एशियन गेम्स बॉक्सिंग में भारत के तीन मुक्केबाजों ने पक्का किया पदक

एशियन गेम्स बॉक्सिंग में भारत के तीन मुक्केबाजों ने पक्का किया पदक

जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन गेम्स 2026 में भारतीय मुक्केबाजी दल के लिए 27 सितंबर का दिन बेहद सफल रहा। अंकुश पंघाल, परवीन हुड्डा और नरेंद्र बेरवाल ने अपने-अपने क्वार्टर फाइनल जीतकर सेमीफाइनल में जगह बना ली। एशियन गेम्स की बॉक्सिंग स्पर्धा में सेमीफाइनल तक पहुंचना ही पदक की गारंटी माना जाता है, क्योंकि यहां हारने वाले दोनों सेमीफाइनलिस्टों को कांस्य पदक मिलता है।

अंकुश, परवीन और नरेंद्र ने दिखाया दम

पुरुषों के 80 किग्रा वर्ग में अंकुश पंघाल ने ताजिकिस्तान के नेक्रुज सलीमोव को 5-0 के सर्वसम्मत फैसले से हराया। महिला 65 किग्रा वर्ग में परवीन हुड्डा ने उज्बेकिस्तान की नवबखोर खामिदोवा को भी 5-0 से मात दी। वहीं पुरुषों के +90 किग्रा वर्ग में नरेंद्र बेरवाल ने थाईलैंड के अधथापोंग सैंगटेप के खिलाफ बेहद तेज जीत दर्ज की। रेफरी ने मुकाबला दो मिनट से भी कम समय में रोक दिया, जिसे RSC यानी रेफरी स्टॉप्स कॉन्टेस्ट कहा जाता है।

क्वार्टर फाइनल जीत का मतलब सीधे पदक

एशियन गेम्स में बॉक्सिंग का प्रारूप नॉकआउट आधारित होता है। इसका अर्थ है कि क्वार्टर फाइनल जीतने वाला खिलाड़ी सीधे सेमीफाइनल में पहुंचता है और फिर कम से कम कांस्य पदक पक्का कर लेता है। यहां कांस्य पदक के लिए अलग मुकाबला नहीं होता। यही वजह है कि सेमीफाइनल में पहुंचना किसी भी मुक्केबाज के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।

परवीन हुड्डा की जीत इसलिए भी अहम रही क्योंकि उन्होंने क्वार्टर फाइनल में विश्व चैंपियनशिप की रजत पदक विजेता को हराया। दूसरी ओर, नरेंद्र बेरवाल ने लगातार दूसरी बार एशियन गेम्स पदक सुनिश्चित किया है, जो उनके अनुभव और निरंतरता को दिखाता है।

अन्य भारतीय प्रदर्शन और मुकाबलों की अहमियत

इसी दिन सचिन सिवाच पुरुषों के 60 किग्रा वर्ग में जापान के शुन्सुके किटामोटो से 0-5 से हारकर प्रतियोगिता से बाहर हो गए। अंकुश पंघाल ने अपने मुकाबले के शुरुआती दो राउंड भी निर्णायक अंदाज में जीते थे, जिससे उनकी बढ़त पहले से ही मजबूत दिख रही थी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • एशियन गेम्स की बॉक्सिंग स्पर्धा में सेमीफाइनल में पहुंचते ही पदक पक्का हो जाता है।
  • यहां हर भार वर्ग में दो कांस्य पदक दिए जाते हैं।
  • RSC का अर्थ है रेफरी स्टॉप्स कॉन्टेस्ट, जब सुरक्षा या एकतरफा बढ़त के कारण मुकाबला रोका जाता है।
  • सर्वसम्मत निर्णय का मतलब है कि सभी जजों ने एक ही मुक्केबाज के पक्ष में स्कोर दिया।

इन नतीजों ने भारतीय मुक्केबाजी की पदक उम्मीदों को और मजबूत कर दिया है। अब नजरें सेमीफाइनल मुकाबलों पर होंगी, जहां भारत के ये तीनों मुक्केबाज पदक को रंग बदलने की कोशिश करेंगे।

Originally written on September 28, 2026 and last modified on September 28, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *