ई-संजीवनी ने रचा नया रिकॉर्ड, टेलीमेडिसिन की पहुंच और मजबूत हुई

ई-संजीवनी ने रचा नया रिकॉर्ड, टेलीमेडिसिन की पहुंच और मजबूत हुई

भारत की राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा ई-संजीवनी ने 15 सितंबर 2026 को 50 करोड़ टेलीपरामर्श का आंकड़ा पार कर लिया। 6 अक्टूबर 2026 तक इस मंच पर कुल 50,00,92,730 टेलीपरामर्श दर्ज किए जा चुके थे। यह उपलब्धि दिखाती है कि डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं अब देश के दूर-दराज़ इलाकों तक नियमित चिकित्सा पहुंचाने का अहम माध्यम बन चुकी हैं।

देशभर में फैला डिजिटल स्वास्थ्य नेटवर्क

ई-संजीवनी का ढांचा बड़े पैमाने पर तैयार किया गया है। यह 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में काम कर रही है और इसके तहत 1.42 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्पोक, 19,473 मेडिकल हब और 901 ऑनलाइन ओपीडी जुड़े हुए हैं। 6 अक्टूबर 2026 तक इस मंच पर 2,41,923 पंजीकृत स्वास्थ्यकर्मी भी उपलब्ध थे।

इस संरचना का उद्देश्य यह है कि मरीज अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श ले सकें, जिससे यात्रा, समय और खर्च तीनों की बचत होती है।

कई भाषाओं में सेवा, रोजाना लाखों परामर्श

ई-संजीवनी 15 भाषाओं में उपलब्ध है, जिनमें अंग्रेजी के साथ 14 भारतीय भाषाएं शामिल हैं। इससे अलग-अलग क्षेत्रों के लोग अपनी भाषा में स्वास्थ्य सलाह प्राप्त कर सकते हैं। मंच पर रोजाना लगभग 2.5 से 3 लाख परामर्श होते हैं, जबकि एक दिन में इसका सर्वोच्च उपयोग 6,30,315 परामर्श तक पहुंच चुका है।

यह आंकड़ा बताता है कि टेलीमेडिसिन अब केवल वैकल्पिक सुविधा नहीं, बल्कि प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनती जा रही है। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों तक पहुंच सीमित होती है, वहां यह सेवा खास तौर पर उपयोगी साबित हो रही है।

महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों की बड़ी भागीदारी

उपयोग के पैटर्न पर नजर डालें तो महिलाओं की हिस्सेदारी 57.14% है। 46 वर्ष और उससे अधिक आयु के नागरिक कुल परामर्शों का 40.15% हिस्सा हैं, जबकि 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक 16.25% परामर्श लेते हैं। इससे स्पष्ट है कि यह मंच उन वर्गों के लिए खास महत्व रखता है जिन्हें नियमित चिकित्सा सलाह की अधिक जरूरत होती है।

ई-संजीवनी को इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम-112 से भी जोड़ा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर आपात सेवाओं से संपर्क आसान हो सके। साथ ही, इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम भी इस्तेमाल किया जा रहा है, जो स्वास्थ्यकर्मियों को निर्णय लेने में मदद करता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • ई-संजीवनी भारत की राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा है और यह सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के तहत काम करती है।
  • आयुष्मान आरोग्य मंदिर, भारत में कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए इस्तेमाल होने वाला वर्तमान नाम है।
  • इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम-112 देश की एकीकृत आपातकालीन हेल्पलाइन प्रणाली है।
  • एआईएमएस जोधपुर, एआईएमएस जम्मू और एआईएमएस पटना में चुनिंदा विशेषज्ञताओं के लिए मरीज-से-डॉक्टर टेलीपरामर्श शुरू किए गए हैं।

कुल मिलाकर, ई-संजीवनी का 50 करोड़ टेलीपरामर्श तक पहुंचना भारत में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और उनकी स्वीकार्यता का बड़ा संकेत है। आने वाले समय में प्रमुख सरकारी संस्थानों तक इसका विस्तार टेलीमेडिसिन को और व्यापक बना सकता है।

Originally written on October 6, 2026 and last modified on October 6, 2026.

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