एशियन गेम्स में गणेश मणि रत्नम का कांस्य, भारत की कंपाउंड तीरंदाजी चमकी

एशियन गेम्स में गणेश मणि रत्नम का कांस्य, भारत की कंपाउंड तीरंदाजी चमकी

भारतीय तीरंदाज गणेश मणि रत्नम थिरुमुरु ने एशियन गेम्स 2026 में पुरुष व्यक्तिगत कंपाउंड तीरंदाजी का कांस्य पदक जीतकर भारत की पदक सूची में एक और उपलब्धि जोड़ दी। 1 अक्टूबर 2026 को जापान के आइची स्थित ओकाज़ाकी चुओ सोगो पार्क मल्टीपर्पस स्क्वायर में खेले गए मुकाबले में उन्होंने वियतनाम के कोंग डुक डांग को 149-144 से हराया।

कांस्य पदक मुकाबले में सटीक निशानेबाजी

गणेश मणि रत्नम ने कांस्य पदक मैच में 150 में से 149 अंक हासिल किए, जो उनके प्रदर्शन की मजबूती दिखाता है। क्वार्टर फाइनल में उन्होंने चीनी ताइपे के चेन चिएह-लुन को 148-138 से हराया था, जबकि सेमीफाइनल में उन्हें दक्षिण कोरिया के किम जोंघो के खिलाफ 144-148 से हार मिली। इसके बाद उन्होंने कांस्य मुकाबले में शानदार वापसी करते हुए पदक अपने नाम किया।

भारत के लिए दूसरा पदक, टीम स्पर्धा में पहले ही मिला था स्वर्ण

यह गणेश मणि रत्नम का एशियन गेम्स 2026 में दूसरा पदक था। इससे एक दिन पहले, 30 सितंबर 2026 को, उन्होंने साहिल जाधव और कुशाल दलाल के साथ पुरुष कंपाउंड टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था। फाइनल में भारत ने चीन को बेहद करीबी मुकाबले में 238-237 से हराया था।

कंपाउंड तीरंदाजी क्यों अलग मानी जाती है

कंपाउंड तीरंदाजी, रिकर्व तीरंदाजी से अलग होती है। इसमें पुली और केबल वाली कंपाउंड बो का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे निशाना अधिक स्थिर और सटीक माना जाता है। यह स्पर्धा कई बड़े बहु-खेल आयोजनों में शामिल रहती है, हालांकि ओलंपिक खेलों में तीरंदाजी का जो प्रारूप होता है, वह रिकर्व है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • एशियन गेम्स एशिया का प्रमुख बहु-खेल आयोजन है, जिसे ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया आयोजित करता है।
  • कंपाउंड तीरंदाजी में पुली और केबल वाली विशेष बो का उपयोग होता है।
  • रिकर्व तीरंदाजी ओलंपिक खेलों में शामिल प्रारूप है, जबकि कंपाउंड तीरंदाजी अलग स्पर्धा मानी जाती है।
  • ओकाज़ाकी चुओ सोगो पार्क मल्टीपर्पस स्क्वायर जापान के आइची प्रांत में स्थित एक प्रतियोगिता स्थल है।

भारत ने एशियन गेम्स 2026 में कंपाउंड तीरंदाजी अभियान का समापन चार पदकों के साथ किया, जिनमें तीन स्वर्ण और एक कांस्य शामिल रहा। गणेश मणि रत्नम का यह प्रदर्शन भारत की तीरंदाजी में गहराई और निरंतरता को दर्शाता है।

Originally written on October 1, 2026 and last modified on October 1, 2026.

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