आदित्य-L1 ने सौर विस्फोट के असमान विस्तार का लगाया पता

आदित्य-L1 ने सौर विस्फोट के असमान विस्तार का लगाया पता

भारतीय खगोलभौतिकी संस्थान (आईआईए), बेंगलुरु के वैज्ञानिकों ने आदित्य-L1 के वीईएलसी उपकरण से सूर्य के एक विस्फोट का अध्ययन कर उसके असमान विस्तार का पता लगाया है। यह विस्फोट 5 अगस्त 2024 को देखा गया था। अध्ययन 3 नवंबर 2026 को द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स में प्रकाशित हुआ। इसमें आदित्य-L1 के साथ नासा के सोलर डायनेमिक्स ऑब्जर्वेटरी (एसडीओ) के अवलोकनों और त्रि-आयामी मॉडलिंग का उपयोग किया गया।

कोरोनल मास इजेक्शन का विस्तार एक जैसा नहीं

अध्ययन के अनुसार, कोरोनल मास इजेक्शन (सीएमई) सूर्य से बाहर की ओर फैलने वाला गर्म प्लाज्मा और चुंबकीय क्षेत्र का विशाल उत्सर्जन है। आम तौर पर इसे एक फैलते हुए बुलबुले की तरह समझा जाता है, लेकिन अगस्त 2024 की घटना में इसका विस्तार सभी दिशाओं में समान नहीं था। वीईएलसी ने दृष्टि-रेखा के साथ प्लाज्मा का वेग 218 किलोमीटर प्रति सेकंड तक दर्ज किया। अध्ययन में प्रक्षेपित रेडियल गति 1,135 किलोमीटर प्रति सेकंड और आकाश-तल के समानांतर पार्श्व गति 692 किलोमीटर प्रति सेकंड मापी गई।

वीईएलसी ने लौह आयन की 5303 Å हरी वर्णक्रमीय रेखा का अवलोकन किया। इस रेखा से सूर्य के बाहरी वायुमंडल यानी कोरोना में प्लाज्मा की गति का अध्ययन किया जा सकता है। कोरोना का शुरुआती क्षेत्र सीएमई के जन्म और उसकी आरंभिक गति को समझने के लिए महत्त्वपूर्ण है।

पृथ्वी की ओर आने वाले सीएमई का आकलन

सीएमई का असमान विस्तार उसकी गति और दिशा को प्रभावित कर सकता है। इसलिए यह समझना जरूरी है कि कोई सौर उत्सर्जन किस दिशा में बढ़ रहा है और क्या वह पृथ्वी की ओर आ सकता है। पृथ्वी तक पहुँचने वाले सीएमई भू-चुंबकीय गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं। 21 अक्टूबर 2026 को वीईएलसी के डॉप्लर वेग चित्रों से प्लाज्मा की गति और सीएमई की संभावित दिशा से जुड़ी जानकारी मिलने की बात भी सामने आई थी।

वीईएलसी के अन्य अध्ययनों से भी इसकी उपयोगिता स्पष्ट होती है। 15 अक्टूबर 2026 को एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स में प्रकाशित अध्ययन में आदित्य-L1/वीईएलसी और यूरोप के प्रोबा-3/एएसपीआईआईसी के अवलोकनों का पहली बार संयुक्त विश्लेषण किया गया। इसमें 14 और 16 सितंबर 2025 के सीएमई शामिल थे। पहली घटना लगभग 645 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से चली, जबकि दूसरी की गति करीब 145 किलोमीटर प्रति सेकंड थी और उसका शुरुआती विस्तार अधिक मजबूत था। 16 जुलाई 2024 को वीईएलसी ने एक्स1.9 श्रेणी के सौर ज्वालामुखी से जुड़े सीएमई में कोरोना का मंद होना और लगभग +10 किलोमीटर प्रति सेकंड का डॉप्लर विस्थापन भी दर्ज किया था।

आदित्य-L1 के अवलोकनों का महत्त्व

वीईएलसी सूर्य की चमकीली सतह की तुलना में बहुत धुंधले कोरोना का अध्ययन करने वाला कोरोनाग्राफ है। यह लगभग 1.05 से 3 सौर त्रिज्या तक के भीतरी कोरोना को देखता है। सूर्य की सतह की तेज रोशनी को रोककर कोरोना देखने की यह क्षमता वैज्ञानिकों को सीएमई के शुरुआती चरणों की निगरानी में मदद करती है। अलग-अलग वेगों और दिशाओं के मापन से सौर उत्सर्जन के विकास की अधिक विस्तृत तस्वीर मिलती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • आदित्य-L1 सूर्य-पृथ्वी प्रणाली के एल1 क्षेत्र के आसपास हेलो कक्षा में काम करता है; वह गुरुत्वीय संतुलन बिंदु पर स्थिर नहीं रहता।
  • वीईएलसी का पूरा नाम विजिबल एमिशन लाइन कोरोनाग्राफ है और यह आदित्य-L1 पर स्थापित उपकरण है।
  • कोरोनाग्राफ में अपारदर्शी अवरोधक सूर्य के चमकीले प्रकाश को रोकता है, जिससे उसके पास स्थित धुंधला कोरोना देखा जा सकता है।
  • एसडीओ भू-समकालिक कक्षा से सूर्य का लगभग निरंतर अवलोकन करता है, हालांकि कुछ मौसमों में ग्रहण के कारण थोड़े समय के लिए दृश्य बाधित होता है।

आदित्य-L1 के मापन सौर विस्फोटों की गति और दिशा को बेहतर ढंग से समझने में मदद करते हैं। यह जानकारी पृथ्वी के आसपास अंतरिक्ष-मौसम के संभावित प्रभावों के आकलन के लिए उपयोगी है।

Originally written on November 3, 2026 and last modified on November 3, 2026.

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