ऑनलाइन छूट और सर्च रैंकिंग पर सरकार की सख्ती
केंद्र सरकार ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर उपभोक्ताओं को दिखने वाली छूट, सर्च परिणामों और स्पॉन्सर्ड लिस्टिंग को लेकर नियम और कड़े कर दिए हैं। उपभोक्ता मामलों के विभाग ने 10 सितंबर 2026 को Consumer Protection (E-Commerce) (Amendment) Rules, 2026 अधिसूचित किए, जो 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे। इन संशोधनों का मकसद ऑनलाइन खरीदारी में पारदर्शिता बढ़ाना और उपभोक्ताओं को भ्रामक कीमतों या रैंकिंग से बचाना है।
छूट दिखाने पर अब पुरानी कीमत भी बतानी होगी
नए नियमों के तहत यदि कोई प्लेटफॉर्म किसी उत्पाद पर छूट दिखाता है, तो उसे “prior price” यानी पिछली कीमत भी स्पष्ट रूप से दिखानी होगी। यह पिछली कीमत उस न्यूनतम मूल्य को माना जाएगा, जिस पर वस्तु पिछले 30 दिनों के दौरान उपलब्ध रही हो। इससे उन मामलों पर रोक लगाने की कोशिश की गई है, जहां पहले कीमत बढ़ाकर फिर बड़ी छूट दिखाकर उपभोक्ता को आकर्षित किया जाता है।
यह प्रावधान उन ऑनलाइन लिस्टिंग पर लागू होगा, जिनमें कम कीमत दिखाकर खरीदारी का निर्णय प्रभावित किया जाता है। सरकार का मानना है कि कीमतों की सही तुलना तभी संभव है जब उपभोक्ता को वास्तविक संदर्भ मूल्य भी दिखाई दे।
सर्च रिजल्ट और स्पॉन्सर्ड लिस्टिंग पर निगरानी
संशोधित नियमों में सर्च परिणामों के साथ छेड़छाड़ को भी प्रतिबंधित किया गया है। कोई भी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ऐसे सर्च रिजल्ट नहीं दिखा सकेगा, जो उपभोक्ता के प्रश्न की सीधी प्रासंगिकता को कम करें या उसे भ्रमित करें।
इसके साथ ही, भुगतान किए गए या स्पॉन्सर्ड लिस्टिंग को स्पष्ट और प्रमुख रूप से लेबल करना अनिवार्य होगा, ताकि वे सामान्य या ऑर्गेनिक सर्च परिणामों से अलग पहचाने जा सकें। यह कदम डिजिटल मार्केटप्लेस में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और उपभोक्ता की सूचित पसंद को मजबूत करने के लिए अहम माना जा रहा है।
कंप्लायंस, सहमति और शिकायत निवारण पर जोर
नए ढांचे में ई-कॉमर्स संस्थाओं को 2023 के डार्क पैटर्न दिशानिर्देशों का पालन करना होगा। उन्हें हर साल स्वयं ऑडिट करना होगा और अनुपालन प्रमाणपत्र को प्रमुखता से प्रदर्शित करना होगा। साथ ही, उपभोक्ता की जानकारी का उपयोग स्पष्ट सहमति के बिना नहीं किया जा सकेगा।
नियमों में 1 जनवरी 2027 से अनावश्यक या असंबंधित सेवाओं के लिए bundled fees लगाने पर भी रोक होगी। उपभोक्ता शिकायतों के संदर्भ में यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन को 2025 में 17,71,622 शिकायतें मिली थीं, जिनमें 5,11,196 शिकायतें यानी 29% ई-कॉमर्स क्षेत्र से जुड़ी थीं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- उपभोक्ता संरक्षण नियमों का कानूनी आधार Consumer Protection Act, 2019 है।
- डार्क पैटर्न ऐसे भ्रामक डिजिटल डिजाइन होते हैं, जो उपभोक्ता के निर्णय को प्रभावित करने के लिए बनाए जाते हैं।
- ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म होते हैं जो खरीदार और विक्रेता को जोड़ते हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि वे खुद सामान के मालिक हों।
- National Consumer Helpline भारत में उपभोक्ता शिकायतों के लिए एक प्रमुख शिकायत निवारण मंच है।
इन संशोधनों से ऑनलाइन खरीदारी में कीमत, रैंकिंग और विज्ञापन से जुड़ी पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है। उपभोक्ताओं के लिए यह बदलाव बेहतर तुलना, स्पष्ट जानकारी और अधिक सुरक्षित डिजिटल खरीदारी अनुभव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।