एलएंडटी की नई SiC चिप प्लेटफॉर्म पहल से पावर इलेक्ट्रॉनिक्स को रफ्तार
लार्सन एंड टुब्रो की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी एलएंडटी सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजीज ने सेमिकॉन इंडिया 2026 में अपना पहला सिलिकॉन कार्बाइड (SiC) प्रोडक्ट प्लेटफॉर्म पेश किया। इस प्लेटफॉर्म के तहत 1200V SiC MOSFET शामिल है, जिसे पावर कन्वर्ज़न जैसे उच्च-क्षमता वाले अनुप्रयोगों के लिए तैयार किया गया है। कंपनी ने इसी आयोजन में 40 नए उत्पाद भी पेश किए, जिससे साफ संकेत मिलता है कि वह डिजाइन से आगे बढ़कर व्यावसायिक उत्पादन की दिशा में तेजी से काम कर रही है।
सिलिकॉन कार्बाइड क्यों अहम है
सिलिकॉन कार्बाइड एक वाइड-बैंडगैप सेमीकंडक्टर सामग्री है, जो उच्च वोल्टेज और उच्च तापमान वाले पावर डिवाइसों में उपयोग की जाती है। पारंपरिक सिलिकॉन की तुलना में SiC आधारित उपकरण अधिक दक्षता से ऊर्जा का रूपांतरण कर सकते हैं, इसलिए इनकी मांग इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों और औद्योगिक पावर इलेक्ट्रॉनिक्स में बढ़ रही है।
SiC MOSFET का उपयोग खास तौर पर EV फास्ट चार्जर, माइक्रोग्रिड, सॉलिड-स्टेट ट्रांसफॉर्मर और ट्रैक्शन इन्वर्टर जैसे क्षेत्रों में होता है। इन अनुप्रयोगों में ऊर्जा हानि कम करना, तापीय प्रदर्शन बेहतर रखना और सिस्टम को अधिक कॉम्पैक्ट बनाना महत्वपूर्ण होता है।
कंपनी की प्रगति और कारोबारी रणनीति
एलटीएससीटी ने अपने शुरुआती 18 महीनों में 15 से 20 ग्राहकों को जोड़ा है। यह संकेत देता है कि कंपनी केवल उत्पाद विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि बाजार में अपनी जगह बनाने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2031 तक 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर का वार्षिक राजस्व लक्ष्य रखा है, जिसमें 70% से 80% आय निर्यात बाजारों से आने की उम्मीद है।
यह रणनीति भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि घरेलू कंपनियां अब केवल असेंबली या डिजाइन तक सीमित नहीं रहकर उन्नत पावर सेमीकंडक्टर सेगमेंट में प्रवेश कर रही हैं।
साझेदारी, अधिग्रहण और निवेश का महत्व
कंपनी ने 27 अक्टूबर 2025 को ताइवान की होन यंग सेमीकंडक्टर कंपनी लिमिटेड, जो फॉक्सकॉन टेक्नोलॉजी ग्रुप की इकाई है, के साथ साझेदारी की थी। इस साझेदारी का उद्देश्य 650V से 3,300V रेंज में हाई-वोल्टेज सिलिकॉन कार्बाइड और सिलिकॉन वेफर विकसित और निर्मित करना है। इससे उच्च-शक्ति वाले औद्योगिक और ऊर्जा अनुप्रयोगों के लिए आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होने की संभावना है।
इसके अलावा, एलटीएससीटी ने जुलाई 2024 में बेंगलुरु स्थित सेमीकंडक्टर आईपी कंपनी सिलीकोंच सिस्टम्स का अधिग्रहण किया था, जिसे 24 मार्च 2026 को एलटीएससीटी में मिला दिया गया। वित्त वर्ष 2026 में लार्सन एंड टुब्रो ने अपनी सेमीकंडक्टर इकाई में 541.97 करोड़ रुपये का निवेश किया, जिससे कुल निवेश 859 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- सिलिकॉन कार्बाइड एक compound semiconductor है, जो सिलिकॉन और कार्बन से बनता है।
- SiC डिवाइस उच्च वोल्टेज और उच्च तापमान वाले पावर अनुप्रयोगों में उपयोग किए जाते हैं।
- SEMICON India भारत का एक प्रमुख सेमीकंडक्टर उद्योग आयोजन है।
- BLDC का अर्थ brushless direct current motor होता है, जिसका उपयोग ऊर्जा-कुशल उपकरणों में किया जाता है।
कुल मिलाकर, एलएंडटी की यह पहल भारत में उन्नत पावर सेमीकंडक्टर निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ऊर्जा अवसंरचना और औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए नई संभावनाएं बन सकती हैं।