एलएसी पर आईटीबीपी की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत

एलएसी पर आईटीबीपी की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत

भारत-चीन सीमा पर निगरानी और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) ड्रोन क्षमता, जवानों के प्रशिक्षण और सीमा चौकियों के विस्तार पर जोर दे रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बल के आधुनिकीकरण के लिए लगभग 4,000 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है। इसमें ड्रोन और ड्रोन-रोधी प्रणालियों के लिए 1,000 करोड़ रुपये शामिल हैं।

एलएसी की भौगोलिक और सुरक्षा चुनौती

वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) भारत और चीन के नियंत्रण वाले क्षेत्रों को अलग करती है, लेकिन इसका पूरा संरेखण दोनों देशों के बीच पारस्परिक रूप से निर्धारित नहीं है। इसे सामान्यतः तीन क्षेत्रों में बांटा जाता है—लद्दाख में पश्चिमी क्षेत्र, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में मध्य क्षेत्र तथा सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में पूर्वी क्षेत्र।

आईटीबीपी की सीमा चौकियां समुद्र तल से लगभग 9,000 से 18,750 फीट की ऊंचाई पर स्थित हैं। कठिन भूभाग और ऊंचाई के कारण वहां निगरानी, संचार और जवानों की तैनाती बड़ी चुनौती है। ऐसे में ड्रोन का उपयोग दुर्गम इलाकों पर नजर रखने और सीमा सुरक्षा से जुड़ी जरूरतों में सहायता दे सकता है।

ड्रोन, विशेष प्रशिक्षण और कमांडो

आईटीबीपी ने अपनी सभी सीमा इकाइयों में ड्रोन प्लाटून गठित की हैं। जवानों को ड्रोन चलाने के साथ उनसे जुड़ी तकनीक विकसित करने का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। ड्रोन क्षमता के उन्नयन के लिए 400 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिसमें लगभग 70 प्रतिशत राशि ड्रोन युद्ध से जुड़ी क्षमताओं पर केंद्रित है।

बल ने प्रत्येक सीमा बटालियन में तैनाती के लिए शौर्य कमांडो तैयार किए हैं। इसके अलावा, जवानों को जून 2020 की गलवान घाटी जैसी परिस्थितियों में मुकाबले के लिए तैयार करने हेतु ‘स्ट्राइक’ प्रशिक्षण पाठ्यक्रम शुरू किया गया है। 23 अक्टूबर 2026 को आईटीबीपी के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने ड्रोन युद्ध को आवश्यक बताते हुए रूस-यूक्रेन युद्ध का उल्लेख किया।

सीमा चौकियों और सुरक्षित ठिकानों का विस्तार

वर्ष 2022 से 2024 के बीच भारत-चीन सीमा पर 29 नई सीमा चौकियां जोड़ी गईं, जिससे इनकी कुल संख्या 209 हो गई। ये चौकियां एलएसी के पश्चिमी, मध्य और पूर्वी क्षेत्रों में हैं। जनवरी 2025 में तत्कालीन महानिदेशक राहुल रसगोत्रा ने बताया था कि आगे की तैनाती योजना के तहत निर्धारित 56 में से 33 चौकियों को अग्रिम क्षेत्रों के करीब स्थानांतरित किया गया है।

आईटीबीपी सीमा के पास भूमिगत आश्रयों का निर्माण भी बढ़ा रही है। इनका उद्देश्य ऐसे मजबूत ठिकाने उपलब्ध कराना है, जो हवाई बमबारी के प्रभाव से अपेक्षाकृत कम प्रभावित हों। ड्रोन, अग्रिम चौकियों और सुरक्षित आश्रयों पर एक साथ काम करना सीमा पर निगरानी और सुरक्षा के अलग-अलग पहलुओं को संबोधित करता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • आईटीबीपी का गठन 24 अक्टूबर 1962 को हुआ था और यह केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करती है।
  • आईटीबीपी भारत-चीन सीमा की प्रमुख सुरक्षा जिम्मेदारी निभाती है।
  • एलएसी के तीन क्षेत्र पश्चिमी, मध्य और पूर्वी क्षेत्र कहलाते हैं।
  • गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच झड़प जून 2020 में हुई थी।

ड्रोन तकनीक और बेहतर सीमा अवसंरचना से ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में आईटीबीपी की निगरानी तथा त्वरित तैनाती क्षमता को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।

Originally written on October 23, 2026 and last modified on October 23, 2026.

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