अब ‘पनीर’ नाम पर सख्ती: नकली विकल्पों की लेबलिंग पर FSSAI का प्रस्ताव
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने ऐसे उत्पादों पर ‘पनीर’ नाम के इस्तेमाल को सीमित करने का प्रस्ताव रखा है, जो असली दूध से बने पनीर के बजाय डेयरी एनालॉग या अन्य वैकल्पिक सामग्री से तैयार किए जाते हैं। यह कदम उपभोक्ताओं को सही जानकारी देने और उत्पाद के नाम को उसकी वास्तविक संरचना से जोड़ने की दिशा में माना जा रहा है।
क्या है नया प्रस्ताव
FSSAI ने खाद्य सुरक्षा और मानक (विक्रय पर निषेध और प्रतिबंध) संशोधन विनियम, 2026 के मसौदे में यह प्रावधान रखा है कि ‘एनालॉग इन डेयरी कॉन्टेक्स्ट’ श्रेणी में पंजीकृत या लाइसेंस प्राप्त उत्पादों को ‘पनीर’ नाम से नहीं बेचा या प्रचारित किया जाएगा। इसका असर उन उत्पादों पर होगा जो होटल, रेस्टोरेंट, कैटरिंग और खुदरा बाजार में पनीर जैसे नाम से बिकते हैं, जबकि उनकी संरचना पारंपरिक दूध-आधारित पनीर से अलग होती है।
मसौदे के अनुसार, ऐसे उत्पादों की पहचान लेबल, मेन्यू कार्ड, पैकेजिंग और अन्य उपभोक्ता-संपर्क माध्यमों पर स्पष्ट रूप से होनी चाहिए। FSSAI का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नामकरण, लेबलिंग और मार्केटिंग में भ्रम की स्थिति न बने।
उपभोक्ता हित और बाजार पर असर
पनीर भारतीय भोजन का एक बेहद सामान्य और लोकप्रिय डेयरी उत्पाद है। यह ताजा, अम्ल-सेट चीज़ की श्रेणी में आता है और घरों से लेकर बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक व्यापक रूप से इस्तेमाल होता है। दूसरी ओर, डेयरी एनालॉग उत्पाद कम लागत वाले विकल्प के रूप में बाजार में मौजूद रहते हैं। समस्या तब पैदा होती है जब ऐसे विकल्पों को भी ‘पनीर’ के नाम से पेश किया जाता है, जिससे उपभोक्ता को वास्तविक सामग्री के बारे में गलत धारणा बन सकती है।
FSSAI के मौजूदा लेबलिंग नियम भी इस बात पर जोर देते हैं कि खाद्य जानकारी ऐसी होनी चाहिए, जिससे उपभोक्ता उत्पाद को स्पष्ट रूप से पहचान सके। नया प्रस्ताव इसी सिद्धांत को और मजबूत करता है।
राज्यों की कार्रवाई और राष्ट्रीय स्तर की दिशा
इस मुद्दे पर कुछ राज्य पहले ही सख्ती दिखा चुके हैं। कर्नाटक और तेलंगाना ने एनालॉग पनीर के खिलाफ कार्रवाई की है। तेलंगाना में इस पर एक साल के लिए प्रतिबंध 10 सितंबर 2026 से प्रभावी हुआ। अब FSSAI का प्रस्ताव इस विषय को राष्ट्रीय स्तर पर एक समान नियामकीय ढांचे में लाने की कोशिश है।
मसौदा अधिसूचना 22 सितंबर 2026 को जारी की गई है और इस पर 60 दिनों तक आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं। सार्वजनिक और हितधारक सुझाव FSSAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को भेजे जा सकते हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- FSSAI की स्थापना खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत एक वैधानिक निकाय के रूप में की गई थी।
- खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 ने भारत के खाद्य कानूनों को एक ही ढांचे में समेकित किया।
- पनीर को खाद्य अध्ययन में एक ताजा चीज़ माना जाता है और यह दूध से बनाया जाता है।
- डेयरी एनालॉग उत्पाद अक्सर होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग में कम लागत वाले विकल्प के रूप में उपयोग किए जाते हैं।
कुल मिलाकर, यह प्रस्ताव खाद्य नामों की पारदर्शिता, उपभोक्ता अधिकारों और बाजार में सही लेबलिंग को लेकर एक महत्वपूर्ण नियामकीय कदम है। यदि इसे अंतिम मंजूरी मिलती है, तो पनीर जैसे लोकप्रिय खाद्य नामों के दुरुपयोग पर देशभर में एकरूप नियंत्रण लागू हो सकता है।