अरुणाचल की ऊँचाई पर मिली दुर्लभ हिमालयी मछली, जैव विविधता को नया संकेत

अरुणाचल की ऊँचाई पर मिली दुर्लभ हिमालयी मछली, जैव विविधता को नया संकेत

अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले की पांगकांग तेंग त्सो झील में हिमालयी ठंडे पानी की एक दुर्लभ मछली Schizopygopsis waddellii का भारत में पहली बार रिकॉर्ड किया गया है। यह खोज देश की उच्च हिमालयी मीठे पानी की जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि यह प्रजाति अब तक मुख्य रूप से तिब्बत और चीन के पठारी क्षेत्रों में ही जानी जाती थी।

कैसे हुई पहचान

इस प्रजाति की पहचान क्षेत्रीय नमूना संग्रह और प्रयोगशाला परीक्षण के बाद की गई। आईसीएआर-नेशनल/सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ कोल्डवॉटर फिशरीज रिसर्च, भीमताल के शोधकर्ताओं ने जुलाई 2026 में दस नमूने एकत्र किए थे। इसमें अरुणाचल प्रदेश के मत्स्य विभाग और तवांग की शार-त्सो समिति का सहयोग भी शामिल रहा।

पहचान के लिए केवल बाहरी बनावट पर निर्भर नहीं रहा गया, बल्कि इंटीग्रेटेड टैक्सोनॉमिक अप्रोच अपनाई गई। इसमें मछली की आकृति-विज्ञान संबंधी विशेषताओं के साथ माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए विश्लेषण को भी जोड़ा गया। इसी वैज्ञानिक पुष्टि के बाद इसे भारत में पहली बार दर्ज किया गया।

पांगकांग तेंग त्सो झील क्यों खास है

पांगकांग तेंग त्सो झील समुद्र तल से लगभग 12,800 फीट की ऊँचाई पर स्थित एक प्राकृतिक झील है। यह तवांग जिले में भारत-चीन सीमा के पास स्थित है और पूर्वी हिमालयी मीठे पानी की पारिस्थितिकी का हिस्सा है। ऐसी ऊँचाई वाली झीलें ठंडे पानी में रहने वाली जलीय प्रजातियों के लिए उपयुक्त आवास मानी जाती हैं।

इसी वजह से यह खोज केवल एक नई मछली के रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संकेत भी देती है कि अरुणाचल की ऊँचाई वाली झीलों में अभी और भी दुर्लभ जलीय प्रजातियाँ मौजूद हो सकती हैं।

प्रजाति की पहचान और संरक्षण का महत्व

Schizopygopsis waddellii साइप्रिनिडी परिवार की मछली है, जिसमें कार्प और मिनो जैसी कई प्रजातियाँ शामिल हैं। यह ठंडे मीठे पानी और ऊँचाई वाले वातावरण के लिए अनुकूलित है। इसकी बनावट में लंबा बेलनाकार शरीर, कुंद थूथन, सबटर्मिनल मुँह और गहराई से फटी हुई पूँछ जैसी विशेषताएँ शामिल हैं। निचले होंठ और थूथन के आसपास कठोर, प्लेट जैसी संरचना इसकी पहचान का एक प्रमुख संकेत है।

यह रिकॉर्ड भारत की जैव विविधता सूची में एक नई प्रजाति जोड़ता है और भविष्य के सर्वेक्षणों के लिए आधार तैयार करता है। साथ ही, यह पूर्वी हिमालयी क्षेत्र में ठंडे पानी की जलीय प्रजातियों के संरक्षण और अध्ययन की जरूरत को भी रेखांकित करता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • Schizopygopsis waddellii साइप्रिनिडी परिवार की मीठे पानी की मछली है।
  • भारत में इसका पहला रिकॉर्ड 2026 में अरुणाचल प्रदेश से मिला।
  • पांगकांग तेंग त्सो झील लगभग 12,800 फीट की ऊँचाई पर स्थित है।
  • यह प्रजाति पहले तिब्बत की यामडोक झील सहित तिब्बती और चीनी पठारों में जानी जाती थी।

यह खोज बताती है कि हिमालयी उच्च-ऊँचाई वाले जलस्रोत भारत की जैव विविधता के लिहाज से अब भी कई अनदेखे वैज्ञानिक संकेत समेटे हुए हैं।

Originally written on September 12, 2026 and last modified on September 12, 2026.

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