ओडिशा की खदान परियोजना से संकट में दुर्लभ छिपकली का आवास
ओडिशा के कोरापुट जिले की बाल्दा पहाड़ियों में प्रस्तावित बॉक्साइट खदान से संकटग्रस्त जेपोर ग्राउंड गेको के बचे हुए ज्ञात आवास पर दबाव बढ़ सकता है। कलिंगा एल्यूमिना लिमिटेड की यह खुली खदान नागेश्वरी आरक्षित वन के 147 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित है। अक्टूबर 2026 तक बीते एक वर्ष में इस इलाके में इस प्रजाति के केवल चार जीव दर्ज किए गए।
130 साल बाद फिर मिली थी प्रजाति
जेपोर ग्राउंड गेको का वैज्ञानिक नाम Cyrtodactylus jeyporensis है। यह ओडिशा की स्थानीय प्रजाति है और पूर्वी घाट के चट्टानी आवासों से जुड़ी हुई है। इसे लगभग 130 वर्षों तक विलुप्त माना गया था। भारतीय वैज्ञानिक ईशान अग्रवाल और अनिरुद्ध दत्ता-रॉय ने वर्ष 2010 में इसे फिर खोजा।
गेको सरीसृपों का एक समूह है। कई गेको प्रजातियां रात में सक्रिय रहती हैं और उनके पंजों के विशेष पैड उन्हें सतहों पर चढ़ने में मदद करते हैं। जेपोर ग्राउंड गेको का ज्ञात आवास पहले से ही भूमि उपयोग में बदलावों से प्रभावित रहा है। कॉफी बागान, जलविद्युत परियोजनाएं और खनन इसके आवास पर दबाव के प्रमुख उदाहरण हैं।
बाल्दा पहाड़ियों में खनन से बढ़ेगा आवास पर दबाव
प्रस्तावित परियोजना कोरापुट जिले की बाल्दा पहाड़ियों में है, जहां यह गेको पाया जाता है। बॉक्साइट से एल्युमिना बनाया जाता है और एल्युमिना को आगे संसाधित कर एल्युमिनियम तैयार किया जाता है। खनन से चट्टानी भूभाग और उससे जुड़े आवास में बदलाव हो सकता है। इसी कारण प्रस्तावित परियोजना को इस सीमित क्षेत्र में रहने वाली प्रजाति के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है।
ओडिशा के पोटांगी में गेको का एक पुराना आवास बॉक्साइट खनन के कारण नष्ट हो चुका है। वह खदान नाल्को की थी और इस स्थल पर प्रजाति अब विलुप्त मानी जाती है। बोंडा और पोरजा आदिवासी समुदाय दो वर्षों से प्रस्तावित खदान का विरोध कर रहे हैं। वे इस क्षेत्र को अपनी पुश्तैनी भूमि बताते हैं।
कानूनी संरक्षण और संरक्षण की स्थिति
अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ ने जेपोर ग्राउंड गेको को संकटग्रस्त श्रेणी में रखा है। यह प्रजाति वन्य जीवों और वनस्पतियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर नियमन करने वाले सीआईटीईएस के परिशिष्ट II में 18 जुलाई 2026 से शामिल है। भारत में इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची I के तहत संरक्षण प्राप्त है। यह कानून संरक्षित वन्यजीवों और उनके आवास को प्रभावित करने वाली गतिविधियों के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- जेपोर ग्राउंड गेको का वैज्ञानिक नाम Cyrtodactylus jeyporensis है।
- ईशान अग्रवाल और अनिरुद्ध दत्ता-रॉय ने वर्ष 2010 में इस प्रजाति को फिर खोजा था।
- यह प्रजाति आईयूसीएन की संकटग्रस्त श्रेणी में और सीआईटीईएस के परिशिष्ट II में शामिल है।
- भारत में इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची I के तहत संरक्षण मिला है।
बाल्दा पहाड़ियों में खनन का निर्णय केवल खनिज संसाधनों के उपयोग से जुड़ा मामला नहीं है; इसका असर एक दुर्लभ प्रजाति के सीमित आवास और स्थानीय समुदायों की भूमि पर भी पड़ सकता है।