ई-कॉमर्स डिलीवरी पर जीएसटी घटकर 5%, लागू होने से पहले बदलाव की मांग
ई-कॉमर्स मंचों के माध्यम से बेची गई वस्तुओं की डिलीवरी सेवा पर जीएसटी की दर 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने की व्यवस्था 1 नवंबर 2026 से लागू होने वाली है। इस दर पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ नहीं मिलेगा। नई व्यवस्था के तकनीकी और अनुपालन संबंधी प्रभावों को देखते हुए उद्योग संगठन नैसकॉम ने सरकार से इसे लागू करने की तारीख आगे बढ़ाने का अनुरोध किया है।
नई दर और कर भुगतान की जिम्मेदारी
जीएसटी परिषद ने 8 अक्टूबर 2026 को हुई अपनी 57वीं बैठक में इलेक्ट्रॉनिक वाणिज्य संचालकों के जरिए आपूर्ति की गई वस्तुओं की डिलीवरी सेवाओं पर 5 प्रतिशत जीएसटी की सिफारिश की थी। केंद्र सरकार ने 27 अक्टूबर को अधिसूचना संख्या 09/2026-केंद्रीय कर (दर) जारी कर संशोधित कर व्यवस्था को अधिसूचित किया। इसके अनुसार बदलाव 1 नवंबर 2026 से प्रभावी होना है।
यह रियायती दर डाक और कुरियर सेवाओं पर लागू नहीं होगी। केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 9(5) और 22(1) के तहत, यदि डिलीवरी सेवा देने वाला व्यक्ति पंजीकरण के लिए उत्तरदायी नहीं है, तो संबंधित इलेक्ट्रॉनिक वाणिज्य संचालक को जीएसटी जमा करना होगा। इस व्यवस्था में कर भुगतान की जिम्मेदारी केवल सेवा प्रदाता तक सीमित नहीं रहती; पात्र परिस्थितियों में मंच को यह दायित्व निभाना पड़ता है।
नैसकॉम ने मांगा समय
नैसकॉम ने 28 अक्टूबर को वित्त मंत्रालय से नई दर लागू करने की तारीख 1 जनवरी 2027 तक टालने का आग्रह किया। संगठन के अनुसार कंपनियों को कर दर में बदलाव के अनुरूप अपनी तकनीकी और वित्तीय प्रणालियों को तैयार करने, अद्यतन करने तथा उनकी जांच करने के लिए समय चाहिए। इसमें बिलिंग, लेखांकन, कर अनुपालन और उद्यम संसाधन नियोजन से जुड़ी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
नैसकॉम ने ई-कॉमर्स संचालकों और लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाताओं के साथ परामर्श करने की भी मांग की है, ताकि नियमों की व्याख्या स्पष्ट हो और अमल के दौरान आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों का समाधान किया जा सके। फिलहाल सरकार की अधिसूचना में 1 नवंबर की तारीख दी गई है; इसे बदलने का अनुरोध अपने-आप में लागू तारीख में बदलाव नहीं करता।
बदलाव का कारोबारी असर
कर दर में कमी से ई-कॉमर्स के जरिए होने वाली डिलीवरी सेवाओं पर कर की गणना और भुगतान की प्रक्रिया बदलेगी। लेकिन इनपुट टैक्स क्रेडिट उपलब्ध न होने के कारण सेवा से जुड़े कर को अन्य खरीद पर चुकाए गए जीएसटी से समायोजित नहीं किया जा सकेगा। इसलिए कंपनियों को केवल दर ही नहीं, बल्कि अपने बिल, खातों और कर जमा करने की प्रणालियों में भी बदलाव करना होगा। डाक और कुरियर सेवाओं को इस दर-परिवर्तन से बाहर रखने का अंतर भी कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत में अंतरराज्यीय लेनदेन और आयात पर एकीकृत जीएसटी लागू होता है; राज्य के भीतर की आपूर्ति पर केंद्रीय और राज्य जीएसटी लगाया जाता है।
- जीएसटी गंतव्य-आधारित कर है; राजस्व सामान्यतः उस राज्य से जुड़ता है जहां वस्तु या सेवा का उपभोग होता है।
- जीएसटी परिषद में केंद्रीय वित्त मंत्री और राज्यों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। यह कर दरों और नियमों पर सिफारिश करती है।
- इनपुट टैक्स क्रेडिट से पात्र व्यवसाय अपनी खरीद पर चुकाए गए जीएसटी का समायोजन कर सकते हैं; अंतिम कर भार उपभोक्ता पर पड़ता है।
इस बदलाव का प्रभाव नई कर दर के साथ-साथ भुगतान की जिम्मेदारी और डिजिटल अनुपालन प्रणालियों पर भी पड़ेगा। उद्योग की मांग पर सरकार का निर्णय यह तय करेगा कि अधिसूचित समय-सारणी में कोई संशोधन होता है या नहीं।