अशोक कुमार महापात्र का निधन, भारतीय न्यूरोसर्जरी को बड़ी क्षति
प्रख्यात न्यूरोसर्जन और पद्मश्री से सम्मानित डॉ. अशोक कुमार महापात्र का 2 नवंबर 2026 को 74 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में उपचाराधीन थे। चिकित्सा सेवा, संस्थागत नेतृत्व और शोध में उनके योगदान ने उन्हें देश के प्रमुख न्यूरोसर्जनों में स्थान दिलाया।
चिकित्सा संस्थानों में नेतृत्व की अहम भूमिका
डॉ. महापात्र ने देश के कई प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में वरिष्ठ जिम्मेदारियां निभाईं। वह 2006 से 2009 तक लखनऊ स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक रहे। इसके बाद उन्होंने एम्स नई दिल्ली में न्यूरोसर्जरी विभाग का नेतृत्व किया। 2012 से 2016 तक वह एम्स भुवनेश्वर के संस्थापक निदेशक रहे और संस्थान के शुरुआती विकास में योगदान दिया।
वह भुवनेश्वर स्थित शिक्षा ‘ओ’ अनुसंधान विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में 2020 से 2022 तक कार्यरत रहे। निधन के समय वह इसी विश्वविद्यालय में स्वास्थ्य विज्ञान के प्रधान सलाहकार थे। उनकी अलग-अलग भूमिकाएं चिकित्सा शिक्षा, मरीजों की देखभाल और संस्थागत प्रशासन के क्षेत्र में उनके व्यापक अनुभव को दर्शाती हैं।
जगा-कालिया की शल्यक्रिया से मिली विशेष पहचान
डॉ. महापात्र के करियर की चर्चित उपलब्धियों में 2017 में एम्स नई दिल्ली में की गई एक जटिल शल्यक्रिया शामिल है। उन्होंने चिकित्सकों की टीम का नेतृत्व करते हुए सिर के हिस्से से जुड़े जुड़वां बच्चों जगा और कालिया को अलग करने के लिए 16 घंटे तक चली शल्यक्रिया की। इस प्रकार के जुड़वां बच्चों को क्रेनियोपैगस कहा जाता है। यह मामला जटिल न्यूरोसर्जरी और बहु-विषयक चिकित्सा समन्वय की चुनौती को सामने लाने के कारण व्यापक चर्चा में रहा।
उनका योगदान शल्यक्रिया तक सीमित नहीं था। उन्होंने सौ से अधिक वैज्ञानिक लेखों में योगदान दिया। उनके शैक्षणिक कार्यों का उल्लेख राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध-सूचियों में मिलता है। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने 3 नवंबर को उनके निधन पर शोक व्यक्त किया।
सम्मान और शोध योगदान
चिकित्सा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने 2024 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया। यह देश का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। इससे पहले, 2022 में ओडिशा बिग्यान अकादमी ने उन्हें वैज्ञानिक उत्कृष्टता के लिए सी.वी. रमन पुरस्कार प्रदान किया था। ये सम्मान उनके चिकित्सकीय कार्य और वैज्ञानिक योगदान की राष्ट्रीय तथा राज्य स्तर पर हुई पहचान को दर्शाते हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- पद्मश्री भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।
- डॉ. महापात्र को चिकित्सा के क्षेत्र में योगदान के लिए 2024 में पद्मश्री मिला था।
- ओडिशा बिग्यान अकादमी ने उन्हें 2022 में सी.वी. रमन पुरस्कार से सम्मानित किया।
- क्रेनियोपैगस जुड़वां वे होते हैं जिनके सिर के हिस्से आपस में जुड़े होते हैं।
डॉ. महापात्र का निधन भारत के चिकित्सा और शैक्षणिक जगत के लिए बड़ी क्षति है। उनकी सेवाएं और जटिल शल्यक्रियाओं में नेतृत्व आने वाले चिकित्सकों के लिए प्रेरक विरासत बने रहेंगे।