः उपयोग योग्य मालवाहक पात्र है, जिसका इस्तेमाल जहाज, रेल और सड़क जैसे परिवहन माध्यमों के बीच माल ले जाने में किया जाता है। अलग-अलग माध्यमों पर एक ही कंटेनर का उपयोग होने से माल की आवाजाही आपस में जुड़ी परिवहन व्यवस्था के अनुरूप हो सकती है। कंटेनरों की पर्याप्त उपलब्धता समुद्री माल परिवहन और आपूर्ति शृंखला के सुचारु संचालन के लिए महत्वपूर्ण है।

योजना का लक्ष्य भारत की सालाना कंटेनर निर्माण क्षमता को लगभग दस गुना बढ़ाकर 7.5 लाख टीईयू तक पहुंचाना है। टीईयू कंटेनर क्षमता मापने की मानक इकाई है। एक 20 फुट का कंटेनर एक टीईयू के बराबर होता है, जबकि 40 फुट का कंटेनर दो टीईयू माना जाता है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, दुनिया में कंटेनर उत्पादन का 95 प्रतिशत एक ही देश में केंद्रित है। ऐसे में घरेलू निर्माण क्षमता बढ़ाना आयात निर्भरता कम करने और आपूर्ति में लचीलापन लाने की दिशा में अहम कदम है।

निर्माताओं और सहायक उद्योगों को सहायता

योजना में तीन सहायता घटक रखे गए हैं। ब्याज सहायता के लिए ₹859 करोड़, परिचालन व्यय सहायता के लिए ₹8,891 करोड़ और परीक्षण एवं प्रमाणन सहायता के लिए ₹150 करोड़ निर्धारित हैं। पात्र सावधि ऋण लेकर नई इकाई स्थापित करने या मौजूदा सुविधा का विस्तार करने वाले उद्यमों को ब्याज पर सालाना 3 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी। परिचालन व्यय सहायता वैश्विक जहाजरानी मानकों के अनुरूप बनाए गए कंटेनरों के उत्पादन से जुड़ी है।

कंटेनर निर्माण के लिए विशेष इस्पात, कोने की ढलाई, लकड़ी के ढांचे और रंग जैसे सहायक उत्पादों की जरूरत होती है। योजना इनसे जुड़े सहायक उद्योगों को भी समर्थन देने का प्रयास करती है। परीक्षण और प्रमाणन सहायता से यह जांचने में मदद मिल सकती है कि तैयार कंटेनर लागू निर्माण तथा जहाजरानी आवश्यकताओं के अनुरूप हैं या नहीं। सरकार के अनुमान के अनुसार, योजना से 3,000 प्रत्यक्ष और 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा हो सकते हैं।

वैश्विक मानकों और आपूर्ति शृंखला का महत्व

कंटेनरों के आकार और भार क्षमता के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक तय हैं, ताकि वे परिवहन नेटवर्क में इस्तेमाल किए जा सकें। घरेलू स्तर पर निर्माण बढ़ाने के साथ मानकों के अनुरूप उत्पादन और प्रमाणन भी जरूरी होगा। योजना में परीक्षण एवं प्रमाणन के लिए अलग सहायता राशि इसी जरूरत को संबोधित करती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • एक टीईयू, 20 फुट लंबे मानक कंटेनर की क्षमता के बराबर है।
  • 40 फुट लंबा कंटेनर दो टीईयू के बराबर होता है।
  • योजना पात्र सावधि ऋण पर सालाना 3 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी देती है।
  • योजना का लक्ष्य सालाना 7.5 लाख टीईयू की घरेलू निर्माण क्षमता हासिल करना है।

कंटेनर निर्माण को देश में विस्तार देने से आयात पर निर्भरता घटाने और समुद्री आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। योजना का असर इसके तहत स्थापित क्षमता और मानक-अनुरूप उत्पादन के विस्तार पर निर्भर करेगा।

Originally written on October 29, 2026 and last modified on October 29, 2026.

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